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Tuesday, July 28, 2020

कोरोना योद्धा के प्रमाण पत्र बंट रहे गली-गली

संस्थाओं में कोरोना योद्धा बनाने की मची होड़
गुमनाम संगठनों ने हाईलाइट होने के लिये कोरोना आपदा को बनाया अवसर

फतेहपुर, शमशाद खान । वैश्विक महामारी कोरोना वायरस के प्रकोप से जहाँ सम्पूर्ण विश्व प्रभावित है। भारत मे कोविड 19 का आंकड़ा 15 लाख के करीब पहुंच रहा है। वहीं प्रदेश में कोरोना संक्रमितों की सख्या बढना जारी है और जनपद भी इससे अछूता नही है। इस आपदा से पूरा देश परेशान है वही दूसरी ओर कुछ समाजिक संगठन कोरोना की इस आपदा को अपने लिये अवसरों के रूप में देख रहे है। इन संगठनों द्वारा खुद को हाईलाइट करने के उद्देश्य से मनमाफिक लोगों को कोरोना योद्धा की उपाधि से नवाजने का खेल शुरू कर दिया गया है। कोविड-19 की शुरुआत के चरण में सरकार द्वारा देश भर में किये गए लॉकडाउन में सरकार द्वारा कोरोना महामारी से लड़ाई के दौरान चिकित्सा स्वास्थ्य, सफाई कार्य से जुड़े लोगों के अलावा कुछ अन्य को कोरोना योद्धा घोषित किया गया था। सरकार का ऐसा करने का उद्देश्य केवल कोरोना महामारी की रोकथाम में लगे हुए लोगो का उत्साहवर्धन करने के साथ-साथ उनके योगदान की अहमियत को महसूस कराना था। कई चरणों के लॉकडाउन के दौरान लोगों के काम धंधे बन्द हो गये और बड़ी सँख्या में लोगों के सामने रोजी-रोटी की समस्या खड़ी हो गयीं।
कोरोना महामारी के कारण फैक्ट्री, मिल व निर्माण उद्योग बन्द होने से महानगरों में रोजगार को गये लोगों का पलायन शुरू हो गया। सीमाएं सील होने व यातायात बन्द होने की वजह से मजदूरों को सैकड़ों किलोमीटर की दूरी पैदल ही तय करनी पड़ी। प्रवासी मजदूरों के साथ जरूरतमन्दों की मदद करने का जज्बा लेकर कई सामाजिक संगठनों के अलावा समाज के लिये कुछ करने का जज्बा रखने वालों ने मदद का हाथ बढ़ाया। लॉकडाउन की वजह से काम धंधे बन्द होने से परेशान सैकड़ो परिवारों के घरो में चूल्हा जलाने मे मदद की। हजारों लोगों तक भोजन पहचाने की भी व्यवस्था की गयी। ऐसे लोगों की जितनी भी सराहना की जाय कम ही है लेकिन वहीं दूसरी ओर बड़ी संख्या में ऐसे भी सामाजिक संगठन दिखाई देने लगे जिन्होंने लॉकडाउन में खुद केवल फोटो खिंचाने तक ही जरूरतमन्दों की मदद की। ऐसे सामाजिक संगठन द्वारा अब खुद की प्रसिद्धि के लिये मनमाफिक तरीके से रेवड़ियों की तरह लोगो को कोरोना योद्धा घोषित करने का खेल शुरू कर दिया गया है। मनमाफिक लोगों को संगठन द्वारा कोरोना वारियर्स घोषित कर उन्हें बाकायदा प्रमाण पत्र जारी किया जाता है और फिर इसका सोशल मीडिया के जरिए जमकर महिमामंडन भी किया जाता है। हालांकि ऐसा करने वाले सामाजिक संगठनों के पास किसी को भी कोरोना योद्धा घोषित करने का न तो कोई मानक होता है और न ही योद्धा बताने का कोई अधिकार। कोरोनाकाल में लोगों की मदद करने में सामाजिक संगठनों के साथ समाजसेवियों द्वारा राहत पहुंचाई गयी है। हलांकि इस कार्य में पर्दे के पीछे से मदद करने वाले लोग भी शामिल रहे हैं। ऐसे लोग किसी प्रमाण पत्र के प्रति लालायित नही  बल्कि जनता खुद उनके द्वारा किये गये कार्यों की साक्षी और सराहना करने वाली है। स्थिति तो तब और भी मजेदार हो जाती है जब कोरोना योद्धा का तमगा पाये हुए लोग इसका सोशल मीडिया पर बखान करते हैं और इसे किसी की विशेष कृपा बताते है। अभी भी गुमनाम दिखाई दे रहे समाजिक संगठनों द्वारा खुद की प्रसिद्धि हासिल करने के लिये अपने मन पसन्द लोगों को कोरोना योद्धा घोषित करने का खेल जारी है। हाल तो यह है कि रेवड़ियों की तरह बंटने वाले कोरोना योद्धा के प्रमाण पत्र के लिये सिफारिश तक चलने लगी है।

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