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लाक डाउन में कोटेदार कर रहे लूट खसोट

भूखे सोने को मजबूर हैं ग्रामीण, अधिकारियों से आस 
राशन कार्ड बनवाने के नाम पर तीन सौ रुपये वसूल रहे हैं कोटेदार
तीन सौ रुपये देने के बाद भी कई परिवारों को नहीं मिल रहा राशन

बांदा, के0 एस0 दुबे । लाक डाउन में गरीबों को सुविधा देने के सरकारी आदेश चित्रकूटधाम मंडल में हवहवाई साबित हो रहे हैं। गरीबों को राशन नहीं मिल रहा। कोटेदार राशन कार्ड बनवाने के लिए तीन-तीन सौ रुपये अवैध वसूली कर रहे हैं। लोगों के पैसे देने के बाद भी राशन नहीं दिया जा रहा। राशन कार्ड सूची में त्रुटियां करके गरीबों को राशन देने से मना किया जा रहा है। लोग जब शिकायत लेकर जिम्मेदारों के पास पहुंचते हैं, तो उनके द्वारा गरीबों को बेजा तरीके से दुत्कार कर भगाया जा रहा है। 
एक तरफ देश मे लाक डाउन और दूसरी तरफ गरीबों को राशन भी नहीं मिल रहा। दोहरी मार झेल रहे गरीबों की समस्याओं को लेकर सपा के राज्य सभा सांसद विशम्भर निषाद ने कई गांवों का भ्रमण किया। गरीबों को खाद्यान, और मास्क बांटने के साथ-साथ हालात का जायजा लिया। लोगों के द्वारा बताई गई समस्याओं को लेकर सांसद ने कमिश्नर को पत्र दिया और
सदर तहसील में शिकायत करने आए कनवारा गांव के ग्रामीण 
गरीबों को उनकी समस्या से निजात दिलाने की मांग की है। जनपद के महुआ गांव के लोगों का कहना है कि यहां कोटेदार राशन कार्ड बनवाने के नाम पर तीन तीन सौ रुपये ले रहे हैं। कई लोगों से पैसे लेने के बाद उनका कार्ड तो बन गया लेकिन राशन लेने जाते हैं तो कोई न कोई त्रुटि निकल कर राशन देने से मना कर दिया जाता हैं। कई राशन कार्ड धरकों के नाम काट दिए गए हैं, जिसके चलते गरीब भूखे मरने को मजबूर हैं। जिनके पास पैसे नहीं हैं, उनके राशन कार्ड नहीं बन रहे। अधिकारी कुछ भी सुनने को तैयार नहीं हैं। अगर कोई शिकायत करने जाता है तो अधकारी उस गरीब के साथ अभद्र व्यवहार कर रहे हैं। महुआ गांव के विकलांग रामनरेश ने बताया कि जब कोटेदार ने उसे राशन कार्ड से नाम कटने की बात कह कर राशन देने से मना कर दिया तो उसने अतर्रा एसडीएम की गाड़ी सड़क पर रुकवाकर अपनी फरियाद सुनाई। तब एसडीएम ने कहा कि हम क्या करें, राशन नहीं मिल रहा है। इसके अलावा जो एसडीएम ने कहा वह लिखने के काबिल नहीं है। अगर जिम्मेदार अधिकारी गरीबों, दिव्यांगों के साथ ऐसे माहौल में ये बर्ताव करेंगे तो फिर इन गरीबों की क्या हालत होगी। यह कहने की जरूरत नहीं है। इन सारी समस्याओं को देखने के बाद ये कहना गलत न होगा कि चित्रकूटधाम मंडल में सरकरीं दावे हवहवाई साबित हो रहे हैं।

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