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खेल मैदान व सुविधा के अभाव में कुंठित हो रहीं प्रतिभाएं

फतेहपुर, शमशाद खान । ग्रामीण क्षेत्रों में खेलों को बढ़ावा देने के लिए शासन प्रशासन जो भी दावे करें लेकिन जमीनी हकीकत यही है कि गांवों में खेल के मैदान नहीं है। जो शासकीय जमीन थी उस पर भी कब्जे हो गये। गांव में प्राथमिक व माध्यमिक स्कूल हैं लेकिन उनके पास मैदान नहीं है। ऐसे में खेलों में ग्रामीण प्रतिभाओं का सामने निकलकर आना असंभव होकर रह गया है। वहीं दूसरी ओर खेल मैदानों की कमी के चलते ग्रामीण खिलाडियों को खलिहानों और खेतों के आसपास पड़ी खाली जगह पर अभ्यास करना पड़ता है।
अमौली विकास खण्ड के नसेनिया गांव में जागरुक युवाओं द्वारा खेल मैदान सुरक्षित करने को लेकर शासन प्रशासन का ध्यान आकृष्ट किया जा रहा है। क्षेत्र के गावों में खेल मैदान का स्थान तो निर्धारित है किन्तु वह केवल कागजों में सीमित रह गया है। यहां सेना भर्ती करने वाले व खिलाडियों द्वारा खेल मैदान की मांग लम्बे समय से की जा रही है। ग्रामीण कहते है कि यदि खेल
बंजर पड़े खेल मैदान का दृश्य। 
के मैदान ही नहीं होंगे तो खेल कहां होंगे। यही कारण है कि गांवों में खेल प्रतिभाए दम तोड़ रही है। जिसके चलते समय समय पर होने वाली सरकारी और निजी खेल प्रतियोगिताओं में ग्रामीण क्षेत्रों से आने वाली टीमों की सहभागिता कम नजर आती है। ग्रामीण क्षेत्रों में खेल के प्रति युवाओं, छात्रों का उत्साह लगभग खत्म ही हो गया है। अमौली के नसेनिया मे लगभग तीन बीघे आवंटित खेल मैदान भूमि है। जिसमे पौधे लगे है और कब्जा किया जा रहा है। जिस पर ग्रामीणों में नाराजगी भी है। सेना के जवान शिव प्रकाश शुक्ल ब्रम्हाचारी ने कहा कि खेल के लिए मैदान का होना बहुत जरूरी है। खेलों पर ध्यान ही नहीं दिए जाते। छोटे मैदान बनाकर कबड्डी, वॉलीवाल जैसे खेलों के लिए मैदान तैयार कर खिलाडियों को प्रोत्साहित किया जा सकता है। लेकिन इस प्रकार की सोच का अभाव है। जो मैदान का स्थान है उसमे भी कब्जे हो गये है। युवा समाजसेवी शुभम शुक्ला ने कहा कि एक ओर खेलों को लेकर योजनाएं बनाई जाती है, वहीं दूसरी ओर जमीनी स्तर पर संसाधनों की कमी बनी रहती है। ग्रामीण क्षेत्रों में यदि युवाओं को अभ्यास के लिए सहूलियतें मिलेंगी। तभी बेहतर खेल प्रतिभाएं उभरकर सामने आयेगी। क्षेत्र के स्कूलों में भी खेल मैदानों की कमी महसूस की जाती है। प्रतिभाओं को अवसर देने के लिए संसाधनों की उपलब्धता जरूरी है। इस पर शासन को गंभीरता से ध्यान देना होगा। उपायुक्त पुतान सिंह मनरेगा ने बताया कि खेल के मैदान की निर्धारित जगह में पौधरोपण नहीं किया जा सकता है। केवल मैदान की चहारदीवारी पर चारों तरफ पौधे लगाए जा सकते है।

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