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गजब!गरीब के घर राशन नहीं, पर शराब की बोतलें उपलब्ध

लाॅकडाउन में जिन गरीबों के घर नहीं था राशन वह भी नजर आ रहे हैं ठेके पर

राशन की दुकानों की अपेक्षा,ज्यादा भीड़ शराब ठेके पर

वाराणसी, विक्की मध्यानी । कोविड-19 कोरोना वायरस जैसी वैश्विक महामारी से बचने के लिए सरकार ने पूरे देश को लाॅक डाउन घोषित कर दिया।कुछ ही दिनो में  लोगों में हाहाकार मचने लगा कि वह भूखे सो रहे हैं और उनके घरों में जीविकोपार्जन करने के लिए खाद्य  सामग्रीया नहीं रह गई हैं।इस स्थिति में समाजसेवियों से लगायत कई एनजीओ संस्थानों ने जरूरतमंदों के घर खाद्य सामग्रियों सहित भोजन पहुंचाने का कार्य करने लगे।इसके अलावा सरकार भी मजदूर,मजबूर व निराश्रित परिवारों में निशुल्क खाद्यान्न के साथ भोजन की व्यवस्था कराने लगी। यहां तक सरकार ने गरीब मजदूरों के खाते में एक हजार भेजने के साथ,जनधन खाते वालों को भी पाच सौ भेज कर उन्हें राहत पहुंचाने का कार्य किया। जिनके खातों में पहले से हजारों धनराशि उपलब्ध थी,उसके बावजूद सरकार द्वारा सहायता राशि को निकालने के लिए बैंकों पर सोशल डिस्टेंसिंग की धज्जियां उड़ाते रहे। बड़ी बात यह है कि सरकारी या गैर सरकारी लोग जब उनके गांव या मोहल्लो में राशन या भोजन वितरण के लिए जाते थे तो वह गरीबों की कतार में खड़ा होकर राहत सामग्री बड़े चाव से लेते थे। परंतु मानवता को शर्मसार करते हुए ऐसे ही गरीब सोमवार को सुबह से शाम तक सोशल डिस्टेंस की धज्जियां उड़ाते हुए अंग्रेजी व देशी शराब के ठेके पर  खरीदने में जुटे थे। जब उन गरीबों
को लोगों ने शराब के ठेकों पर खरीदेते वह पीते हुए देखा तो वह दांतो तले उंगली दबाने के लिए मजबूर हो गए। लानत है ऐसे झूठे-मक्कार गरीबों पर जो वास्तविक गरीबों के हक पर डाका डाल रहे हैं। सरकार को उच्च स्तरीय जांच कराकर सरकारी सुविधाओं से ऐसे लोगों को वंचित करना चाहिए।शहर से लेकर देहात तक हालात यह है कि जिन गरीबों के घर में बगैर राशन भोजन नहीं बनता था आज ऐसे गरीबों के घर पर शराब की बोतलों की सील टूट रही है।सरकार अर्थव्यवस्था को सुधारने के लिए बीते सोमवार से कुछ जरूरतमंद सामानों के साथ शराब की दुकानों को खोला। शराब की दुकानों पर लोग राशन की दुकानों की अपेक्षा ज्यादा पहले ही लाइन लगाकर सोशल डिस्टेंस की धज्जियां उड़ा कर खड़े थे। आबकारी विभाग का अनुमान था कि प्रदेश की 26 हजार दुकानों से 100 करोड़ रुपए का राजस्व मिलेगा। करीब 40 दिन बाद खुलने वाली दुकानों पर लोग समय से पहले ही पहुंच गए थे जिले के अधिकांश जगह पर सामाजिक दूरी की धज्जियां उड़ी। बाहर हाल सरकार भले ही टूटी हुई अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने की भरपूर कोशिश कर रही है परंतु कोविड-19 जैसे गंभीर वैश्विक बीमारी को बुलाने की दावत भी दे रही है। समय रहते सरकार ने इस पर ध्यान केंद्रित नहीं किया तो पहले के 40 दिनों का लाॅक डाउन व्यर्थ होते हुए कोरोना वैश्विक महामारी कईयों को अपने आवेश में चपेट लेगी।

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