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Thursday, July 9, 2020

गैंगस्टर विकास दुबे को उज्जैन में गिरफ्तार किया गया

गैंगस्टर विकास दुबे को उज्जैन में गिरफ्तार किया गया या उसने सोची-समझी रणनीति के तहत सरेंडर किया यह बड़ा सवाल है। महाकाल मंदिर में उसकी कुछ हरकतों ने इस पर संदेह खड़ा कर दिया है। पुलिस की सतर्कता के बावजूद पहले तो वह दिल्ली से सटे फरीदाबाद से फरार होकर उज्जैन पहुंच गया और इसके बाद नाटकीय ढंग से महाकाल मंदिर दर्शन करने पहुंच गया। सबसे सामने अंदर घुसा और दुकानदार से पूछने के बाद दर्शन के लिए 250 रुपए की पर्ची कटवाई। उसकी चाल ऐसी थी कि वहां लगे सीसीटीवी कैमरों में कैद होती गई।
कार्यालय संवाददाता:- अहम बात है कि पूछताछ के दौरान जब सुरक्षाकर्मियों लखन यादव और राहुल को उस पर शक हुआ तो वह बोला- मैं कानपुर वाला विकास दुबे हूं। इसके बाद पुलिस ने जैसे ही उसे पकड़ा तो सड़क पर जोर से चिल्लाने लगा कि मैं कानपुर वाला विकास दुबे हूं। पुलिस ले जाने लगी तो चिल्लाया कि देख लो मुझे पकड़ लिया है। सूत्रों के मुताबिक उसका मकसद ज्यादा से लोगों के सामने आना था ताकि वह ज्यादा से ज्यादा लोगों को पता चल जाए कि पुलिस ने जिसे पकड़ा है वह विकास है।

कैमरों के बीच घूम रहा था खुलेआम
विकास के पकड़े जाने के बाद कई तरह की चर्चाएं हैं। बताया जा रहा है कि मंदिर परिसर में 170 हाईटेक कैमरे लगे हैं। इसके अलावा वहां हर समय 60 सुरक्षाकर्मी तैनात रहते हैं। गुरुवार सुबह गिरफ्तारी के वक्त भी विभिन्न प्वाइंट पर पूरे परिसर में सुरक्षाकर्मी तैनात थे। विकास चेहरे पर मास्क लगाकर खुलेआम घूम रहा था। महाकाल मंदिर की सुरक्षा काफी कड़ी मानी जाती है। यहां आधुनिक कैमरे लगाने के साथ-साथ कंट्रोल रूम भी स्थापित किया गया था, जहां से मंदिर परिसर और आसपास के क्षेत्रों की निगरानी की जाती है। दुबे की गिरफ्तारी के वक्त भी कंट्रोल पर एक अधिकारी और कर्मचारी ड्यूटी दे रहे थे पर वह किसी की भी नजर में नहीं आया।

दर्शन करने दो तब गिरफ्तार कर लेना
कुख्यात अपराधी ने पुलिस से यह भी कहा कि मुझे महाकाल के दर्शन कर लेने दो उसके बाद गिरफ्तार कर लेना। उसके चेहरे पर किसी भी तरह की शिकन नहीं थी। इससे एक बात साफ थी कि विकास जानता था कि उसके ऊपर जिनका हाथ है वह उसे कुछ होने नहीं देंगे।

मौत के भय से मुक्ति मिलेगी
पुलिस ने विकास से पूछा कि वह महाकाल क्यों आया। इस पर उसका जवाब था कि महाकाल मौत के भय से मुक्ति देते हैं। इसी मुक्ति को पाने के लिए वह दर्शन करने आ गया था।

लखनऊ के नंबर की कार मिली
विकास की गिरफ्तारी के बाद उज्जैन पुलिस ने मंदिर और उसके बाहर छानबीन की तो उन्हें लखनऊ नम्बर की कार मिली। इसमें दो वकील आए थे। इस कार की हालत देखकर साफ समझा जा सकता था कि वह रातभर चली थी। गाड़ी में मौजूद दो वकीलों को भी पुलिस ने पूछताछ के लिए बैठा लिया। कार मनोज यादव नाम के वकील की बताई जा रही है।

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