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कानपुर:- दो श्रमिक स्पेशल ट्रेनों से सेंट्रल पहुंचे यात्री

कमाने के लिए घर छोड़ा था। जो भी कमाया उसमें कुछ लॉक लाउन में जिदगी बचाने में खर्च कर डाला। जो थोड़ा बचा था वह घर पहुंचने में चला गया। 46 दिन के संघर्ष के बाद जिदगी बचाने में तो सफल हो गए। रुपया पैसा तो फिर से कमा लेंगे। अब कम से कम घरवालों की नजरों के सामने तो रहेंगे। यह बातें रविवार को गुजरात के गोधरा और सुरेंद्र नगर से दो श्रमिक स्पेशल ट्रेनों से सेंट्रल पहुंचे यात्रियों ने कहीं। अधिकांश यात्रियों का कहना था कि कंपनी के सेठ ने खुद ही फार्म भरकर उन लोगों से रुपये जमा कराए थे। बाद में उन लोगों को बस के सफर के दौरान ट्रेन का टिकट दिया गया।
आमजा भारत सवांददाता गौरव शुक्ला:- गुजरात के गोधरा से सात बजे सेंट्रल आने वाली ट्रेन (09589) 8.30 बजे सेंट्रल स्टेशन के प्लेटफार्म नंबर नौ पर पहुंची। इस ट्रेन में सवार 13 सौ यात्रियों को उतारा गया। इसमें कानपुर के 23, कासगंज के 127 व गोंडा के 90 यात्री थे। स्वास्थ्य विभाग की टीम थर्मल स्क्रीनिग करके 48 बसों से गंतव्य के लिए रवाना किया। इसी तरह 8.30 बजे गुजरात के सुरेंद्र नगर से आने वाली स्पेशल ट्रेन (09571) 11.57 बजे सेंट्रल स्टेशन के प्लेटफार्म नंबर नौ पर आयी। इस ट्रेन में 1218 यात्री सवार थे। पैसेंजर हाल में स्क्रीनिग के बाद यात्रियों को 46 परिवहन बसों से आगरा, इटावा, फिरोजाबाद, कन्नौज, प्रतापगढ़ आदि स्थानों के लिए रवाना किया। इस दौरान स्टेशन निदेशक हिमांशु शेखर उपाध्याय, एडीएम सिटी विवेक कुमार श्रीवास्तव, सीओ कलक्टरगंज, जीआरपी, आरपीएफ व थानों का फोर्स मौजूद रहा।

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