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Monday, July 27, 2020

सावन के चौथे सोमवार को बामदेवेश्वर पर्वत में उमड़े श्रद्धालु

भोर होते ही श्रद्धालुओं की मंदिर में लगी लंबी कतार 
कोरोना काल में दूर से ही हो रहे हैं भगवान शिव के दर्शन 
पाइप में जल और दूध डालकर शिव का किया जा रहा अभिषेक 

बांदा, के एस दुबे । एक समय था जब बामदेवेश्वर पर्वत में भगवान शिव का जलाभिष्ेाक, दुग्धाभिषेक करने वाले श्रद्धालुओं की कतार पौ फटने से लेकर देर रात तक नहीं टूटती थी। लेकिन कोरोना काल में लोगों की आस्था पर भी ठेस पहुंची है। सावन का महीना भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए सबसे अच्छा माना जाता है। लोग पूरी आस्था के साथ भगवान शिव का दर्शन करते हैं और अपने सामथ्र्य के अनुसार अभिषेक भी करते हैं, लेकिन अबकी बार कोरोना काल में दूर से ही श्रद्धालुओं को भगवान शिव के दर्शन हो पा रहे हैं। सावन के चैथे सोमवार को भोलेनाथ के दर्शन के लिए श्रद्धालुुओं का आवागमन बामदेवेश्वर पर्वत में बना रहा। सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करते हुए श्रद्धालु मास्क लगाकर शिव दर्शन के लिए पहुंचे। 
गुफा के अंदर भगवान बामदेवेश्वर की सेवा में लगे स्वयंसेवक
शिव पुराण में सावन के महीने में शिव आराधना का विशेष महत्व बताया गया। माता पार्वती ने शिव को पति के रूप में प्राप्त करने के लिये जब विशेष रूप से तपस्या की थी वह सावन का ही महीना था। इसलिये ऐसा माना जाता है कि भेलेनाथ के जो भक्त पूरे सावन के महीने में विधिविधान के साथ शिव आराधना करते हैं, उन्हें सिर्फ एक माह के पूजन से वर्ष भर के पूजन का पुण्य फल प्राप्त हो जाता है। कोरोना काल में सावन के तीसरे सोमवार को वामदेवेश्वर मंदिर में विराजे देवाधिदेव भेलेनाथ के दर्शनों के लिये सुबह से ही भक्तों की भीड़ जुटना शुरू हो गई थी। भेलेनाथ के भक्त हाथ में गंगाजल और दूध के साथ अन्य पूजन सामग्री लिये हुए कतारों में खड़े अपनी बारी का बेसब्री से इंतजार करते देखे गये। इस दौरान कोई भक्त ओम नमः शिवाय का जाप कर रहा था तो कोई बोल बम के उद्घोष
भगवान भोलेनाथ का अभिषेक करने को लगी लंबी लाइन
से वातावरण को भक्तिमय बना रहा था। तमाम श्रद्धालुओं ने कोरोना से बचने के लिए मास्क तो पहन रखा था, लेकिन सोशल डिस्टेंसिंग जैसे प्रतिबंध यहां बेमानी साबित हो गए। हालांकि मंदिर कमेटी ने पूजा के लिए विशेष इंतजाम कर रखे थे और भक्तों को भगवान शिव की गुफा में जाने पर प्रतिबंध लगाया गया था। भगवान शिव के जलाभिषेक के लिए कमेटी की ओर से पाइप लाइन डालकर जुगाड़ किया गया था। मंदिर प्रांगण से लेकर बाहर तक सुरक्षा के लिये पुलिस कर्मचारियों की तैनाती की गई थी। कतार को आगे बढ़ाने में मंदिर कमेटी के स्वयंसेवक भी लगे हुए थे। उधर कालिंजर स्थित नीलकंठेश्वर महादेव के दर्शनों को भी भक्तों की मंदिर प्रांगण से लेकर ऊपर सीढ़ियों तक लंबी कतारें लगी रहीं। बांदा और नरैनी कस्बे से कालिंजर जाने के लिये दर्जनों की तादाद में चार पहिया वाहनों की लाइनें लगी हुई थीं। 
कभी-कभी ऐसे भी इकट्ठा होते रहे श्रद्धालु

कोरोना के प्रति श्रद्धालुओं को किया गया जागरूक 

बांदा। बामदेवेश्वर मंदिर में पहुंचे श्रद्धालुओं को कोरोना वायरस से बचाव के प्रति जागरूक किया जा रहा है। पूरे सावन माह में यह सिलसिला चलता रहा। मंदिर में कमेटी के अध्यक्ष आशुतोष दीक्षित वीर की अगुवाई में कमेटी के लोगोें ने श्रद्धालुओं को एक-एक करके दर्शन कराने का इंतजाम किया। मंदिर परिसर में भीड़ बढ़ने की स्थिति मेें कमेटी के लोग माइक से श्रद्धालुओं सोशल डिस्टेंसिंग व मास्क पहनने को लेकर जागरूक करते रहे। ताकि कोरोना काल में किसी भी प्रकार की श्रद्धालुओं के द्वारा लापरवाही न की जा सके। 

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