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पत्रकारिता भारत मे एक चुनौती

 

हमीरपुर, महेश अवस्थी ।अंतरराष्ट्रीय पत्रकारिता स्वतंत्रता दिवस' पर  पत्रकार गणेश सिंह 'विद्यार्थी' ने कहा कि इस दिवस के मनाने का मकसद स्वतंत्र पत्रकारिता का समर्थन करना है। उन्होंने कहा कि प्रेस की आजादी यह साबित करती है कि किस मुल्क में अभिव्यक्ति की कितनी आजादी है। भारत जैसे विश्व के सबसे बड़े लोकतांत्रिक देश में प्रेस की आजादी की मौलिक जरूरत है। भारत ही क्या कोई भी मुल्क प्रेस की आजादी को अनदेखा कर तरक्की नहीं कर सकता है। यह सर्व विदित है कि भारत की आजादी में भारतीय प्रेस ने किस प्रकार अपनी महत्वपूर्ण भूमिका अदा की है। आधुनिक आर्थिक युग में पत्रकारिता के बदलते स्वरूप में बहुत सी चुनौतियाँ एक साथ खड़ी हुई हैं। आज पत्रकारिता का सबसे बड़ा दायित्व समाज में व्याप्त जाति-धर्म, वर्ग-सम्प्रदाय, क्षेत्र-भाषा विवाद की गहराई को पाटकर देश की एकता-अखंडता को मजबूत करने और फेक न्यूज पर लगाम लगाने का है। भारत में प्रेस की आजादी भारतीय संविधान के अनुच्छेद-19 में भारतीयों को दिए गए 'अभिव्यक्ति की आजादी के मूल अधिकार' से सुनिश्चित होती है।'भय या पक्षपात रहित पत्रकारिता भारत में एक चुनौती है।' भारत में इस स्थिति से हम कैसे निपटें, आज यह हम सबके लिए एक अति गम्भीर विचारणीय मुद्दा है।संपादक रामसरन दीक्षित ने कहा कि विश्व प्रेस स्वतंत्रता दिवस की शुरुआत अफ्रीका से हुई थी। वर्ष 1991 में यूनेस्को और सयुंक्त राष्ट्र संघ के जन सूचना विभाग ने मिलकर इसे मनाने का निर्णय किया था। सयुंक्त राष्ट्र महासभा ने इसकी बाकायदा घोषणा भी की थी। लेकिन सयुंक्त राष्ट्र संघ ने इसे वर्ष 1993 में पहली बार मनाया था। यूनेस्को ने 1997 से इस दिवस पर प्राइज़ देना प्रारम्भ किया।संचालन मुन्नीलाल अवस्थि ने किया ।डॉ भवानी दीन, के के त्रिवेदी,नवल गुप्ता,नंद किशोर यादव, ने भी विचार रखे ।

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