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Sunday, July 12, 2020

बलिदान दिवस पर शहीद डिप्टी कलेक्टर हिकमत उल्ला को किया नमन

अंग्रेजो के विरुद्ध 32 दिनों तक चलाई थी सरकार

फतेहपुर, शमशाद खान । 1857 के स्वतंत्रता संग्राम के योद्धा शहीद डिप्टी कलेक्टर हिकमत उल्ला खां का 164 वां बलिदान दिवस श्रद्धापूर्वक मनाया गया। इस दौरान उन्हें श्रद्धासुमन अर्पित कर श्रद्धांजलि दी गयी। रविवार को स्वतंत्रता संग्राम सेनानी के बलिदान दिवस पर शहीद डिप्टी कलेक्टर हिकमत उल्ला सेवा संस्थान द्वारा खलीलनगर स्थित संस्था के कैम्प कार्यालय में आजादी के नायक का बलिदान दिवस मनाकर उन्हें श्रद्धासुमन अर्पित करते बलिदान को याद किया गया। इस दौरान कोरोना महामारी को देखते हुए संक्षिप्त गोष्ठी का आयोजन किया गया था। जिसे सम्बोधित करते हुए संस्था के अध्यक्ष मोहीउद्दीन एडवोकेट ने शहीद हिकमत उल्ला के स्वतंत्रता संग्राम की लड़ाई में उनके संघर्षों को याद करते हुए कहा कि 1857 के स्वतंत्रता आंदोलन के विद्रोह में अंग्रेजी सरकार के दौरान जनपद में डिप्टी कलेक्टर के पद तैनात रहे हिकमत उल्ला ने विद्रोह कर अंग्रेजों से बागवत कर दी और खागा के दरियाव सिंह व उनके पुत्र सुजान सिंह, जमरावां के शिवदयाल रघुवंशी व बिंदकी के जोधा सिंह अटैया के साथ मिलकर जिले में होने वाले आंदोलन का नेतृत्व किया और अंग्रेजी हुकूमत के विरुद्ध जनपद में 32 दिनों तक
गोष्ठी को सम्बोधित करते संस्था के अध्यक्ष मोहीउद्दीन एडवोकेट।
देश सरकार चलाई। आजादी के मतवालों के आवाहन पर डिप्टी कलेक्टर हिकमत उल्ला खां ने 10 जून को जेल के कैदियो को आजाद कर आजादी का परचम फहरा दिया तथा नाना साहब ने हिकमत उल्ला को फतेहपुर का प्रशासक नियुक्त किया। हसवा के लाला मन्नू लाल खत्री, बिलन्दा के मीरमुंशी आबिद अली जैसे देशद्रोहियों के कारण 12 जुलाई को हिकमत उल्ला खां गिरफ्तार हुये और कोतवाली गेट पर फांसी दे दी। अंग्रेजों द्वारा क्रांतिकारियों के दिलो में दहशत भरने के लिये सदर कोतवाली में उनके सिर कलम करके टांग दिया था। उन्होंने बताया कि कोरोना महामारी के कारण उनके बलिदान स्थल पर होने वाले कार्यक्रम को स्थगित कर दिया गया है। जल्द ही एक प्रतिनिधि मंडल के माध्यम से नगर पालिका अध्यक्ष से मिलकर शहीद की समाधि स्थल को बनवाने की मांग की जायेगी। देश की आजादी में अहम भूमिका अदा करने वाले देश के वीर सपूतों को याद करते हुए उनकी मगफिरत की दुआएँ भी की गयी। इस मौके पर माज उद्दीन, अशरफ अली, सोहराब अली, फरजान उद्दीन, आफाक आदि मौजूद रहें।

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