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वैसे भी पीछे थे और कोरोना द्वारा पीछे हो गए........................

देवेश प्रताप सिंह राठौर 
(वरिष्ठ पत्रकार)

... आज भारतवर्ष सन 1947 में आजाद हुआ आजादी के समय देश में अगर श्री नरेंद्र मोदी जी जैसे व्यक्त प्रधानमंत्री हुआ होता तो भारत महाशक्ति होता विश्व की एक महाशक्ति के रूप में पहचाना जाता परंतु ऐसा नहीं हो सकता और आज जब समय मिला देश विकास के गति  पर चल रहा है इस कोरोनावायरस ने कुछ वर्ष देश के विकास मे रुकावट पैदा कर दी। आज बहुत सी संस्थाएं ऐसी हैं जहां पर बहुत से कर्मचारी आस लगाए बैठे थे पहले जैसे अच्छे दिन आएंगे परंतु कोरोना वायरस ने सारे मंसूबे को पानी फेर दिया क्योंकि विश्व स्वास्थ संगठन ने कह दिया है कोरोना वायरस लंबे समय तक रहेगा जब तक इसकी वैक्सीन नहीं बन जाएगी तब तक यह जाने वाला नहीं है सिर्फ बचाओ और सुरक्षा और सुरक्षा ही है एकमात्र उपाय है हमें नियम के पालन करते हुए कार्य करने होंगे परंतु बहुत सी जगह ऐसी हैं जहां
पर सोशल डिस्टेंस होना संभव है वह स्थान पर कैसे लोग कार्य करेंगे जहां पर सुविधाएं हीन है तथा लोग समझने का प्रयास नहीं करते हर व्यक्ति मालिक है इस तरह का व्यवहार  संस्थाओं में किया जाता है उन स्थानों पर आदमी कैसे कार्य करेगा लेकिन एक कहावत है ही गई है मरता क्या न करता मजबूरी की हालत में बच्चों को पेट पालने के लिए अपने को जोखिम में डालकर व्यक्ति कार्य करने के लिए मजबूर हो जाएगा। विश्व स्वास्थ संगठन ने स्पष्ट तौर पर कहा है कि आप सब लोग समझ ले वैक्सीन भला कोई आसान काम नहीं है इसमें 2 साल से लेकर 10 साल तक लग सकते हैं तब तक हमें आपको नियमों के तहत कार्य करने की जरूरत है। परंतु भारत जैसे देश में नियम तोड़ने वाले लोग अहंकार से भरे लो ग यह संख्या बहुत है कैसे समझाया जाए कि आज यह महामारी कोरोना वायरस की कोई छोटी समस्या नहीं है पूरा विश्वास पर शान है हमें नियमों का पालन के साथ जीने की आदत डालनी होगी हम सुरक्षा के साथ अपनी सेवाएं संस्था के प्रति दे सकते हैं।

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