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कोरोना कफ्र्यू: जान है तो जहान

फतेहपुर, शमशाद खान । कोरोना महामारी के दौरान हुए लॉकडाउन में महानगरों से प्रवासी श्रमिकों के पलायन का सिलसिला जारी है। गांव लौटने वाले अधिकतर मजदूर कोरोना संक्रमण फैलने के डर की जगह कामकाज बन्द होने के बाद भूखे मरने से बचने के लिये गांव का रुख कर रहे है। इसे सरकारों की लापरवाही कहा कहें या संवेदनहीनता की हद। अधिकतर मजदूरो
साइकिल से गन्तव्य को जाते प्रवासी।
के पास न तो खाने को राशन है और न ही उसे खरीदने के लिये पैसा। सरकारी दावे हवा हवाई ही साबित हो रहे ही। ऐसे में गांव वापस लौटना ही विकल्प बचता है। किराये तक के लिये पैसा न होने के कारण पैदल व साइकिल का सहारा लेने को मजबूर है। बुधवार को नेशनल हाइवे पर गुनगांव से जौनपुर के लिये एक दर्जन मजदूरों का जत्था साईकिल से गुजरा। भूख प्यास से बेहाल यह मजदूर किसी तरह अपने गांव पहुंचना चाहते हैं। खाने पीने को पूछने पर बताया कि प्रदेश की सीमा पर पुलिस ने लंच पैकेट दिये थे।

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