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Tuesday, July 28, 2020

ग्रामीण भारत में कोरोना का बढ़ता प्रभाव चिंता का विषय: आलोक

बांदा, के एस दुबे । कोरोना महामारी ने भारत समेत संपूर्ण विश्व के मानव जीवन पर उथल-पुथल मचा कर रख दिया है। शुरुआती दिनों में तो संपूर्ण विश्व का जनमानस इस बात पर चिंतित था की क्या मानव सभ्यता के लिए यह एक सुनामी तो नहीं जो मानव जीवन को नष्ट कर सकती है। हालांकि धीरे धीरे इसकी घातक क्षमता काफी कम हुई किंतु संक्रमण की रफ्तार में अभी हाल फिलहाल कोई कमी देखने को नहीं मिल रही है।
जाग्रति संस्थान के आलोक यादव ने कहा कि भारत में कोविड-19 के लगभग 80ः मामले लगभग 50 जिलों शहरी क्षेत्रों और कुल संक्रमित मरीजों में आधे से अधिक मरीज 10 शहरों से हैं। कोविड-19 से शुरुआत में महानगर और प्रमुख शहर प्रभावित हुए थे लेकिन अब धीरे-धीरे छोटे शहरों कस्बा और ग्रामीण परिवेश से भी केसों का लगातार आना चिंता का विषय है। अब यह सोचने का कोई कारण नहीं है की कोविड-19 ग्रामीण भारत को प्रभावित नहीं करेगा। उत्तर प्रदेश, बिहार जैसे बड़े प्रदेशों के दूरदराज के जिलों में ग्रामीण क्षेत्रों से मामलों में हालिया उछाल इस बात का प्रमाण है, कि ग्रामीण भारत में भी कोविड-19 से देश अछूता नहीं रहेगा। भारत को ग्रामीण क्षेत्रों पर कोविड-19 के प्रभाव को कम करने के लिए आज प्रभावी रणनीति बनाने की आवश्यकता है। इस दिशा में पहला कदम होना चाहिए कि ग्रामीण क्षेत्रों में निर्वाचित पंचायती राज प्रतिनिधि जैसे ग्राम प्रधान, वार्ड सदस्य, सामुदायिक स्वास्थ्य कार्यकर्ता यथा आशा और आंगनवाड़ी के अलावा जागरूक व्यक्तियों, समाजसेवियों के माध्यम से लोगों में बीमारी और उससे बचाव के बारे में एक वृहद कार्यक्रम लाया जाए, ग्रामीण क्षेत्रों में पहले से भी कुछ प्रणालियां बनी
आलोक यादव 
हुई है जैसे ग्रामीण स्वास्थ्य, स्वच्छता और पोषण समितियों का उचित प्रयोग किया जाए जो सुसुप्त अवस्था में है उनका उचित उपयोग कर उन्हें सक्रिय किया जाए पंचायत तंत्र जैसे ग्राम सभा (सामाजिक दूरी बनाए रखते हुए) का भी जागरूकता पैदा करने के लिए उपयोग किया जाए। केरल राज्य इस बात का जीता जागता उदाहरण है, जिसमें पंचायत सदस्यों और समाजसेवियों की सक्रिय भागीदारी से बीमारी को काफी हद तक रोका जा सका है। साबुन से हाथ धोना सैनिटाइजर का उपयोग करना खांसते वक्त टिशू पेपर का उपयोग करना, मास्क का उपयोग करना तथा 2 गज की दूरी बनाए रखना जैसे नियम लागू करने में व्यावहारिक चुनौतियां हैं, वही सैनिटाइजर, मास्क, टिशू पेपर आदि महंगे होने की वजह से ग्रामीण परिवेश में संभव नहीं है। साबुन से हाथ धोने का विकल्प अच्छा है यह सब व्यवहार लोगों की आदत में शामिल करने के लिए शीघ्र ही समग्र कदम उठाने होंगे। यह तभी संभव होगा जब जनभागीदारी को इस प्रक्रिया में बढ़ावा दिया जाए वहीं दूसरी समस्या जो कोविड-19 के बाद भारतीय ग्रामीण परिवेश में उन प्रवासी कामगार मजदूरों की है जो अपना काम धंधा छोड़कर अपने गांव लौट आए और आज भुखमरी की कगार पर खड़े है। मानसिक रूप से अपने आप को विक्षिप्त सा महसूस करने वाले आत्मग्लानि, भुखमरी और लदे हुए कर्ज के बोझ से तंग आकर आत्महत्या को मजबूर हो रहे हैं। ऐसे लोगों के लिए मनरेगा और अन्य सामाजिक व आर्थिक लाभो जैसे विभिन्न तंत्रों, संस्थाओं के माध्यम से स्थानीय रोजगार के अवसरों को सुचारु व बृहद रूप पर लागू करने की भी नितांत आवश्यकता है। दुनिया भर से अनुभव मिला है कि बीमार व्यक्ति और स्वास्थ्य कर्मचारियों के साथ भेदभाव कोरोना की रोकथाम में बड़ी बाधा बन सकते हैं सभी रोगियों को विशेष देखभाल की तो जरूरत है ही इसके अलावा उन्हें प्रोत्साहन की भी प्रथम जरूरत है। अक्सर देखा गया है कि कोरोना संक्रमित मरीज को जिस हेय दृष्टि से देखा जा रहा है, उसके साथ स्वास्थ्य कर्मियों का व्यवहार भी ठीक नहीं है, रहन-सहन, खान-पान, देखभाल की लगातार अनदेखी हो रही है। जिससे उसका हौसला टूटता है और वह आत्म ग्लानि की वजह से हृदयाघात का शिकार हो रहा है। ऐसी तमाम खबरें पिछले दिनों प्रमुखता से देखी गई सभी रोगियों को विशेष देखभाल की आवश्यकता है खासकर ग्राम स्तर पर यह तभी संभव होगा जब बीमार की देखभाल चाहे वह गांव के किसी भी हिस्से या समाज के किसी भी तबके से हो पूरा गांव एकजुट होकर करें तो उसका एक विशेष असर पड़ेगा। चूँकि गाँवों में जाति समुदायों और अन्य सामाजिक आधारों पर भेदभाव अब भी देखा जाता है जनपद चित्रकूट का पाठा क्षेत्र जहां कॉल आदिवासियों की बाहुल्यता है उनकी सामाजिक और आर्थिक स्थिति किसी से छिपी नहीं है। महामारी इस चुनौती को और अधिक बढ़ा सकती है। अतः इसके लिए हर गांव में सामाजिक सौहार्द की साझी योजना की आवश्यकता होगी। कोविड-19 महामारी ने मौजूदा सुविधाओं की उपलब्धता को और भी कम कर दिया है सार्वजनिक परिवहन की कमी हो गई है ऐसे में ग्रामीण क्षेत्रों में प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं को स्वास्थ्य सेवा बैन और अन्य यंत्र के अतिरिक्त प्रावधान के साथ मजबूत किया जाए कोविड-19 के खिलाफ टेस्ट एंड ट्रीट (जांच और इलाज) प्रमुख रणनीति है। ग्रामीण भारत के लिए इस रणनीति को लागू कर ग्रामीण क्षेत्रों में परीक्षण सुविधाओं को गति देकर कोविड-19 उपचार सेवाओं तक पहुंच बढ़ाने की नितांत आवश्यकता है तभी हम पूरे भारत में कोरोना के खिलाफ लड़ पाएंगे। 


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