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कानपुर:- एक विशिष्ट व्याख्यान,एवं विधिक सहायता का महत्व पर आयोजन

वी. एस. एस. डी. कॉलेज कानपुर के विधि विभाग द्वारा एक विशिष्ट व्याख्यान *कोरोना महामारी में सामाजिक न्याय एवं विधिक सहायता का महत्व* पर आयोजित किया  गया
कानपुर सवांददाता अब्दुल निसार:- जिसमें मुख्य वक्ता काशी हिंदू विश्वविद्यालय के प्रोफेसर डॉक्टर शैलेंद्र गुप्ता  ने कहा कि इस महामारी में  भारतीय संविधान की प्रस्तावना का आर्थिक और सामाजिक न्याय का व्यापक महत्व है हमने जो विकास किया है वह इस आपदा के समय में सहारा देने की जगह खुद एक आपदा बन गया वर्तमान समय का लाक डाउन प्रकृति  के लिए एक वरदान साबित हुआ है  विकास में नदियों को  पिया पहाड़ों को खाया और व्यक्तियों को उजाड़ा हमें ऐसा विकास करना है जो सामाजिक न्याय के आधार पर स्थानीय उद्योग स्थानीय उपभोग को महत्व   देकर संविधान के  प्रस्तावना के लक्ष्यों के अनुसार सामाजिक न्याय के आधार पर  वर्तमान चुनौतियों का सामना किया जा सकता हैं भारतीय संविधान निर्माता  संवैधानिक समाज की स्थापना करना चाहते थे जिसमें सभी व्यक्ति अपनी समझ और योग्यता के अनुसार अपना विकास कर सकें । किसी को कोई विशेषाधिकार ना हो, राज्य अपने नागरिकों का इस प्रकार ध्यान रखें कि कोई विकास में पीछे ना रहे । इसके लिए राज्य को विशेष उपाय करना पड़े तो संवैधानिक रूप से वह कर सकें ।  स्वतंत्रता प्राप्ति के समय से ही देश के विभिन्न भागों में आर्थिक और सामाजिक विभिन्नता विद्यमान थी । पिछले दो दशकों में विभिन्नता पूर्ण आर्थिक निष्पादन, उपलब्धियों में क्षेत्रीय विषमता और अधिक वृद्धि की है । व्यापक अर्थ में जहां पश्चिमी और दक्षिणी राज्यों में तीव्र आर्थिक विकास हुआ है वहीं दूसरी ओर उत्तर पूर्वी राज्य विकास की दौड़ से पिछड़ते जा रहे हैं । इस स्थिति की ओर सचेत रहते हुए विभिन्न राज्यों के भीतर विभिन्न क्षेत्रों के बीच संतुलन स्थापित किया जाना आवश्यक है । पिछड़े हुए राज्य क्षेत्र को सरकार द्वारा  संसाधन  को जनता तक पहुंचाना संभव बनाने के लिए वितरण तंत्र को अधिक निपुण और कुशल बनाना चाहिए । वर्तमान महामारी के समय में प्रवासी श्रमिकों, मध्यमवर्ग रेहड़ी पटरी वालों से लेकर बड़े-बड़े उद्योग संकट की स्थिति में खड़े हैं । ऐसे में सामाजिक न्याय की भूमिका महत्वपूर्ण हो जाती है ।उद्योग और श्रमिक दोनों आर्थिक विकास के दो पहिए हैं जो साथ साथ चलेंगे तभी आर्थिक विकास होगा ।इनके साथ चलने के लिए यह आवश्यक है कि इनके बीच लाभ का बंटवारा सामाजिक न्याय के आधार पर हो । कोविड-19 महामारी ने मानव समुदाय को एक दूसरे की पारस्परिक निर्भरता का महत्व समझाने में सफल रहा है । घरेलू श्रमिक से लेकर औद्योगिक श्रमिक तक गृहणी से लेकर उद्योगपति तक सभी को एक दूसरे का महत्व पता चला । ऐसे परिदृश्य में संविधान की भावना के अनुरूप राज्य को सामाजिक न्याय को ध्यान में रखते हुए अपने विधि और सामाजिक संस्थाओं का पुनर्गठन करना चाहिए । आज जो व्यवहार प्रवासी श्रमिकों के साथ हो रहा है वह संविधान की भावना के विपरीत है  । यही समय है कि सरकार अपने कानूनी ढांचा में इस प्रकार का बदलाव करें कि भविष्य में ऐसी स्थिति उत्पन्न ना हो पाए । इसके साथ ही भारतीय समाज जो इस पूरे महामारी के दौरान एक दूसरे की मदद के लिए कोई भोजन कोई पानी लेकर जिस प्रकार सड़क पर उतरा वह इस बात को दर्शित कराता है कि हमारा समाज सामाजिक न्याय की भावना में एक दूसरे के सहयोग की भावना में विश्वास रखता है । हमारे संविधान निर्माता इस बात से भलीभांति परिचित थे इस महामारी की दशा में विधि के छात्रों और विधि के प्राध्यापकों का भी महत्वपूर्ण दायित्व है । वे विधिक सेवा के माध्यम से प्रवासी मजदूरों और महामारी से प्रभावित लोगों को राज्य द्वारा प्रदान की जाने वाली सहायता उन तक पहुंचे , उसमें उनकी मदद कर सकते हैं । राज्य के द्वारा जो भी निर्धारित फार्म भरा जाना है उसको भरने में सहायता कर सकते हैं , उसके आवश्यक पत्रावली तैयार करा सकते हैं ताकि इस महामारी की स्थिति से समाज को निकाला जा सके और भारतीय संविधान के प्रस्तावना के लक्ष्यों के अनुरूप भारतीय समाज का संगठन किया जा सके ।मुख्य अतिथि का स्वागत कालेज की प्राचार्य डॉक्टर  छाया जैन के द्वारा किया गया । कालेज प्रबंध तंत्र की सदस्य और यती सेवा संकल्प संस्थान की सचिव श्रीमती नीतू सिंह जी द्वारा लोगों की पीड़ा को अपनी पीड़ा समझना और उसके निवारण का प्रयास करना ही सामाजिक न्याय है , ऐसा कहा गया । मुख्य अतिथि का परिचय विधि विभाग के अध्यक्ष डॉ आर के पांडे जी द्वारा दिया गया । कार्यक्रम का संचालन डॉं अजय भूपेंद्र जायसवाल के द्वारा किया गया और धन्यवाद ज्ञापन डॉ एके उपाध्याय के द्वारा किया गया । इस अवसर पर विभाग के सभी साथी और छात्र-छात्राएं ऑनलाइन माध्यम से उपस्थित रहे।

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