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सरकार का फरमान, नहीं मान रहे शिक्षा माफिया

प्राइवेट स्कूलों की फीस पर आम जनमानस परेशान

वाराणसी, विक्की मध्यानी । कोरोना वैश्विक महामारी से लाॅक डाऊन होने के  कारण निचले तबके से लगायत मध्यमवर्गीय सभी आर्थिक स्थिति से कमजोर हो चुका है,और परेशान हैं। इस स्थिति में सरकार के मानव संसाधन विकास मंत्री डॉ रमेश पोखरियाल निशंक ने इस आपातकालीन कठिन परिस्थितियों में यह निर्देश पारित किया कि सभी प्राइवेट स्कूल अभिभावकों का सहयोग करते हुए फीस वृद्धि न करें और तीन माॅह अप्रैल मई-जून की फीस एक साथ न वसूले। इसके बावजूद कुछ प्राइवेट स्कूल एडिशनल चार्ज के साथ तीन माँह की फीस रिकवरी करने की प्लानिंग कर रहे हैं। मानव संसाधन मंत्रालय के निर्देश का असर प्रधानमंत्री के संसदीय क्षेत्र बनारस में नहीं दिख रहा है। लोगों का कहना है कि इस आर्थिक संकट में सरकार को तीन माँह की फीस पूर्ण रूप से माफ करनी चाहिए,या तो कम से कम आधी तो जरूर  छूट मिलनी चाहिए।इस मसले पर अलग-अलग प्राइवेट स्कूलों में अपने बच्चों को पढ़ाने वाले अभिभावकों ने  अपनी बात रखी।

सख्त निर्णय ले सरकार

शिवपुर क्षेत्र निवासी अधिवक्ता अखिलेश राय व अश्वनी सिंह का कहना है कि शिक्षा और चिकित्सा क्षेत्र में खून चूसो अभियान आरंभ होने से लोग मर्माहत है। सरकार को इस मसले पर जल्द से जल्द जनमानस के हित्त में और प्राइवेट स्कूलों पर कड़ा निर्णय लेना चाहिए।

सरकार पर है भरोसा

पांडेपुर निवासी व्यापारी अजय लखमानी (अज्जू) का कहना है कि सरकार इस आर्थिक संकट में हम सभी को निकालने के लिए जरूर कोई ठोस कदम उठाएगी और शिक्षा माफियाओं पर कमर कसेगी। प्राइवेट स्कूलों की मनमानी इसी तरह जारी रही तो मजबूरन हमें ईस वर्ष बच्चों को शिक्षा से वंचित रखना पड़ेगा।

न्यायसंगत नहीं

समाजसेवी मझमठिया निवासी रणजीत सिंह का इस मसले पर कहना है कि सरकार के निर्णय का हम सम्मान करते हैं।हर अभिभावक भोजन कम करेगा पर बच्चों की पढ़ाई पर कोई कोताई न कर कोई उपाय जरूर करेगा।लेकिन सरकार को इस समय जरूरत है कि लोगों की समस्याओं पर ध्यान रखते हुए फीस पर पूर्ण रूप से छूट देनी चाहिए।

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