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टिड्डी दल के प्रकोप को रोकने के लिए गाइड लाइन जारी

राजस्थान, पंजाब व हरियाणा प्रान्त में प्रकोप फैलने पर सतर्क हुआ प्रशासन
 
फतेहपुर, शमशाद खान । जिला कृषि रक्षा अधिकारी सत्येंद्र सिंह ने बताया कि राजस्थान, पंजाब एवं हरियाणा के विभिन्न क्षेत्रों में टिड्डा के प्रकोप के दृष्टिगत इन प्रान्तों से सटे हुए प्रदेश के जनपदों में टिड्डा का प्रकोप देखा गया है। टिड्डी दल का प्रकोप महामारी स्वरूप ग्रहण कर लेता है। वर्तमान में टिड्डी दल राजस्थान से होकर मध्य प्रदेश के उज्जैन में दिखाई दिए हैं। प्रदेश के सीमावर्ती जिलों आगरा, मथुरा एवं झांसी में पहुंचने की प्रबल संभावना है। अतः यह आवश्यक है कि जनपद में निरंतर निगरानी की जाए। ताकि किसी भी स्तर के प्रकोप की दशा में समय पर नियंत्रण पाया जा सके। 
जिला कृषि अधिकारी ने बताया कि एकीडाइइडी परिवार के अर्थाप्टोरा गण का कीट है जो कि हेमिप्टेरा वंश का कीट टिड्डी या फसल टिड्डी कहलाता है। मादा टीडी मिट्टी में कोष्ठ पोस्ट बनाकर रहती है। शिशु टिड्डी का भोजन वनस्पति है और यह पांच-छः सप्ताह में वयस्क हो जाती है। टिड्डी का विकास आद्रता और ताप पर अत्यधिक निर्भर करता है जहां जलवा असंतुलित होती है और निवास स्थान सीमित होते हैं इन स्थानों पर रहने से अनुकूल ऋतु इनकी सीमित संख्या को फैलाने में सहायक होती है। वयस्क टिड्डियां एक दिन में लगभग 150 किलोमीटर की दूरी तय कर सकती हैं। बसंत का मौसम एवं बलुई मिट्टी टिड्डे के प्रजनन एवं अंडे देने हेतु सर्वाधिक अनुकूल होता है। इसलिए टिड्डी दल के आक्रमण से संभावित ऐसी मिट्टी वाले क्षेत्रों में जुताई करवा दें एवं जलभराव करा दें। ऐसी दशा में टिड्डी के विकास की संभावना कम हो जाती है। उन्होने बताया कि टिड्डी दल के प्रकोप की सूचना ग्राम प्रधान, कृषि विभाग के प्राविधिक सहायकों एवं ग्राम पंचायत अधिकारी के माध्यम से कृषि रक्षा इकाई/राजकीय कृषि बीज भंडार/कृषि विभाग/जिला प्रशासन तक तत्काल पहुंचाए। टिड्डी प्रकोप की दशा में एक साथ इकट्ठा होकर टीन के डिब्बे, थालियां आदि को बजाते हुए शोर मचाए। शोर से टिड्डी दाल आस-पास के खेतों में आक्रमण नहीं कर पाएंगे। टिड्डी दल के न्यून/माध्यम प्रकोप की दशा में कृषक एक साथ मिलकर क्योरपायरीफास 20 प्रतिशत ईसी अथवा लैम्डासाहलोथ्रीन 05 प्रतिशत ईसी का तीब्र छिड़काव करें। उन्होने बताया कि टिड्डी दल के नियंत्रण हेतु रसायन मैलाथियान 96 प्रतिशत यू0एल0वी0 का छिड़काव अत्यंत प्रभावी होता है। लेकिन इस रसायन का जन सामान्य को उपलब्धता न होने के कारण कृषक स्तर से इसका छिड़काव नहीं किया जा सकता। 

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