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राशन ही नहीं समाजसेवी ने जलते पैरों को पहनाईं चप्पलें

मासूम को दूध व बड़ों को कराया भोजन 

फतेहपुर, शमशाद खान । लाकडाउन के दौरान जहां तमाम दानवीरों द्वारा लगातार पेट भरने के लिए बेरोजगारी का दंश झेल रहे दिहाड़ी मजदूरों व जरूरतमंदों को सूखा राशन व लंच पैकेट का वितरण कराया जा रहा है। वहीं 51 वें दिन शहर के समाजसेवी का दिल उस समय फट पड़ा तमाम मजदूर व उनके बच्चे अपनी मंजिल की ओर तपती धूप में पैदल जा रहे थे। इस समाजसेवी ने तत्काल नंगे पैरों को आग के अंगारों रूपी तपिश से बचाने के लिए चप्पल ही नहीं मुहैया कराई बल्कि इंसानियत का तगाजा दिखाते हुए अपने हाथों से नन्हें पैरों को चप्पले भी पहना दी। यह देख लोग बरबस कह उठे कि वाकई में ऐसे समाजसेवियों की आज बेहद जरूरत है। जिन्हें खाने के साथ-साथ गरीबों के हर क्षेत्र को देखना होता है। 
 युवा को चप्पल देते समाजसेवी मो0 आसिफ एडवोकेट।
बताते चलें कि यह वाक्या कोई कहानी नहीं है बल्कि दूसरे राज्यों से लाकडाउन की मार झेल रहे तमाम कामगार श्रमिक अपने परिवार के साथ अपनी मंजिल की ओर पैदल व साइकिल से जा रहे थे। इसकी जानकारी कन्या फाउण्डेशन के पदाधिकारियों व समाजसेवी मो0 आसिफ एडवोकेट को मिली। उन्होने अपनी टीम के साथ खाने-पीने की व्यवस्था की और इन कामगार परिवारों के बीच पहुंचे। लोगांे को लाई, चना व अन्य सामग्री बांटी जा रही थी। तभी उनकी निगाह कई ऐसे लोगों व बच्चों पर गयीं जो बिना चप्पल ही पैदल यात्रा कर रहे हैं। धूप के चलते मासूमों व युवाओं के पैर कुम्हलाये से दिख रहे थे। इस पर समाजसेवी मो0 आसिफ ने आनन-फानन सभी के लिए चप्पल व दूध की भी व्यवस्था सुनिश्चित की। उन्होने कहा कि ऐसी मदद दिखावे के लिए नहीं बल्कि अल्लाह को राजी करने के लिए हर इंसान के लिए जरूरी है। उन्होने कहा कि वर्तमान हालात बहुत अच्छे नहीं है। बेचारे गरीब व रोज खाने-कमाने वाले अपनी मंजिल तक पहुंचने के लिए ट्रकों, टैक्सियों, मोटरसाइकिल, साइकिलों के अलावा पैदल ही निकल पड़े हैं। ऐसे लोगों का भूखे-प्यासे होना स्वाभाविक है। ऐसे लोगों की छोटी सी मदद किसी वरदान से कम नहीं है। इस मौके पर धीरज बाल्मीकि, असलम, गाजी अब्दुर्ररहमान गनी, प्रदीप साहू, सुरेन्द्र गौतम एडवोकेट, सुरेश राही सहित बड़ी संख्या में पदाधिकारी रहे। 

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