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श्रमिक स्पेशल तीन ट्रेनों में आई प्रवासी कामगारों की खेप

कुल 4959 प्रवासी मजदूरों को लाया गया 
सबसे ज्यादा 1947 प्रवासी मजदूर जिले के 

बांदा, के0 एस0 दुबे । शुक्रवार को तीन श्रमिक स्पेशल ट्रेनों में 4959 प्रवासी श्रमिक आए। सूरत, अहमदाबाद और मुंबई से प्रवासी कामगार लाए गए। स्पेशल ट्रेन में घर वापसी करने वाले लगभग 1947 प्रवासी मजदूर बांदा जिले के रहने वाले हैं। एक ही दिन में तीन ट्रेनें आने से प्रशासनिक अफसरों के साथ रेल अधिकारियों का पसीना छूट गया। स्वास्थ्य विभाग की टीम ने हरेक मजदूर को जांच के बाद ही बसों से मजदूरो को रवाना किया गया। 
ट्रेन से उतरने के बाद चेकअप के लिए जाते प्रवासी कामगार
प्रदेश सरकार द्वारा दूसरे राज्यों में फंसे प्रवासी मजदूरों को लाने के लिए लगातार श्रमिक स्पेशल ट्रेनें चलाई जा रही हैं। शुक्रवार को तड़के 3रू35 बजे सूरत (गुजरात) से प्रवासी मजदूर को लेकर श्रमिक स्पेशल ट्रेन यहां आई। प्रशासनिक अधिकारियों के साथ में पुलिस फोर्स स्टेशन पर मुस्तैद रहा। इसमें 59 जिलों के 1783 प्रवासी मजदूर सवार थे। लगभग 780 प्रवासी मजदूर बांदा जिले के थे। दूसरी स्पेशल ट्रेन सुबह लगभग 6ः50 बजे 59 जिलों के 1901 प्रवासी मजदूरों को लेकर आई। इसमें बांदा जिले के 162 प्रवासी मजदूरों ने अपने परिवार वालों के साथ घर वापसी की। लगभग दो घंटे तक यह ट्रेन वापस लौट गई। इसके बाद सुबह 10ः26 बजे मुंबई (महाराष्ट्र) से 12 जिलों के 1275 मजदूरों को लेकर तीसरी ट्रेन यहां आई। इसमें सर्वाधिक 1005 प्रवासी मजदूर बांदा जिले के रहने वाले हैं।
चेकअप के लिए लाइन लगाए खड़े यात्री
जबकि 270 यात्री अन्य जिलों के रहने वाले बताए गए। इसके पूर्व प्रवासी मजदूरों के स्टेशन पर उतरने से पहले ही पूरे प्लेटफार्म को सेनेटाइज किया गया। शारीरिक दूरी का पालन कराते हुए सभी को ट्रेन से उतारा गया। स्वास्थ्य विभाग की टीम ने हरेक मजदूरों की थर्मल स्क्रीनिंग की। स्टेशन के बाहर खड़ी परिवहन निगम की 270 बसों से सभी मजदूर गृह जनपदों के लिए रवाना किए गए। सभी मजदूर पहले क्वारंटाइन में कुछ दिन रहेंगे। कोरोना वायरस की जांच के बाद ही उन्हें उनके घर भेजा जाएगा।

अन्य वाहनों से भी लौट रहे कामगार 
बांदा। कोरोना के कारण जारी लाकडाउन के बीच दूसरे राज्यों में फंसे प्रवासी मजदूरों के अपने घर लौटने की कवायद लगातार जारी है। ट्रक, जीप, टेंपो समेत मिनी बस आदि के जरिए तमाम प्रवासी मजदूर घरों को लौट रहे हैं। ऐसे में कोरोना संक्रमण बढ़ने का खतरा बढ़ने की आशंका जताई जा रही है। लाकडाउन के दौरान फंसा हरेक
रोडवेज बसों में सवार होते प्रवासी कामगार
प्रवासी मजदूर किसी भी दशा में घर पहुंचने को बेताब है। शुक्रवार को झांसी-मिर्जापुुर राष्ट्रीय राजमार्ग पर ट्रक में क्षमता से कई गुना ज्यादा सवार मजदूरों ने बताया कि लाकडाउन घोषित होने के बाद हालात और बिगड़ गए हैं। फैक्ट्ररियों में ताला बंदी है। ठेकेदारों ने फोन उठाना बंद कर दिया है। बताया कि मजबूरी में हरेक प्रवासी मजदूर ने तीन हजार रुपये किराया अदा कर ट्रकों से घर लौट रहे हैं। बताया कि प्रवासी मजदूरों के पास लॉकडाउन के कारण काम नहीं का है। ऐसे मे वह आर्थिक संकट का सामना कर रहे हैं। इसी वजह से अपने घर वापस लौट रहे हैं।

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