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सीमाएं सील के दावे खोखले, पैदल व ट्रकों के जरिये लौट रहे प्रवासी

सीएम के आदेश के बाद संसाधनो की कमी आ रही आड़े
प्रवासियों को भार ढोने वाले वाहनों की जगह बसों से भेजने का दिया था निर्देश
  
फतेहपुर, शमशाद खान । लॉकडाउन में रोजी रोटी का जरिया ठप हो जाने पर रोजगार की तलाश में गांव से शहर आये मजदूरो को लगातार लॉकडाउन के बढ़ने से रोटी के निवालों के लाले पड़ गये तो पैदल ही अपने घर की वापसी के लिये निकल पड़े। महानगरो से वापस आने वाले मजदूरों में अधिकतर पैदल, साइकिल से या फिर भार ढोने वाले किसी वाहनों का सहारा ले रहे हैं। औरैया जनपद में मजदूरों के साथ हुए हृदय विदारक घटना के बाद सीएम योगी आदित्यनाथ द्वारा प्रदेश के सभी थानों के थानेदारों को सीमा में प्रवेश करने वाले सभी पैदल एवं ट्रकों से आने वाले प्रवासियों को रोककर उन्हें बसों से भेजे जाने के निर्देश दिये गये हैं। सीएम की घोषणा के बाद जिलाधिकारी संजीव सिंह, पुलिस अधीक्षक प्रशांत वर्मा जनपद से लगने वाली सभी सीमाओं को सील कर आने
हाईवे पर अपने गन्तव्य को जाते प्रवासी मजदूर।
वाले प्रवासियों को रोक कर बसों से भेजने के लिये रोडवेज बसों की व्यवस्था कराने में जुट गये है लेकिन गैर प्रान्तों से आने वाले मजदूरों की संख्या के आगे सरकारी व्यवस्थाएं नाकाफी दिखाई दे रही है। पैदल साइकिल से चलने वाले प्रवासियों का पलायन जारी है। घर वापस जाने के लिये प्रवासी मजदूर डीसीएम, ट्रक लोडर टैंकर जैसे भार ढोने वाले वाहनो का सहारा लेने को मजबूर है। जिन्हें रोकने पर हाइवे पर जाम जैसी स्थिति बनी रही। प्रवासी श्रमिको को ले जाने के किया लगाई गयीं रोजवेज की व्यवस्थाये नाकाफी रही। बताते चले कि औरैया जनपद में मजदूरों के साथ हुई घटना में दो दर्जन से अधिक मजदूरों की मौत हो गयी थी। जिसके बाद सीएम द्वार सभी प्रवासियों को भार ढोने वाले वाहनों एवं पैदल जा रहे लोगांे को रोककर बसों से भेजने के निर्देश दिया गया है लेकिन सीएम निर्देश का जनपद में असर होता दिखाई नही दे रहा है। रविवार को भी हाइवे से पैदल व ट्रकों के जरिए प्रवासियों का लौटने का सिलसिला बदस्तूर जारी रहा डीसीएम, ट्रकों, ट्रालों समेत अन्य भर ढोने वालें साधनों में जान जोखिम में डालकर गांव लौटते हुए मजदूरों को देखा जा सकता है। सैकड़ांे किलोमीटर की यात्रा पर निकले इन मजदूरों के पास न तो खुद खाने के लिय कुछ है न ही अपने बच्चों के लिये। ऐसे में भूखे पेट ही जल्द से जल्द गांव पहुंच जाना चाहते है। सीएम की घोषणा के बाद भी मजदूरों का पैदल व भाड़ा ढोने वाले वाहनों से तरह लौटने का सिलसिला न थमता हुआ नजर नहीं आ रहा है।

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