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श्रमिक विरोधी नीतियों के विरोध में रेल कर्मचारी भूख हड़ताल पर

शाखा कार्यालय में धरना देकर जताया विरोध
कोरोना योद्धा घोषित न करने पर कर्मचारियों में रोष
 
बांदा, के0 एस0 दुबे । आल इंडिया रेलवे फेडरेशन (एआईआरएफ) के प्रांतीय आह्वान पर नॉर्थ सेंट्रल रेलवे मेंस यूनियन (एनसीआरएमयू) ने सरकार की श्रमिक विरोधी एवं दमनकारी नीतियों के विरोध में एक दिवसीय भूख हड़ताल की। केंद्र सरकार द्वारा भत्तों में कटौती और कोरोना योद्धा का दर्ज न दिए जाने पर नाराजगी जताई। 
रेलवे स्टेशन परिसर स्थित एनसीआरएमयू शाखा कार्यालय में लाकडाउन प्रोटोकाल का पालन करते हुए रेल कर्मचारियों ने धरना देकर विरोध जताया। शाखा सचिव पीके सिंह समेत जेके वर्मा, युवा सचिव श्यामेंद्र गुप्ता, वीरेंद्र चतुर्वेदी, जसवंत भूख हड़ताल पर बैठ गए। इस अवसर पर कार्यकर्र्ताओं को संबोधित करते हुए शाखा सचिव ने कहा कि सरकार ने श्रम कानूनों को खत्म कर मजदूरों के हितों पर कुठाराघात किया है। मजदूरी समय बढ़ाकर 12
भूख हड़ताल पर बैठे रेल कर्मचारी
घंटे का कर दिया। श्रमिकों की सामाजिक सुरक्षा समाप्त कर दी गई है। उन्होंने कहा कि लॉकडाउन के दौरान जब अधिकांश देशवासी अपने घरों में सुरक्षित बैठे थे तब भी रेल कर्मचारी अपनी जान जोखिम में डालकर मालगाड़ियों के द्वारा जरूरी वस्तुओं को लोगों तक पहुंचाने का काम कर रहे थे। इसके बावजूद सरकार ने अब तक रेल कर्मचारियों को कोरोना योद्धा नहीं घोषित किया। श्रमिक हितों के 44 कानूनों में 41 कानून समाप्त कर श्रमिकों को बंधुआ मजदूरी वाले युग में पहुंचा दिया। सरकार को इसका नतीजा भुगतना पड़ेगा। भूख हड़ताल पर बैठे संगठन पदाधिकारियों का तमाम रेल कर्मियों सुरेश मिश्रा, शकील, अतुल यादव, डीके पांडेय, सुनील कुमार, राजेंद्र कुमार, कमल सिंह, योगेंद्र साहू, कुलदीप कुमार, आशीष साहू, सुरेंद्र कुमार, आलोक यादव, आमिर खां, विनीत दीक्षित, तौकीर अहमद आदि ने फोन पर अपना समर्थन दिया।

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