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उत्तर पुस्तिकाओं के मूल्यांकन का कार्य अव्यवहारिक: आलोक

17 मई के बाद परिस्थितियों का आंकलन कर कराया जाये मूल्यांकन 
  
फतेहपुर, शमशाद खान । कोविड-19 के बढ़ते संक्रमण के बीच प्रदेश सरकार द्वारा पांच मई से उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद के हाईस्कूल एवं इण्टर की उत्तर पुस्तिकाओं के मूल्यांकन कार्य को अव्यवहारिक बताते हुए उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षक संघ के जिलाध्यक्ष आलोक शुक्ला का कहना रहा कि मूल्यांकन कार्य को 17 मई के बाद परिस्थितियों का आंकलन कर कराया जाये। 
माध्यमिक शिक्षक संघ के जिलाध्यक्ष आलोक शुक्ला।
माध्यमिक शिक्षक संघ के जिलाध्यक्ष आलोक शुक्ला ने कहा कि अब तक कोरोना से प्रभावितों की संख्या में लगातार बढ़ोत्तरी हो रही है। जब पूरे देश में 112 एवं प्रदेश में मात्र 13 पीड़ित थे तब लाकडाउन कार्य लागू कर मूल्यांकन कार्य स्थगित कर दिया गया था। आज देश में लगभग अड़तीस हजार व प्रदेश में लगभग तेईस सौ कोरोना प्रभावितों की संख्या हो गयी है। जिसमें दिन प्रतिदिन वृद्धि हो रही है। आज प्रदेश में 55 जिले रेड जोन एवं आरेंज जोन मं है। केन्द्र सरकार ने गहन विचारोपरान्त 17 मई तक लाकडाउन को सख्ती के साथ बढ़ा दिया है। जहां सार्वजनिक परिवहन पर पूर्णतः रोक लगी है। वहीं सामाजिक कार्यक्रमों पर भी रोक है। लोग अपने घर के आस-पास धार्मिक स्थलों पर नही जा सकते। वहां प्रदेश सरकार/शासन का 275 मूल्यांकन केन्द्रों में लगभग डेढ़ लाख शिक्षकों को एकत्र करके मूल्यांकन कराने का निर्णय न केवल समझ से परे है बल्कि शिक्षकों/कर्मचारियों की जान जोखिम में डालना है। जिलाध्यक्ष ने कहा कि जहां तक मूल्यांकन केन्द्रों का शासनादेश के दिशा-निर्देशों के अनुपालन का विषय है शिक्षक वर्षों से मूल्यांकन केन्द्रों की दशा-दुर्दशा को देखता आ रहा है। प्रतिवर्ष मूल्यांकन केन्द्रों के लिए दिशा-निर्देश जारी किये जाते हैं। जो शिक्षाधिकारियों के पत्राचार तक ही सीमित रहते हैं। उन्होने कहा कि माध्यमिक शिक्षक संघ उप मुख्यमंत्री/शिक्षा मंत्री, माध्यमिक शिक्षा परिषद के सचिव, प्रमुख सचिव व जिलाधिकारी से मांग करता है कि पांच मई से घोषित मूल्यांकन कराने के निर्णय को वापस लिया जाये और सत्रह मई तक लाकडाउन के पश्चात परिस्थितियों का आंकलन कर मूल्यांकन कार्य सम्पादित कराया जाये। 

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