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न्याय की आस में आठ माह से अनशन पर डटी बेवा

मुख्यमंत्री को ज्ञापन भेजकर लगाई न्याय की गुहार
खुली धूप में सिर्फ पन्नी के सहारे आठ माह से बच्चों के साथ बैठी है बेवा
 
बांदा, के0 एस0 दुबे । न्याय की आस में एक बेवा लगातार आठ माह से अनशन पर डटी है लेकिन प्रशासन है कि उसकी सुधि नहीं ले रहा है। अपनों की सताई बेवा को सिर्फ प्रशासन से ही आसरा है। इसी उम्मीद के सहारे वह अनशन कर रही है लेकिन अफसोस यह है कि अभी तक प्रशासन की ओर से कोई कार्रवाई नहीं की गई है। 
हमीरपुर जिले के रूरीपारा गांव की रहने वाली बेवा सुधा देवी द्वारा देवर हरभान सिंह से अपनी पुस्तैनी जमीन व मकान में हिस्सा देने के लिये मण्डल मुख्यालय में बीते आठ माह से अनशन कर रही है। मुख्यमंत्री को भेजे गये ज्ञापन में सुधा देवी बेवा जगभान सिंह ने बताया कि उसके देवर हरभान सिंह उर्फ छुन्ना सिंह सजायाफ्ता व्यक्ति है। पति के गुजर जाने के बाद पैत्रक आवासीय मकान व कृषि भूमि हिस्से की लगभग 25 बीघा जमीन जबरन छीनकर कब्जा कर लिया है। देनेा बच्चे सात साल से दर दर भटकने को मजबूर है। बीते 21 जुलाई 2019 को एसओ व
अशोक स्तंभ तले अनशन पर बैठी बेवा, साथ में उसका पुत्र
परगना अधिकारी द्वारा बच्चों को पाबंद कर दिया गया था। एसओ व परगना अधिकारी के रहमोकरम के कारण दबंग देवर पर कोई कार्यवाही नही की गई। जिससे क्षुब्ध होकर बीते 25 सितम्बर 2019 से मण्डल मुख्यालय में अनवरत क्रमिक अनशन में बच्चो सहित बैठी हुई है। बैनाम की जमीन की फसल 145 सीआरपीसी की कार्यवाही करने के बाद विवादित व्यक्ति गुमानी सिंह पुत्र गंभीर सिंह निवासी रूरीपारा को फसल सुपुर्द कर दी गई है। जबकि वह विपक्षी से मिले है। जिसकी सूचना 29 नवम्बर 2019 को एसओ ललपुरा को रजिस्ट्री के माध्यम से दी गई थी। इस समय भयंकर गर्मी पड़ रही है, खुली धूप में पन्नी के नीचे धरना प्राण घातक है, आठ माह में तमाम समाचार पत्रों व मैगजीन के माध्यम से विस्तृत रूप से समस्या की जानकारी शासन प्रशासन को अनवरत दी गई है। लेकिन अभी तक कोई भी परगना मौदहा का कर्मचारी व अधिकारी एवं एसओ थाना ललपुरा सुध लेने नही आये है। यह विपक्षी से मिलना जुलना व अच्छे सम्पर्क स्थापित किये है। इनसे न्याय मिने का विश्वास हट चुकाव है। उन्होने मांग की है कि मण्डल के किसी दूसरे सक्षम अधिकारी द्वारा जांच कराकर पैत्रक आवासीय मकान व गैर विवादित कृषि भूमि में 1/5 हिस्सा दिलाया जाये। जिससे अपना आठ माह का क्रमिक अनशन समाप्त करके पूर्वजों के मकान व जमीन पर सम्मानपूर्वक रह सके।

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