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आंधी-बारिश से गिरे पेड़, उडे छप्पर, टीनें

पेड़ धराशायी होने से दबकर भैंस की मौत

चित्रकूट, सुखेन्द्र अग्रहरि। लाक डाउन के बीच बीती रात आंधी, तूफान, बारिश, ओलों से जनजीवन प्रभावित हुआ है। कई लोगों के घरों के समीप विशालकाय वृक्ष गिर गए। जिससे मकान ढहने के साथ ही बंधे जानवरों की भी मौत हुई है। पशु मालिक ने पेड़ धराशायी होने के चलते दबने से भैंस की मौत हुई है। मुख्यालय स्थित चमड़ा मण्डी दुग्ध डेयरी की दीवारे गिर गई। क्षेत्र के आसपास की विद्युत खंभे व तारे टूटने से बिजली आपूर्ति रातभर बाधित रही। ग्रामीण इलाकों में 24 घंटे से अधिक से विद्युत व्यवस्था धड़ाम है। जिसके चलते पेयजल सप्लाई भी ठप हो गई। 
आंधी में गिरे पेड़, टीने।
मुख्यालय के करीब ग्राम लोढ़वारा श्रमदान स्थित तिराहे पर भगना का कच्चा घर था। समीप ही बबूल का भारी पेड़ तेज आंधी के चलते गिरने से घर चपेट में आकर ध्वस्त हो गया। घर के अंदर बंधी 70 हजार कीमत की भैंस की मौत हो गई। इसी प्रकार समूचे मार्ग में बीती रात लगभग डे़ढ़ बजे दर्जनों पेड़ रात्रि में आई भयंकर आधी व बारिश में धराशायी हुए हैं। मार्ग में पड़े पेड़ों से राष्ट्रीय राजमार्ग में आवागमन बाधित हुआ। ट्रक चालकों ने किसी तरह पेड़ों की टहनियां हटाकर गुजरे। प्रातः आसपास के ग्रामीण लकड़ियों को समेट कर घर ले जाते देखे गए। रातभर आंधी, बारिश से गरीबों की झोपड़ियों में लगी टीने, छप्पर, तिरपाल आदि उड़ गए। तेज बारिश, हवा के झोकों से विद्युत खंभे व तार टूटने से जनपद अंधेरे में डूब गया। पेयजल आपूर्ति बाधित होने से लोगों को पेयजल संकट का सामना करना पड़ा। सुबह विद्युत व्यवस्थाएं सुचारु हुई। पानी सप्लाई बहाल हो सका। मंगलवार की शाम अचानक मौसम बदला। आंधी के साथ बारिश हुई।

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