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रमजान माह का अन्तिम अशरा आज से, खूब करें इबादत: कारी फरीद

फतेहपुर, शमशाद खान । रमजान का आखरी अशरा कल  से शुरू होगा। इस निजात के अशरे में खूब इबादत करें और अल्लाह तआला से मगफिरत की दुआएं मांगे। शहरकाजी कारी फरीद उद्दीन कादरी ने कहा कि आखरी अशरे में अल्लाह तआला इबादत गुजार रोजेदार बन्दे की हर जाएज दुआ को कुबूल करता है। इस निजात वाले आशरे में भी जो बन्दा अपने गुनाहों की माफी न करा पाए। उससे बदनसीब कोई नहीं हो सकता है। अल्लाह तआला इस आखरी अशरे में रोजेदार बन्दे की इबादत से खुश होकर उसके गुनाहों को माफ कर देता है। 
शहरकाजी कारी फरीद उद्दीन कादरी।
श्री कादरी ने कहा कि हैसियत मन्द मुसलमानों को चाहिए कि वह गरीबों को जकात जरूर अदा करें। जिस तरह से रोजा रखकर इन्सान की रूह पाक साफ हो जाती है। इसी तरह जकात देने से उस व्यक्ति का माल भी पाक हो जाता है। इस मुबारक महीने में खूब इबादत करें। पता नहीं अगले साल उसे यह मुबारक महीना नसीब भी हो या नहीं। अल्लाह तआला ने इस अशरे में शब-ए-कद्र रात बनाकर अपने बंदो पर बहुत बड़ा एहसान किया है। इन फजीलत वाली रातों में इबादत कर इंसान दीनी और दुनियावी जिन्दगी में कामयाब होने के रास्ते पर बढ़ता है। श्री कादरी ने कहा कि अगर आपके पड़ोसी में यतीम बच्चे हो तो ईद के दिन उनका पूरा ख्याल रखें ताकि उन्हें अपने यतीम होने का गम न रहे। तभी आप से अल्लाह तआला राजी होगा और पैगम्बरे इस्लाम भी राजी होंगे। आपका फरमान है कि सबसे पहला हक आपके पड़ोसी का है और आपका पड़ोसी आप से नाराज हो तो समझो कि आप से अल्लाह तआला भी नाराज है। उन्होंने कहा कि इस बार मुस्लिम समाज के लोग ईद बहुत सादगी के साथ मनाएं। उसकी वजह ये है कि कोरोना वायरस की महामारी से सारी दुनिया के लोग परेशान हैं। लाँकडाउन की वजह से आर्थिक संकट है। बेरोजगारी बढ़ रही हैं इस बिमारी की वजह से लोग जिन्दगी और मौत से जंग लड़ रहे हैं। इसके अलावा जब पाँचों वक्त की नमाज, तरावीह व जुमा मस्जिदों मे अदा न कर के सारी इबादते घरो पर कर रहे हैं तो ऐसे नाजुक हालात में ईद की खुशियाँ कैसे मना सकते हैं लिहाजा मालिके नेसाब (मालदार) लोगों की जिम्मेदारी और भी बढ़ जाती है कि वो गरीबों, यतीमों, बेवाओं, बेसहारा, परेशान हाल लोगों का खास ख्याल रखें। तभी आपकी असल ईद होगी।

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