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घर में नहीं पढ़ी जा सकती अलविदा व ईद की नमाज: कारी फरीद

घरों में चार रकात नफिल नमाज करें अदा 
कोरोना बीमारी से छुटकारा के लिए अल्लाह से करें दुआ
 
फतेहपुर, शमशाद खान । आगामी अलविदा जुमा व ईद उल फितर की नमाज को लेकर काजी शहर मौलाना कारी फरीद उद्दीन कादरी ने कहा कि कोरोना वाइरस से बचने के लिए पूरे मुल्क में लाकडाउन चल रहा है। मस्जिदों में चंद लोगों को ही नमाज बा जमाअत पढने की इजाजत मिली है। आठ जुमा गुजर चुके हैं। अक्सर मुसलमान अपने अपने घरो मे जुमा के दिन जुमा के बजाएं नमाजे जोहर अदा कर रहे हैं। अल्लाह तआला अपने महबूब हजरत मोहम्मद सल्लल्लाहो अलैहे वसलम के सदके इस जानलेवा बीमारी से हमसब को महफूज रखें और फिर पहले की तरह हमारी मस्जिदों को अबाद फरमाए। उन्होने कहा कि तमाम लोगों ने आने वाले जुमा अलविदा और नमाज ईद के बारे में दरयाफ्त किया कि नमाजे जुमा अलविदा और नमाज ईद-उल-फितर घरों में पढ़ सकते हैं या नहीं। इस बाबत उन्होने बताया कि शरई हुक्म ये है कि जो शरायत नमाजे जुमा के लिए है वहीं शर्तें नमाजे ईद के लिए भी हैं। नमाजे जुमा में खुतबा फर्ज है और ईद में फर्ज नहीं है। जिस तरह नमाजे जुमा घर में नहीं पढ सकते
काजी-ए-शहर कारी फरीद उद्दीन कादरी।
उसी तरह नमाजे ईद उल फितर भी घरो में पढने की इजाजत नहीं है। बल्कि जितने लोगों को मस्जिदों में नमाज ब जमाअत पढने की इजाजत है उतने लोग ही मस्जिद व ईदगाह में नमाज अदा करें। बाकी सभी हजरात नमाजे ईद हो जाने के बाद चार रकात नफिल नमाज चाशत अपने अपने घर में अदा करें। चाशत के वक्त में 4 रकात नमाज पढने की हदीसों में बड़ी फजीलत आई है। काजी शहर ने कहा कि लाँकडाउन बढ़ने की वजह से अलविदा व ईद उल फितर की नमाज मस्जिदों में होना मुश्किल है। दफा 144 व लाँकडाउन के चलते अगर हम मस्जिदों व ईदगाह में जिसमानी हाजरी से महरुम है मगर अल्लाह तआला हम सभी की नियतो से बाखबर है और अजरो सवाब का दारोमदार नियत पर है। जब हमारी नियत हाजरी की है तो अल्लाह तआला जरूर हमें अजर अता फरमाएगा। लिहाजा हम सभी मिलकर अल्लाह तआला की बारगाह में दुआ करे कि इस बीमारी से जल्द छुटकारा मिले।

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