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विश्वविद्यालय में प्रवेश से पहले सेनेटाजिंग टनल से गुजरना होगा

कोरोना से बचाव के लिए विश्वविद्यालय की ओर से हुई तैयारी 
सुरक्षा के लिहाज से थर्मल स्क्रीनिंग का सिलसिला भी जारी 
 
बांदा, के0 एस0 दुबे । विश्वविद्यालय ने बहुत ही कम लागत से सनेटाइजिंग टनल का निर्माण कराया है। आवश्यकतानुसार अब विश्वविद्यालय मे प्रवेश से पूर्व टनल से होकर ही परिसर मे आ सकेगें। प्रवेश से पूर्व थर्मल स्क्रीनिंग के साथ-साथ विशेष रूप से बने सनेटाइजिंग टनल से ही गुजरने के बाद आवश्यकता पडने पर परिसर मे प्रवेश की अनुमति होगी। कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति डा. यूएस. गौतम ने अपने अधिकारियों एवं कर्मचारियों को संक्रमण से बचाने हेतु मुख्य द्वारा पर ही सनेटाइजिंग टनल का निर्माण कराया है। इस टनल के माध्यम से कोई भी व्यक्ति
विवि में स्क्रीनिंग करता कर्मचारी
जो विश्वविद्यालय में प्रवेश करेगा, सर्वप्रथम इस टनल से सनेटाइज होने के बाद ही विश्वविद्यालय परिसर मे प्रवेश कर सकेगा। डा. गौतम ने बताया कि जिला प्रशासन द्वारा वानिकी महाविद्यालय को क्वारंटीन सेंटर बनाया गया है। ऐसे मे परिसर में बाहर से आने वालो की संख्या की दृष्टिगत यह और भी आवश्यक था। 
डा. गौतम ने बताया कि वर्तमान में कोविड-19 वैश्विक स्तर पर महामारी का रूप पकड़ लिया है। पूरा विश्व इस नोवेल वायरस की चपेट मंे है। इसके संक्रमण से बचाव हेतु विश्व स्वास्थ्य संगठन एवं भारत सरकार द्वारा विभिन्न एडवाइजरी जारी की गयी है। जिसमें प्रमुख रूप से आइसोलेशन डिस्टेंस, हाथों केा धोना, सनेटाइजर यूज करना इत्यादि है। डा. गौतम ने बताया कि सनेटाइजिंग टनल बनाने की जिम्मेदारी वानिकी महाविद्यालय के सहायक प्राध्यापक व सहायक सम्पत्ति अधिकारी ई0 संजय कुमार को दी गयी थी। ई0 संजय ने इस कार्य को अपने
सेनेटाइजिंग टनल से होकर गुजरते हुए विवि के कुलपति डा. यूएस गौतम
उपलब्ध संसाधन एवं कम लागत पर यह टनल एक दिन मे तैयार कर दिया। ई0 संजय ने बताया कि बाजार मे सनेटाइजिंग टनल की कीमत 1 लाख से 1.5 लाख के करीब है। परन्तु विश्वविद्यालय द्वारा निर्मित कराये गये इस टनल पर मात्र 19000 हजार रूपये ही व्यय आया है। इस टनल को मानक के अनुरूप ही तैयार किया गया है जो कि मैन्युल आपरेट किया जायेगा। संजय ने बताया कि सनेटाइजर के रूप मे एथिल एल्कोहल 70 प्रतिशत का घोल उपयोग किया जा रहा है। इस अवसर पर विश्वविद्यालय के निदेशक प्रसार प्रो. एनके बाजपेयी, वित्त नियंत्रक शैलेश आनंद, अधिष्ठाता उद्यान प्रो. एसवी द्विवेदी, निदेशक प्रशासन एवं अनुश्रवण डा. बीके सिंह, सह अधिष्ठाता वानिकी डा. संजीव कुमार, सह निदेशक प्रसार डा. नरेन्द्र सिंह, डा. आरके सिंह, डा. बीके गुप्ता, ई. संजय कुमार, ई. सुनील कुमार एवं विश्वविद्यालय अन्य प्राध्यापकगण एवं अधिकारीगण उपस्थित रहे। 

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