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कोरोना काल में प्रतिबंधित राज गुटखा का उत्पादन बेखौफ जारी

एक नहीं कई नामों से बनाया जा रहा तंबाखू मिश्रित गुटखा
कलमकार के विरुद्ध लूट की फर्जी तहरीर भी दे चुका मैनेजर
नाम किसी का, काम किसी का, सहारा जिम्मेदारों का

उरई (जालौन), अजय मिश्रा । जिला मुख्यालय के मोहल्ला तुलसीनगर में लंबे समय से प्रशासन के जिम्मेदारों की आंखों में धूल झोंककर प्रतिबंधित तम्बाखू मिश्रित राज गुटखा का उत्पादन कई नामों से अनेकों कानूनों को धता बताकर लाॅकडाउन काल में भी उत्पादन ही नहीं उसकी बिक्री का कारोबार चल रहा है। ऐसे अवैध कारोबार पर जब एक मीडिया कर्मी ने हाथ डालने का दुस्साहस दिखाया था तो उसके विरुद्ध गुटखा कंपनी के कथित मुनीम द्वारा 30 हजार रुपये लूटने की फर्जी तहरीर कोतवाली पुलिस को दी गयी थी। हालांकि यह मामला बाद में सुलट गया था। हैरानी की बात तो यह है कि प्रतिबंधित गुटखे का उत्पादन करने से लेकर उसकी बिक्री करने वालों के हाथ शायद कानून के हाथों से भी ज्यादा लंबे होते नजर आ रहे हैं।
वह मकान जहां बनाया जाता प्रतिबंधित गुटखा ।
गौरतलब हो कि सदर कोतवाली क्षेत्र के मोहल्ला तुलसीनगर में तंबाखू मिश्रित गुटखा का उत्पादन किया जाता है जो कि प्रदेश सरकार द्वारा प्रतिबंधित गुटखे की श्रेणी में आता है। ऐसी स्थिति मेें जब तंबाखू मिश्रित राज गुटखा का उत्पादन कानूनी दायरे में किसी भी कीमत पर नहीं हो सकता है फिर उसका उत्पादन व बिक्री आम दिनों की तरह कोरोना जैसे संकटकाल में बेखौफ होकर चल रहा है। हैरानी की बात तो यह है कि लाॅकडाउन के पूर्व जहां पांच हजार रुपय की बोरी मिलती है उसकी कीमत आज नौ हजार रुपये वसूली जा रही है। बताया जाता है कि राज गुटखा कंपनी का मुख्य कर्ताधर्ता तो पर्दे के पीछे रहता है लेकिन उसका पूरा कारोबार अपनी दम पर रघ्घू नामक व्यक्ति संभालता है। जो देखने में दुबला पतला जरूर दिखता है लेकिन उसके पास सेटिंग का ऐसा हाईटेक फार्मूला है जिससे उसके ठिकानों पर जिला प्रशासन के जिम्मेदार अधिकारी तक हाथ डालने में संकोच करते देखे जा रहे है। बताया तो यह भी जाता है कि उक्त गुटखा कंपनी ने दिव्या कैमिकल के नाम से अपना रजिस्ट्रेशन भी जीएसी दफ्तर में करवा रखा है। लेकिन हकीकत में यह जीएसटी चोरी का जनपद में सबसे बड़ा सरगना है। मोहल्ला तुलसीनगर में उसके पांच ठिकाने बताये जाते हैं जहां पर लगे बड़े-बड़े गेटों पर बाहर से तालाबंदी रहती है लेकिन उसके अंदर पूरा अवैध कारोबार चलता है। पिछले दिनों लाॅकडाउन काल में राठ रोड ओवरब्रिज पर राज गुटखा की एक गाड़ी को बीच रास्ते में जब एक मीडिया कर्मी में रोकने का साहस दिखाया तो उक्त मीडिया कर्मी के विरुद्ध गुटखा कंपनी के मैनेजर रघ्घू द्वारा 30 हजार रुपये लूटने की फर्जी तहरीर सदर कोतवाली पुलिस को दी गयी थी। हालांकि बाद में मामले को सुलटा लिया गया था। लेकिन इससे एक बात तो साफ है कि जहां कोतवाली पुलिस लूट जैसे मामलों की तहरीर मिलने के बाद स्थलीय जांच कर साक्ष्यों को संकलित करती है तब कहीं जाकर वह मामले की एफआईआर दर्ज करती है। लेकिन यहां एक गुटखा कंपनी के मैनेजर द्वारा लाॅकडाउन काल में 30 हजार रुपये लूटने की फर्जी तहरीर देकर पुलिस को गुमराह करने का काम किया गया था लिहाजा कोतवाली पुलिस को गुटखा कंपनी के मैनेजर के विरुद्ध भी संबंधित धाराओं में एफआईआर दर्ज करनी चाहिये। ताकि भविष्य में ऐसे गैर कानूनी कार्यांे में लिप्त लोगों के मंसूबों पर लगाम कसी जा सके।

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