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श्रम कानूनों में किये गये बदलावों को किया जाए निरस्त

राष्ट्रीय स्वराज पैंथर ने प्रधानमंत्री व राष्ट्रपति को ज्ञापन भेजकर उठाई मांग  

बांदा, के0 एस0 दुबे । विगत दिनेा सरकार द्वारा लाकडाउन की आड़ में श्रमिक कानूनो को तीन वर्षो और एक हजार दिनो के लिये निष्क्रिय करके मालिकों को श्रमिक कानूनों का निर्माता बना दिया है। इससे स्पष्ट है कि सरकार सिर्फ मालिकों को संरक्षण दे रही है। शुक्रवार को राष्ट्रीय स्वराज पैंथर ने प्रधानमंत्री को राष्ट्रपति को ज्ञापन भेजकर श्रम कानूनों में किये गये बदलावों को निरस्त किये जाने की मांग की है।
जिलाधिकारी को ज्ञापन देने आए स्वराज पैंथर पदाधिकारी और कार्यकर्ता
प्रधानमंत्री को राष्ट्रपति को भेजे गये ज्ञापन में राष्ट्रीय स्वराज पैंथर के अध्यक्ष मुन्नालाल दिनकर ने बताया कि श्रमिक कानूनों में परिवर्तन की छूट देने से कई राज्यों ने मजदूरों के काम करने के समय में आठ घंटे की जगह 12 घंटे, ओवरटाइम बढाकर प्रति सप्ताह 72 घंटा करने और अपनी सुविधानुसार मालिकों द्वारा काम के समय में परिवर्तन करने, वेतन निर्धारित करने तथा श्रमिक न्यायालय समाप्त करने की घोषणा कर दी है। इससे स्पष्ट हो रहा है कि पंूजीपतियों की हमदर्द सरकार देश के मजदूरों के दर्द को कम करने की बजाय और बढाने का कार्य कर रही है। अब तीन मजदूरों का काम केवल दो मजदूरों से करवाया जायेगा। मांग की है कि श्रमिक कानूनों में किये गये बदलावों को तत्काल निरस्त करके पूर्व में लागू श्रमिक कानूनों को बहाल किया जाये। लाकडाउन में फंसे सभी श्रमिकों को बिना किसी किराये के सकुशल उनके घरों तक पहुंचाया जाये। लाकडाउन के कारण बेरोजगार हुये सभी कामगारों को पांच हजार रूपये प्रतिमाह बेरोजगारी भत्ता दिया जाये। लाकडाउन में किसी भी दुर्घटना के चलते अपनी जान गंवाने वाले मृत मजदूरों के परिजनों को दस लाख रूपये आर्थिक मुआवजा दिया जाये। असंगठित पंजीकृत मजदूरों और किसानों को पांच हजार रूपये प्रति माह गुजारा भत्ता दिया जाये। सरकारी संस्थाओं के निजीकरण पर रोंक लगाई जाये। इस दौरान कमलेश कुमार चैधरी, राजबहादुर सिंह भारतीय, राजबहादुर अनुरागी, भारतबाबू, बीरभवन कोटार्य, रामबाबू वर्मा, राजकुमार वर्मा आदि लोग उपस्थित रहे।

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