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राजनीति पर राजनीत आज ओछी राजनीत......................... देवेश प्रताप सिंह राठौर ( वरिष्ठ पत्रकार)...........

 हम सब जानते हैं कि भारत एक प्रजातांत्रिक देश है। आज भारत में दूसरे देशों से सबसे ज्यादा युवा बसते हैं। युवा वर्ग वह वर्ग हो है जिसमें 14 वर्ष से लेकर 40 वर्ष तक के लोग शामिल होते हैं।आज भारत देश में इस आयु के लोग सबसे बड़ी संख्या में मौजूद है। यह एक ऐसा वर्ग है जो शारीरिक एवं मानसिक रूप से सबसे ज्यादा ताकतवर है। जो देश और अपने परिवार के विकास के लिए हर संभव प्रयत्न करते हैं। आज भारत देश में 75% युवा पढ़ना लिखना जानता है। परंतु उन्हें अच्छे कार्यों में राजनीति के कारण उन्हें अच्छे पद नहीं मिल सके क्योंकि भारत देश में राजनीति के नाम से राजनीति पर राजनीति होती है। कोरोना वायरस के कारण मजदूर देश भर से सड़क पर अपने घर निकलने के लिए साधन ना होने के कारण पैदल ही चल दिए इसमें भी किसी न किसी की राजनीत है क्या कोई 2 हजार किलोमीटर पैदल चल लगे सामान के साथ
इसमें भी राजनीत रही है। कांग्रेश के द्वारा एक हजार बसों कीी लिस्ट कांग्रेस उत्तर प्रदेश सरकार को दी गई उसमें अधिकतर दो पहिया वाहन ऑटो और टैक्सी आद है।जो  नंबरों की गाड़ी प्रदान की गई उत्तर प्रदेश सरकार को वहां भी काग्रेस ने धोखा दिया आप समझ सकत हैं आज के हालातों के बावजूद कांग्रेश अपनी हरकत सेेे बाज नहींं आ रही  के है।आजआप समझ सकते हैं कितनााा झूठ फरेब चल रहा आज इतने बड़े महामारी के संकट में पूरा विश्व के साथ है वहीं भारत देश भी काफी परेशान है वहां पर राजनीतििक दल किसी की चिंता नाा करते हुए सिर्फ अपनी उजड़ी हुई जमीन को इस माहौल में अपनी रोटियां सेकना चाहते हैं। गरीबों क हित की बात  वाले विपक्ष राजनीति कर रहा है।    बड़ी खबर और प्राप्त हुई है डब्ल्यूएचओ द्वारा विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा कोरोना वायरस कि चीन जांच हेतु आदेश दे दिया है। भारत अन्य देशों की तुलना में अच्छी खासी प्रगति की है। इसमें सबसे बड़ा योगदान शिक्षा का है। आज भारत का हर युवा अच्छी से अच्छी शिक्षा पा रहा है।उन्हें पर्याप्त रोजगार के अवसर मिल रहे हैं परंतु दुख की बात यह है कि आज का युवा भले ही कितना ही पढ़ लिख गया हो परंतु अपने संस्कार व देश और परिवार के प्रति जिम्मेदारियों को दिन-प्रतिदिन भूलता ही जा रहा है।
आज भारत का युवा वर्ग ऊंचाईयों को छूना चाहता है परंतु वह यह भूलता जा रहा है कि उन ऊंचाईयों को छूने के लिए वह स्वयं अपनी जड़ें खुद काट रहा है।
भारत का युवा वर्ग तैयार है एक नई युवा क्रांति के लिए। लेकिन अफसोस की बात है कि कुछ इस युवा वर्ग को रोक रही हैं। भारत का युवा वर्ग भारत में अपना योगदान देने की बजाय विदेशों में जाकर बस जाता है।
भारत की राजनीति में आज वृद्ध लोगों का ही बोलबाला है और चंद गिने-चुने युवा ही राजनीति में है। इसका एक कारण यह है कि भारत में राजनीति का माहौल दिन-ब-दिन बिगड़ रहा है और सच्चे राजनीतिक लोगों की जगह सत्तालोलुप और धन के लालची लोगो ने ले ली है।
