मर्यादा पुरुषोत्तम प्रभु श्री राम........ - Amja Bharat

Amja Bharat

All Media and Journalist Association

Breaking

Post Top Ad

Responsive Ads Here

Thursday, July 30, 2020

मर्यादा पुरुषोत्तम प्रभु श्री राम........

देवेश प्रताप सिंह राठौर 
(वरिष्ठ पत्रकार)

मर्यादा पुरुषोत्तम श्री राम 500 वर्ष बाद उनके लिए घर का निर्माण किया जा रहा है मर्यादा पुरुषोत्तम श्री राम 5 अगस्त को उनके रहने के लिए भव्य मंदिर का निर्माण किया जाएगा जिसकी  देश के तेजस्वी पराक्रमी और सख्ती साली देश के प्रधानमंत्री माननीय नरेंद्र मोदी जी राम मंदिर अयोध्या में न्यू रखे उसका श्री गणेश करेंगे यह दिन हिंदुओं के लिए 500 वर्षों बाद यह दिन प्राप्त हुआ है जो बहुत ही सुखद क्षण हैं ,  भगवान जो सब को सब कुछ देते हैं उन्हीं के बनाए हुए हम इंसान उनकी मर्यादा को बनाए रखने के लिए 500 वर्ष तक देश को एक इंसान से एक दूसरे इंसान तक लड़ता रहा अंत में न्याय प्राप्त हुआ है। जो सबको घर देते हैं अब वह भव्य मंदिर में मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम बैठेंगे और हिंदुओं की आस्था के प्रति मर्यादा पुरुषोत्तम श्री राम को 500 वर्षों तक इंसान के द्वारा अब न्याय प्राप्त हुआ है।भरत के लिए आदर्श भाई, हनुमान के लिए स्वामी, प्रजा के लिए नीति-कुशल व न्यायप्रिय राजा, सुग्रीव व केवट के परम मित्र और सेना को साथ लेकर चलने वाले व्यक्तित्व के रूप में भगवान राम को पहचाना जाता है।उनके इन्हीं गुणों के कारण उन्हें मर्यादा पुरुषोत्तम राम के नाम से पूजा जाता है ।भगवान राम
विषम परिस्थितियों में भी नीति सम्मत रहे। उन्होंने वेदों और मर्यादा का पालन करते हुए सुखी राज्य की स्थापना की। स्वयं की भावना व सुखों से समझौता कर न्याय और सत्य का साथ दिया। फिर चाहे राज्य त्यागने, बाली का वध करने, रावण का संहार करने या सीता को वन भेजने की बात ही क्यों न हो भगवान राम ने दया कर सभी को अपनी छत्रछाया में लिया। उनकी सेना में पशु, मानव व दानव सभी थे और उन्होंने सभी को आगे बढ़ने का मौका दिया।सुग्रीव को राज्य, हनुमान, जाम्बवंत व नल-नील को भी उन्होंने समय-समय पर नेतृत्व करने कासहनशीलता एवं धैर्य भगवान राम का एक और गुण है।कैकेयी की आज्ञा से वन में चौदह वर्ष बिताना, समुद्र पर सेतु बनाने के लिए तपस्या करना, सीता को त्यागने के बाद राजा होते हुए भी संन्यासी की भांति जीवन बिताना उनकी सहनशीलता की पराकाष्ठा है।त्याग और समर्पण भगवान राम के तीन भाई लक्ष्मण, भरत व शत्रुघ्न सौतेली मां के पुत्र थे, लेकिन उन्होंने सभी भाइयों के प्रति सगे भाई से बढ़ कर त्याग और समर्पण का भाव रखा और स्नेह दिया।यही वजह थी कि भगवान राम के वनवास के समय लक्ष्मण उनके साथ वन गए और राम की अनुपस्थिति में राजपाट मिलने के बावजूद भरत ने भगवान राम के मूल्यों को ध्यान में रखकर सिंहासन पर रामजी की चरण पादुका रख जनता को न्याय दिलाया
