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Wednesday, July 29, 2020

समाज सुधारक विद्या सागर का समाज ऋणी

हमीरपुर, महेश अवस्थी  । वर्णिता संस्था सुमेरपुर की विमर्श विविधा ने जिनका देश ऋणी है, के तहत समाज सुधार के सूरमा ईश्वर चंद्र विद्यासागर की पुण्यतिथि  मनाई । संस्था के अध्यक्ष डॉक्टर भवानी दीन ने कहा कि ईश्वर चंद्र विद्यासागर सच्चे अर्थों में समाज उत्थान के अगुआकार थे, वह निर्धन होकर भी दया के सागर थे, लोकसेवा उनके रोम रोम में बसी हुई थी, ईश्वर चंद का जन्म बंगाल के मेदिनीपुर के वीर सिह गांव में ठाकुर दास बंदोपाध्याय के घर 26 सितंबर 18 20 को हुआ था, मां का नाम भगवती देवी था, इन्होंने कोलकाता के संस्कृत कॉलेज में पढ़ना शुरू किया,संस्कृत कॉलेज ने इन्हें विद्यार्थी जीवन में ही प्रतिभा को देखते हुए विद्यासागर की उपाधि दे दी थी ।  जो बाद में उपनाम बन गई ।  15 वर्षो तक ईश्वरचंद्र अपनी प्रतिभा के बल पर विभिन्न पदों पर रहे । विद्यासागर स्त्री शिक्षा के प्रबल समर्थक थे, उन्होंने अनेक विद्यार्थियों, सैकड़ों विधवाओं तथा अनेक लोगों को मदद देकर आर्थिक संकट से उबारा था । समाज सुधार इनकी पहली रुचि थी, वे विधवा विवाह के प्रबल समर्थक थे । जिन्होंने अपने अथक प्रयासों
से 1865 में विधवा पुनर्विवाह को वैध कराकर कानून पास कराया, जो स्त्री समाज की एक बहुत बड़ी सेवा थी । वे अपने जीवन के अंतिम 20 वर्षों में बिहार के जामताड़ा जिले के आदिवासियों के कल्याण के लिए उनके बीच रहे  ।इसीलिए उनके निवास का नाम नंदनकानन रखा गया था ।  राजा राममोहन राय के बाद समाज सुधार के क्षेत्र में ईश्वर चंद्र विद्यासागर का नाम आता है ।  विधवा पुनर्विवाह के लिए विद्यासागर ने जो आंदोलन किया था ,वह अपने आप में अविस्मर्णीय और प्रशन्सनीय था । ईश्वरचंद ने 25 विधवाओं का पुनर्विवाह कराया, नारी शिक्षा के लिए विद्यासागर ने बहुत प्रयास किए । इन्होने 35 स्कूल खुलवाये।ईश्वर चन्द्र विद्यासागर ने 52 पुस्तकें लिखी, जिनमे 17 पुस्तकें संस्कृत में, पांच पुस्तकें अंग्रेजी में, शेष बंगला मे लिखी । इस महान समाज सुधारक  का निधन 29 जुलाई 1891 को हो गया । उनके योगदान को भुलाया नहीं जा सकता है ।अवधेश कुमार गुप्त एडवोकेट,राजकुमार सोनी सरार्फ, पिन्कू सिन्ह, विजय चौरसिया, लल्लन गुप्ता और प्रांशु सोनी मौजूद रहे।

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