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इल्म इंसानी तरक्की की पहली मंजिल- फरीद उद्दीन

घरों पर नमाज अदा कर कोरोना के खात्मे की मांगी दुआएं
   
फतेहपुर, शमशाद खान । कोरोना वायरस से बचने के लिए प्रशासन व स्वास्थ्य विभाग की ओर से जो हिदायात जारी की गई है। मुसलिम समाज के लोग उस पर सख्ती के साथ अमल करें। नमाजे जुमा, पांचों वक्त की नमाज और तरावीह लोगों ने घरों में अदा की। उसी तरह आज समाज के लोगों ने रमजानुल मुबारक का आखिरी अलविदा जुमा मस्जिदों में अदा न कर अपने-अपने घरों में जोहर की नमाज पढी। मस्जिद में सिर्फ इमाम, मोअज्जिन और खुद्दाम ने नमाजे अलविदा जुमा अदा की। मुल्क से कोरोना वायरस महामारी को जड़ से खत्म होने की अल्लाह तआला से दुआएं मागी।
काजी-ए-शहर कारी फरीद उद्दीन कादरी।
यह बात काजी-ए-शहर फरीद उद्दीन कादरी ने कहा कही। उन्होने कहा कि रमजान के महीने के अखरी जुमे को अलविदा जुमा कहा जाता है। उन्होने मुस्लिम समाज के लोगों को इस्लामी शरियत पर चलकर एक सच्चे इंसान हो जाने केे नसीहत दी। कुरआन की आयतों के हवाले से जहां पवित्र रमजान की खूबियां बताईं वहीं दुनिया में अमनों सुकून का रास्ता भी कुरआन के उसूलों पर चल कर तलाशने को कहा। काजी-ए-शहर श्री कादरी ने कहा कि इस्लाम वो धर्म है, जो कयामत तक आने वाले इंसानो की रहनुमाई करेगा। पैगम्बरे इस्लाम की शिक्षा पर चल कर ही दुनिया में अमनो शान्ति का माहौल पैदा किया जाना यकीनी हो सकता है। शिक्षा की अहमियत को उजागर करते हुए कहा कि हजरत आदम से लेकर आखरी पैगम्बर मोहम्मद साहब तक जितने भी पैगम्बर इंसानो की हिदायत के लिए दुनिया में आए सभी को अल्लाह ने सहीफे या किताब जरूर अता की। जिसका सीधा मकसद यह रहा कि नबियों के बाद नेजामें दुनिया इंसान को ही चलानी है। इसलिए इल्म (शिक्षा) इंसानी तरक्की की पहली मंजिल हैं।

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