 भगवान राम न केवल कुशल प्रबंधक थे, बल्कि सभी को साथ लेकर चलने वाले थे। वे सभी को विकास का अवसर देते थे व उपलब्ध संसाधनों का बेहतर उपयोग करते थे।उनके इसी गुण की वजह से लंका जाने के लिए उन्होंने व उनकी सेना ने पत्थरों का सेतु बना लिया था सबसे महत्वपूर्ण बात कि वे राज्याभिषेक के समाचार से प्रसन्न नहीं होते और वनवास के दुःख का उन पर लेशमात्र भी प्रभाव नहीं है।‘सम्पतौ च विपत्तौ च महतां एक रूपता’के साक्षात् उदाहरण हैं। सारा पराक्रम स्वयं का है लेकिन वे इसका श्रेय अनुज लक्ष्मण को व वानरों और अपनी सेना को देते हैं।कुलीन होने के बाद भी शबरी, निषाद, केवट से अगाध प्रेम है. राम जाति वर्ग से परे हैं. नर हों या वानर, मानव हों या दानव सभी से उनका करीबी रिश्ता है।क्षमाशील इतने हैं कि राक्षसों को भी मुक्ति देने में तत्पर हैं। वे यह सिखाते हैं कि बिना छल-कपट के मानव अपना जीवन यापन ही नहीं कर सकता अपितु ईश्वरत्व को भी प्राप्त कर सकता है। ‘नरो नारायणो भवेत्’ को उन्होंने ऐसा प्रमाणित कर  दिया है कि आज उनका नाम ही ‘पतित पावन’ हो गया है।राम सिर्फ दो अक्षर का नाम नहीं, राम तो प्रत्येक प्राणी में रमा हुआ है, राम चेतना और सजीवता का प्रमाण है।अगर राम नहीं तो जीवन मरा है। राम भगवान विष्णु के सातवें अवतार माने जाते हैं। भारतीय समाज में मर्यादा, आदर्श, विनय, विवेक, लोकतांत्रिक मूल्यों और संयम का नाम राम है। असीम ताकत अहंकार को जन्म देती है। लेकिन अपार शक्ति के बावजूद राम संयमित हैं।
 वे सामाजिक हैं, लोकतांत्रिक हैं. वे मानवीय करुणा जानते हैं। वे मानते हैं- ‘पर हित सरिस धरम नहीं भाई..राम देश की एकता के प्रतीक हैं. महात्मा गांधी ने राम के जरिए  हिन्दुस्तान के सामने एक मर्यादित तस्वीर रखी. गांधी उस राम राज्य के हिमायती थे, जहां लोकहित सर्वोपरि हो. इसीलिए लोहिया भारत मां से मांगते हैं- ‘हे भारत माता हमें शिव का मस्तिष्क दो, कृष्ण का हृदय दो, राम का कर्म और वचन दो’.मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम समसामयिक है।भारतीय जनमानस के रोम-रोम में बसे श्रीराम की महिमा अपरंपार है.....एक राम राजा दशरथ का बेटा, एक राम घर-घर में बैठा,एक राम का सकल पसारा, एक राम सारे जग से न्यारा।राम का जीवन आम आदमी का जीवन है। आम आदमी की मुश्किल उनकी मुश्किल है.जब राम अयोध्या से चले तो साथ में सीता और लक्ष्मण थे। जब लौटे तो पूरी सेना के साथ। एक साम्राज्य को नष्ट कर और एक साम्राज्य का निर्माण करके. राम अगम हैं संसार के कण-कण में विराजते हैं।सगुण भी हैं निर्गुण भी।तभी कबीर कहते हैं “निर्गुण राम जपहुं रे भाई”आदिकवि ने उनके संबंध में लिखा है कि वे गाम्भीर्य में उदधि (सागर) के समान और धैर्य में हिमालय के समान हैं. राम के चरित्र में पग-पग पर मर्यादा, त्याग, प्रेम और लोकव्यवहार के दर्शन होते हैं।उनका पवित्र चरित्र लोकतंत्र का प्रहरी, उत्प्रेरक और निर्माता भी है.राम’ सिर्फ एक नाम नहीं हैं और न ही सिर्फ एक मानव. राम परम शक्ति हैं।
