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लाकडाउन व लू के थपेड़ों के चलते मार्ग रहते सूने

अंगौछा व दुपट्टे से मुंह ढककर ही बाहर आ रहे लोग
कोविड-19 के चलते थमी है जीवन की रफ्तार
   
फतेहपुर, शमशाद खान । कोविड-19 के चलते जीवन की रफ्तार थम सी गयी है। लगभग दो माह से पूरे देश में लाकडाउन चल रहा है। नये नियमांे व शर्तों के साथ ही लोगों को बाहर निकलने की इजाजत दी गयी है। उधर सूर्य देवता ने भी अब आग उगलना शुरू कर दिया है। दिन भर लू के थपेड़े चलने से मार्ग सूने ही रहते हैं। लाकडाउन व गर्मी एक साथ होने से सोने पर सुहागा वाली कहावत चरितार्थ हो रही है। जरूरी कार्य से बाहर आने वाले महिला एवं पुरूष अपने चेहरों को पूरी तरह ढक कर ही निकल रहे हैं। 
गर्मी से बचने के लिए मुंह ढके महिलाएं।
बताते चलंे कि गत वर्ष गर्मी के दिनों में दोपहर के समय मार्ग अवश्य सूने हो जाते थे लेकिन जैसे-जैसे शाम होती थी बाजार की रौनक देखते ही बनती थी। लेकिन इस वर्ष इस रौनक पर ग्रहण लग गया है। क्योंकि कोरोना वायरस का प्रकोप पूरे विश्व के ऊपर मंडरा रहा है। कोरोना वायरस के संक्रमण को फैलने से रोकने के लिए केन्द्र सरकार ने दो माह पूर्व पूरे देश में लाकडाउन लगा दिया था। यह लाकडाउन धीरे-धीरे बढ़ता ही जा रहा है। लाकडाउन के चलते पूरा बाजार बंद हैं और लोगों के सड़क पर घूमने पर पाबंदी लगा रखी गयी है। लोगों से अपील की जा रही है कि घर पर रहकर सुरक्षित रहें। लोग इस आदेश पर अमल भी कर रहे हैं। अप्रैल व मई माह में धूप भी अपने शबाब पर पहुंच जाती थी। लेकिन इस बार ऐसा नहीं हुआ और अप्रैल व आधा मई मौसम ठीक ठाक रहा। पन्द्रह मई होते ही सूर्य देवता ने अपने तेवर बदले और आग उगलना शुरू कर दिया। मंगलवार को सूर्य देवता आग उगलते नजर आये। यूं कहा जाये कि लाकडाउन व गर्मी के चलते बाजारों में पूरी तरह से सन्नाटा पसरा हुआ है। घरेलू वस्तुओं व मेडिकल के लिए निकलने वाले लोग ही सड़कों पर नजर आते हैं जो अपने आपको अंगौछा व दुपट्टे से ढके हुए रहते हैं। जिससे इस भीषण गर्मी से बचा जा सके। क्योंकि वर्तमान समय में लाकडाउन के चलते मेडिकल सेवाएं भी पूरी तरह से प्रभावित हो गयी हैं। ऐसे में कोई भी व्यक्ति किसी तरह का जोखिम नहीं लेना चाहता। इतना ही नहीं लगातार चिकित्सकों द्वारा भी लोगों को सलाह दी जा रही है कि सर्तकता बरतें। जिससे वह बीमार कम पड़ें। 

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