राजनीति में देश प्रेम की भावना की जगह परिवारवाद, जातिवाद और संप्रदाय ने ले ली है। आए दिन जिस तरह से नेताओं के भ्रष्टाचार के किस्से बाहर आ रहे है देश के युवा वर्ग में राजनीति के प्रति उदासीनता बढ़ती जा रही है।
अब भारत की राजनीति में सुभाषचन्द्र बोस, शहीद भगतसिंह, चंद्रशेखर आजाद, लोकमान्य तिलक जैसे युवा नेता आज नहीं है। जो अपने होश और जोश से युवा वर्ग के मन में एक नई क्रांति का संचार कर सके। लेकिन अफसोस आजादी के बाद नसीब में है यह बूढ़े नेता जो खुद की हिफाजत ठीक से नहीं कर सकते तो युवा को क्या देशभक्ति या क्रांति की बातें सिखाएंगे?यही वजह है कि भारत के युवा अब इस देश को अपना न समझकर दूसरे देशो में अपना आशियाना खोज रहे हैं। वे यहां की राजनीतिक सत्ता और फैले हुए भ्रष्टाचार से दूर होना चाहते हैं। इसलिए वे कोई भी ठोस कदम उठाने से पहले कई-कई बार सोचते हैं। यहां तक कि भारत में वोट डालने वाले युवा को अपने चुने हुए उम्मीदवार पर तक भरोसा नहीं होता हैl
आज के युवाओं को सिर्फ और सिर्फ टारगेट ओरियेंटेड बना दिया गया है मतलब यह है किआजकल के माता-पिता स्वंय नहीं चाहते कि उनका पुत्र या पुत्री अपने कार्यो के अलावा देश के सामाजिक कार्यो में भी अपना योगदान दें क्योंकि आजकल का माहौल ही कुछ इस तरह का हो गया है कि सब केवल अपना भविष्य बनाने में लगे हुए हैं।
यहां तक कि आजकल के युवाओं को उनके परिवार के प्रति जिम्मेदारी का एहसास तक नहीं होता इसलिए हमें इसके लिए कई ठोस कदम उठाने होंगे।आज भारत का हर नागरिक भली-भांति अपना अच्छा बुरा समझता है। युवाओं को संप्रदायवाद तथा राजनीति से परे अपनी सोच का दायरा बढ़ाना होगा। युवाओं को इस मामले में एकदम सोच समझकर आगे बढ़ना होगा। और ऐसी किसी भी भावना में न बहकर सोच समझकर निर्णय लेना होगा।
भारत का युवा वर्ग वाकई में समझदार है जो सच में इस मामले में एक है और ज्यादातर युवावर्ग राष्ट्रधर्म को सर्वोपरि मान रहा है। यह वाकई में एक अच्छी और सकारात्मक बात है जो भारत जैसे देश के लिए बड़ी बात है।
और भी चीजें है जैसे बेरोजगारी, सरकारी नौकरियों में जगह पाने की लिए रिश्वत जैसी बातें भी कारण है युवा को देश से दूर करने के लिए। इसीलिए हमें समय-समय पर अपने युवाओं का मार्गदर्शन करना होगा। जिससे कि वे सही और गलत में पहचान कर सकें तथा अपने देश को आगे तथा तरक्की के मार्ग पर ले जाने में सहयोग प्रदान कर सकें। आज भारत देश में युवा लोगों को राजनीति में अवसर प्राप्त होना चाहिए सिर्फ वही लोग आप आते हैं जिन लोगों के पूर्व में राजनीत से ताल्लुक रखने वाले भी आ पातेे हैं। जबकि नवयुवक राजनीतिि में अच्छे लोगों का आना हो तो अच्छी सोच के साथ देश अच्छे लोगोंं के क साथ विकास के पथ पर आगे बढ़ेगा। भारत भारत देश म ऐसी प्रथा चली आई है कि जो राजनीति के पूर्व में रहे लोग उन्हीं के लड़के विरासत के पााए हुए लोग ही राजनीति में आ पाते हैं। जब तक अच्छी सोच के साथ अच्छेे लोगों राजनीत में चयन जनतााा नहीं करेगी तब तक विकास की गति अच्छी नहीं हो सकती है।

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