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बीजेपी के आंतरिक सर्वे में सिंधिया समर्थकों की हार कहीं राजनीतिक षडयंत्र तो नहीं!

भोपाल, अंकित जैन । मध्यप्रदेश में 24 सीटों पर होने वाले उपचुनाव के पहले बीजेपी के आंतरिक सर्वे ने सिंधिया समर्थक विधायकों को चिंता बढ़ा दी है। बीजेपी का दावा है कि यदि उपचुनाव में सिंधिया समर्थक पूर्व 22 विधायकों को टिकट दिए गए तो 19 सीटों पर हार का सामना करना पड़ सकता है। इसके बाद से ज्योतिरादित्य सिंधिया और बीजेपी के बीच खींचतान और भी अधिक बढ़ गई है। बताया जाता है कि बीजेपी के गोपनीय सर्वे में हार की बात सामने आने के बाद सिंधिया की तरफ से यह कहा गया है कि उनके सभी 22 समर्थकों को मंत्री बना दिया जाए।
यदि वे चुनाव हार भी जाते हैं तो कोई खास फ़र्क नहीं पड़ेगा।  वहीं बीजेपी का तर्क है कि यदि मंत्री रहते वह चुनाव हारे तो पार्टी की साख और उनकी छवि खराब होगी। इसलिए टिकट देने से पहले विचार कर लेना चाहिए। ज्योतिरादित्य सिंधिया इस पक्ष में बिल्कुल नहीं है कि उनके किसी भी समर्थक का टिकट काटा जाए। ज्योतिरादित्य सिंधिया ने जिन शब्दों के साथ बीजेपी ज्वाइन की थी उसमें यह शर्त भी शामिल थी कि उनके सभी 22 समर्थकों को उपचुनाव में फिर से टिकट दिया जाए। अब बीजेपी की आंतरिक सर्वे रिपोर्ट पर भी सवाल उठने लगे हैं। बीजेपी की सर्वे रिपोर्ट को सिंधिया समर्थकों ने एक राजनीतिक षड्यंत्र करार दिया है। क्योंकि कांग्रेस का दामन छोड़कर बीजेपी में शामिल हुए सिंधिया समर्थकों का मत है कि उन्होंने शिवराज सरकार के 15 साल के तिलिस्म को तोड़ कर जीत हासिल की है । इसके पीछे उनकी जमीनी पकड़ और निजी लोकप्रियता हैं। 2018 के विधानसभा चुनाव में मिली जीत के बाद भी बीजेपी अब उन्हें हारा हुआ प्रत्याशी बता रही है । जिसे राजनीतिक षड्यंत्र के रूप में देखा जा रहा है। दूसरी तरफ सिंधिया समर्थक ज्योति राजे सिंधिया को केंद्र में मंत्री नहीं बनाए जाने से भी नाराज बताए जा रहे हैं।

इन कांग्रेसियों ने दिया था इस्तीफा

 इस्तीफा देने वाले विधायकों में रघुराज कंसाना, कमलेश जाटव, भांडेर से रक्षा संत्राव, अशोक नगर से जजपाल सिंह जज्जी, शिवपुरी से सुरेश धाकड़, ओपी एस भदौरिया, रणवीर जाटव, गिरराज दंडोतिया, जसवंत जाटव, हरदीप डंग, मुन्ना लाल गोयल, ब्रिजेंद्र यादव, दत्तिगांव से राजवर्धन सिंह, एंदल सिंह कंसाना, मनोज चौधरी, बिसाहू लाल सिंह के नाम शामिल हैं। इनके अलावा कमलनाथ सरकार छह मंत्रियों ने भी इस्तीफा दिया था। जिसमें तुलसीराम सिलावट, गोविंद सिंह राजपूत ,प्रद्युम्न सिंह तोमर ,महेंद्र सिंह सिसोदिया, इमरती देवी और प्रभु राम चौधरी भी शामिल है।

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