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सीबीएसई व आईसीएसई बोर्ड के स्कूलों में फीस नियंत्रित करने की मांग

व्यापारियों ने मुख्यमंत्री को भेजा ज्ञापन 
   
फतेहपुर, शमशाद खान । अभिभावकों की मानसिक पीड़ा को समझते हुए उद्योग व्यापार मण्डल के संस्थापक अध्यक्ष की अगुवई में पदाधिकारियों ने कलेक्ट्रेट पहुंचकर उप जिलाधिकारी के माध्यम से मुख्यमंत्री को ज्ञापन भेजकर सीबीएसई व आईसीएसई बोर्ड के स्कूलों मंे फीस नियंत्रित न होने का मुद्दा उठाते हुए फीस को तत्काल नियंत्रित करने की मांग की है। 
उद्य़ोग व्यापार मण्डल के संस्थापक अध्यक्ष किशन मेहरोत्रा की अगुवई में पदाधिकारी कलेक्ट्रेट पहुंचे और मुख्यमंत्री को सम्बोधित एक ज्ञापन उप जिलाधिकारी को सौंपकर बताया कि प्रदेश में सीबीएसई एवं आईसीएसई बोर्ड के अनेक स्कूल संचालित है। जिनकी फीस निर्धारित नही है। प्रत्येक वर्ष एडमिशन फीस सहित अनेक शुल्क अभिभावकों से लिये जाते है। इन शुल्कों में पढ़ने वाले छात्र छात्राओं को क्या-क्या सुविधा प्रदान किया जाना है उनका कोई मानक निर्धारित नही है। अनेक प्रकार के भारी शुल्क से जहां एक तरफ अभिभावकों को अतिरिक्त बोझ का सामना करना पड़ता है वही दूसरी तरफ निर्धन छात्र छात्राए उच्च शिक्षा से वंचित बने रहते है। राष्ट्र की
एसडीएम को ज्ञापन देने के लिए कलेक्ट्रेट पर खड़े व्यापारी।
धरोहर छात्र छात्राओं के भविष्य हेतु भारी फीस व अन्य शुल्कों की बाधा को नियंत्रण कराये जाने की आवयश्कता है। ताकि अभिभावकों को शिक्षा का नियंत्रण बोझ व छात्र छात्राओं को शिक्षा से वंचित रहना न पड़े। बताया कि सीबीएसई एवं आईसीएसई के संचालित ज्यादातर स्कूलों में छात्र-छात्राओं को स्कूल द्वारा आवंटित किताबे, कापियां, स्टेशनरी, ड्रेस आदि जिनका अनियंत्रण मूल्य अभिभावकों की जीवनशैली को प्रभावित बना देता है, निर्धारित किया जाता है। साथ ही प्रत्येक वर्ष किताबों के प्रकाशन को भी स्थान्तरित कर दिया जाता है। जिसकी वजह से उपयोगी किताबो को किसी भी प्रकार से उपयोग में नही लाया जा सकता है। अत्यंत जटिल विषय पर छात्र-छात्राओं के भविष्य के साथ अभिभावकों को भी मानसिक तनाव से गुजरना पड़ता है। विषय को नियंत्रण किये जाने की आवयश्कता है। ताकि शिक्षा के साथ भविष्य सँवारा जा सके। यह भी कहा गया कि सरकारी स्कूलों में शिक्षा की गुणवत्ता की कमी के कारण अभिभावक अन्य दूसरे स्कूलों में अपने बच्चो को शिक्षा दिलाने हेतु मजबूर हो जाते हैं। प्रथम सरकारी अधिकारियों, कर्मचारियों के बच्चो की शिक्षा सरकारी स्कूलों से प्रारम्भ कराई जाए। ताकि सरकारी स्कूलों की गुणवत्ता बेहतर हो सके। अन्य सभी अभिभावक अपने बच्चो को सरकारी स्कूलों में शिक्षा हेतु प्रेरित हो सके। मांग की गयी कि अभिभावकों के हितों में सरलीकरण हेतु नियंत्रित उचित निर्धारित फीस व मनमानी किताबो, कापियों, स्टेशनरी आदि के आवंटन को रोका जाये। इस मौके पर प्रेमदत्त उमराव, अनिल वर्मा, मनोज साहू, मनोज कुमार मिश्रा, सेराज अहमद खान, सन्दीप श्रीवास्तव, टीटू गुप्ता, गुरुमीत सिंह, अशरफ अली, अंचल रस्तोगी, कृष्ण कुमार तिवारी, चन्द्र प्रकाश, बब्लू गुप्ता, अजय गुप्ता, उदित अग्रहरि, अमन सिंह लोधी आदि मौजूद रहे। 

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