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छत्तीसगढ़ जाने के लिए घण्टों बाकरगंज चैराहे पर बैठे रहे मजदूर

भूखे-प्यासे मजदूरों को लखनऊ बाईपास पर छोड़ भागी रोडवेज बस
शाम तक मजदूरों की जिम्मेदार अधिकारियों ने नहीं ली सुधि 
  
फतेहपुर, शमशाद खान । कोरोना वायरस के संक्रमण को फैलने से रोकने के लिए पूरे देश मंे लाकडाउन चल रहा है। लाकडाउन के कारण गरीब व मध्यम वर्ग के लोगों के बीच आर्थिक संकट उत्पन्न हो गया है। लाकडाउन में अपने गन्तव्य को जाने के लिए प्रवासी मजदूरों में सबसे अधिक बेचैनी है। बुधवार को छत्तीसगढ़ प्रान्त के रहने वाले मजदूर कानपुर से अपने गन्तव्य के लिए चलें। लेकिन रोडवेज बस चालक उन्हें लखनऊ बाईपास पर छोड़कर भाग निकला। भूखे-प्यासे मजदूर बेचारे पैदल अपने बच्चों व महिलाओं के साथ बाकरगंज चैराहे पहुंच गये। यहां पर भी घण्टों उनकी सुधि लेने के लिए कोई अधिकारी नहंी पहुंचा। 
बाकरगंज चौराहे के किनारे बैठे कानपुर से आये मजदूर।
बाकरगंज चैराहे लखनऊ रोड पर दोपहर लगभग साढ़े तीन बजे बड़ी संख्या में मजदूर, महिलाएं व बच्चे बैठे हुए दिखाई दिये। इस पर स्थानीय संवाददाता ने जब मजदूरों से बात की गयी मजदूरों ने बताया कि वह सभी छत्तीसगढ़ के रहने वाले हैं। कानपुर में ठेकेदार के यहां मजदूरी करते थे। कोरोना वायरस के दौरान पूरे देश में लाकडाउन हो गया। जिसके चलते उनका काम धंधा भी बंद हो गया। ठेकेदार ने उन्हें पैसे देने भी बंद कर दिये। जिस पर उनके सामने आर्थिक संकट उत्पन्न हो गया और वह सभी छत्तीसगढ़ जाने के लिए कानपुर से चल दिये। रोडवेज बस में सवार होकर वह फतेहपुर पहुंचे और लखनऊ बाईपास पर बस चालक उन्हें उतारकर चला गया। बताया कि धूप में बच्चों व महिलाओं के साथ तपते हुए वह पैदल चलकर बाकरगंज चैराहे पहुंचे हैं। यहां बैठकर आराम कर रहे हैं। उन्होने बताया कि लगभग आधे घण्टे से वह यहां पर बैठे हुए हैं। लेकिन कोई भी अधिकारी मौके पर नहीं आया। यह सभी मजदूर झुण्ड बनाकर बैठे हुए थे जिससे सोशल डिस्टेंसिंग की खुलेआम चैराहे पर ही धज्जियां उड़ाई जा रही थी। इतना ही नही इस चैराहे के बगल में ही बाकरगंज पुलिस चैकी है। इन्हीं मजदूरों के बगल में ही दो होमगार्ड ड्यूटी पर तैनात थे। जो बार-बार मजदूरों को भाग जाने के लिए कह रहे थे। लेकिन बाकरगंज पुलिस चैकी ने इन मजदूरों की कोई सुधि नहीं ली। समाचार लिखे जाने तक मजदूर बाकरगंज चैराहे पर बैठे रहे। 

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