इसीलिए तो भगवान राम के आदर्शों का जनमानस पर इतना गहरा प्रभाव है और युगों-युगों तक रहेगा।
 जब अंतिम यात्रा के समय भी इसी ‘राम नाम सत्य है’ के घोष ने  जीवनयात्रा पूर्ण की होती है और कौन नहीं जानता आखिर बापू ने अंत समय में ‘हे राम’ किनके लिए पुकारा था।राम नाम उर मैं गहिओ जा कै सम नहीं कोई।।
जिह सिमरत संकट मिटै दरसु तुम्हारे होई।।जिनके सुंदर नाम को ह्रदय में बसा लेने मात्र से सारे काम पूर्ण हो जाते हैं. जिनके समान कोई दूजा नाम नहीं है। जिनके स्मरण मात्र से सारे संकट मिट जाते हैं। ऐसे प्रभु श्रीराम को हम कोटि-कोटि प्रणाम करते हैं। आज जिस तरह से भारत में है कुछ लोग राजनीति कर रहे हैं कह रहे हैं कि प्रधानमंत्री को राम मंदिर शिलान्यास हेतु नहीं जाना चाहिए।क्यों ना जाना चाहिए क्या वह ईश्वर को नहीं मानते हैं क्या हुआ इंसान नहीं भारत में जिस तरह से मुसलमान रहेता है उस तरह से पाकिस्तान में हिंदू नहीं रह सकता पाकिस्तान से हिंदू के किस तरह से समाचार आते हैं हिंदू के बारे में पाकिस्तान से उसेसे समझ लीजिए कि हिंदुस्तान में जो मुसलमान रहा है वह बहुत ही अच्छी तरीके से रह रहा है उसे पूरी आजादी प्राप्त है इसके परिणाम आप देख ही रहे हैं आतंकवाद के रूप में पूरे देश में फैला हुआ है। जिसका जीता जागता स्वरूप कश्मीर मैं देखा जा सकता है। आज पूरे भारत को बड़ा गर्व हो रहा है कि हमारे मर्यादा पुरुषोत्तम श्री राम का भव्य मंदिर अयोध्या में बनेगा यह क्षण के लिए कितना सब कुछ हुआ पूरा विश्व जानता है अब भोपाल और न्याय की घड़ी आ गई है जब हमारे मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम भव्य मंदिर में विराजमान होंगे और हम गर्व से कहेंगे कि हमारे राम जहां जन्मे थे वहां उनका घर बन अब जल्दी जाएगा, बहुत से लोग कहते हैं जब मैंने जाने का प्रयास किया प्रधानमंत्री को नहीं आना चाहिए मैं उनसे पूछना चाहता हूं जो लोग कहते हैं प्रधानमंत्री को नहीं आना चाहिए जब वह कार्यक्रम कराते हैं कोई भी हो रोजा इफ्तार से लेकर कोई भी बड़ा कार्यक्रम होता है उसमें बड़े-बड़े नेताओं को बुलाने का मैंने स्वयं देखा है  पार्टी के बड़े-बड़े नेता वहां पर कार्यक्रम में धार्मिक कार्यक्रम में आए हैं। सवाल उठता है जितनी आजादी भारत में आया अल्पसंख्यकों को मिल रही है जो अब फूल संख्या में हैं यहां जैसी आजादी हर धर्म को मिली हुई है पाकिस्तान बांग्लादेश सऊदी अरब अन्य देशों में वो आजादी हिंदू को नहीं प्राप्त है। आप लोग जितना हिंदुस्तान में सुरक्षित हैं वहां और पूर्ण रूप से आजाद हैं सब के साथ हैं मुझे नहीं लगता है विश्व में आप लोग इतने स्वतंत्रता के साथ किसी सजातीय मुस्लिम राष्ट्र में भी रहोगे वहां भी इतने स्वतंत्रता से नहीं रह पाओगे जितनी स्वतंत्रता भारतवर्ष में है।

No comments:

Post a Comment

Post Bottom Ad

Pages