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पूर्व मंत्री विवेक सिंह का निधन, राजनीतिक गलियारे में शोक

दुखद: सदर सीट से तीन बार विधायक व कई मंत्रालयों का जिम्मा संभाल चुके विवेक सिंह का निधन
  
बांदा, के0 एस0 दुबे । जनपद की राजनीति के चमकते सितारे रहे पूर्व मंत्री और पूर्व सदर विधायक विवेक कुमार सिंह का शुक्रवार की सुबह दिल्ली के मैक्स अस्पताल में निधन हो गया। तकरीबन साढ़े सात बजे उन्होंने अंतिम सांस ली। अपने मंत्रित्वकाल में उन्होंने जनता की समस्याओं को सिरआंखों पर उठाते हुए समाधान किया। मूलभूत समस्या बिजली, पानी और सड़क उनकी प्राथमिकता हुआ करती थी। इसी कार्यप्रणाली की बदौलत न सिर्फ जनपद के लोगों बल्कि गृहणियों के जेहन में भी पूर्व मंत्री का नाम विद्यमान रहता था। पूर्व मंत्री के निधन से राजनीतिक गलियारों और जिले में शोक की लहर दौड़ गई। जानकारी के अनुसार पार्थिव शरीर बांदा आने पर शनिवार को अंतिम संस्कार किया जाएगा। 
जिले के जिम्मेदार नागरिक से लेकर विकास पुरुष तक का सफर अपनी तेज तर्रार छवि के बीच तय करने वाले इलाहाबाद विश्वविद्यालय में महामंत्री का चुनाव जीतने के बाद पूर्व मुख्यमंत्री हेमवती नंदन बहुगुणा की अंगुली पकड़कर राजनीति की पाठशाला में आगे कदम बढ़ाए और वर्ष 1996 में बसपा-कांगे्रस गठबंधन के टिकट पर पहला चुनाव विधानसभा पहुंचे और सियासी सफर को आगे बढ़ाया। विवेक सिंह ने जीत दर्ज कराने के बाद पीछे मुड़कर नहीं देखा और बड़ों-बड़ों को पटखनी दी। वर्ष 1998 में प्रदेश की राजनीति ने करवट
विवेक कुमार सिंह
बदली और कांग्रेस व बसपा में बिखराव हो गया। इस विखराव के नायक के रूप में विवेक सिंह व उनके साथी रहे नरेश अग्रवाल का अहम रोल रहा। कांग्रेस को तोड़कर नरेश व विवेक की जोड़ी ने लोकतांत्रिक कांग्रेस नाम से नई पार्टी बनाई और कल्याण सिंह के मंत्रिमंडल में जगह बनाई। इसके बाद वह राजनाथ सिंह के मंत्रिमंडल में भी शामिल रहे। उन्होंने पर्यावरण, कृषि और ऊर्जा राज्य मंत्री के रूम में कार्यकाल पूरा किया। इसके बाद उन्होंने कांग्रेस का हाथ छोड़ा और वर्ष 2002 में भाजपा के टिकट पर तिंदवारी से चुनाव लड़े, लेकिन विशंभर प्रसाद निषाद के हाथों हार का स्वाद चखना पड़ा। हार के बाद उन्होंने फिर से कांग्रेस में वापसी की और वर्ष 2007 और 2012 का चुनाव लड़ा और धमाकेदार जीत दर्ज की। वह वर्ष 2014 में लोकसभा चुनाव लड़े, लेकिन हार का सामना करना पड़ा। विवेक सिंह ने अपने तेज तर्रार कार्यशैली और जन सरोकार से जुड़कर क्षेत्र के लोगों के दिल में अपनी अलग जगह बनाई। कुंवर विवेक सिंह ने शहर के लोगों की नब्ज पकड़ते हुए चैबीस घंटे बिजली-पानी उपलब्ध कराने का वादा निभाया और लोगों के दिलों में अपनी छाप छोड़ने का काम किया था। कुंवर विवेक सिंह के निधन की खबर मिलते ही जिले में शोक की लहर दौड़ गई। कांग्रेस जिलाध्यक्ष राजेश दीक्षित ने उनके निधन पर गहरा शोक जताते हुए कहा कि बांदा की राजनीति में सितारे की तरह चमकने वाले पुरोधा के निधन से सियासी गलियारे में एक शून्य छोड़ गया है। कहा कि उनके निधन के रूप में राजनीति को हुई क्षति अपूर्णनीय है, जिसकी भरपाई हो पाना असंभव है।

साथियों समेत विरोधियों ने जताई शोक संवेदना
बांदा। पूर्व मंत्री तेज तर्रार नेता कुंवर विवेक सिंह के निधन की खबर मिलते ही जहां उनके साथियों व शुभचिंतकों ने आंसू बहाए, वहीं राजनीतिक के क्षेत्र में उनके धुर विरोधी रहे नेताओं ने भी दुख जाहिर किया। शोक संवेदना व्यक्त करने वालों में राज्यसभा सांसद विशंभर प्रसाद निषाद, एमएलसी रमेश मिश्रा, सांसद आरके पटेल, पूर्व मंत्री एमएलसी नसीमुद्दीन सिद्दीकी, सदर विधायक प्रकाश द्विवेदी, पूर्व मंत्री जमुना प्रसाद बोस, कांग्रेस के पूर्व जिलाध्यक्ष साकेत बिहारी मिश्रा, प्रदेश कांग्रेस सदस्य मुमताज अली, वरिष्ठ नेता प्रद्युम्न कुमार लालू दुबे, महिला जिलाध्यक्ष सीमा खान, भाजपा जिलाध्यक्ष रामकेश निषाद, पूर्व भाजपा विधायक राजकुमार शिवरहे, सपा जिलाध्यक्ष विजयकरन यादव समेत सभी राजनीतिक दलों के नेताओं ने अपनी शोक संवेदनाएं व्यक्त करते हुए उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की है। सभी विवेक के निधन को जिले की राजनीति में अपूर्णनीय क्षति करार दिया है।

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