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अंतर्राष्ट्रीय नर्स दिवस पर विशेष12 मई

हर कोरोना मरीज़ को स्वस्थ कर घर भेजने के संघर्ष में जुटी नर्स रुबीना 
मरीजों को हिम्मत देने के साथ.साथ स्टाफ का भी रख रही ख्याल  
   
बाँदा, के0 एस0 दुबे - सही इलाज देकर मरीज़ को शारीरिक रूप से ठीक करने की जितनी अहमियत एक डॉक्टर की है उतनी ही एक नर्स की देखभाल की भी है। मरीज़ के प्रति नर्स का समर्पण और सेवाभाव उसे कठिन से कठिन रोग से लड़ने की ताकत देती है। जनपद के राजकीय मेडिकल कॉलेज स्थित कोरोना आइसोलेशन वार्ड की इनचार्ज नर्स रुबीना लाल इसकी बेहतरीन मिसाल पेश कर रही हैं। यह उनकी देखभाल का ही असर है कि जनपद के मरीज़ कोरोना से जंग जीतकर घर लौट रहे हैं। रुबीना राजकीय मेडिकल कॉलेज के आइसोलेशन वार्ड का कार्यभार सँभालने वाली पहली नर्स हैं। मूल रूप से मिर्ज़ापुर निवासी नर्स रुबीना ने नवम्बर 2017 में मेडिकल कॉलेज में ओटी इन चार्ज के रूप में कार्य करना शुरू किया था। उनके अच्छे काम को देखते हुए 1 मार्च 2020 से उन्हें कोरोना आइसोलेशन वार्ड की ज़िम्मेदारी दे दी गई। रुबीना बताती हैं दृ शुरुआत में मुझे लगा था कि बाँदा जैसे छोटे शहर में शायद कोरोना दस्तक नहीं दे सकेगा पर जब धीरे.धीरे कई केस आ गए तो हालात बदल गए। मरीजों की सही देख.रेख के साथ ही स्टाफ से लेकर सफाई कर्मचारियों को कोरोना वार्ड में काम करने के लिए तैयार करना भी बड़ी चुनौती थी। पर लगातार प्रयास से सब संभव होता गया। मुख्य रूप से प्राचार्य डॉण् मुकेश यादव ने हमेशा हिम्मत बढ़ाई। साथी स्टाफ नर्स का भी पूरा सहयोग मिला। 
प्राचार्य डॉण् मुकेश यादव का कहना है . रुबीना की बेहतरीन नेतृत्व क्षमताए टीम वर्क और आत्मविश्वास के कारण कोरोना मरीजों के इलाज में बहुत मदद मिली है। उनकी लगन ने अन्य कर्मचारियों को भी प्रोत्साहित किया है। ड्यूटी के बाद क्वारंटाइन की ये उनकी तीसरी साइकिल है। होम क्वारंटाइन के दौरान भी रुबीना फ़ोन के ज़रिये काउन्सलिंग और परामर्श दे रही हैं। रुबीना द्वारा स्टाफ की ट्रेनिंगए विभाग को कोरोना मरीजों की हर अपडेट देने और मरीजों की काउन्सलिंग का ही नतीजा है कि मेडिकल कॉलेज में अब तक भर्ती हुए मरीजों में संक्रमण नियंत्रित करने में सफलता मिली है और लोग स्वस्थ होकर यहाँ से लौट रहे हैं। डॉण् मुकेश यादव बताते हैं कि मरीजों के साथ.साथ रुबीना स्टाफ व अन्य कर्मचारियों को भी संक्रमण से बचाने का पूरा प्रयास कर रही हैं। उन्हें ज़रूरी उपकरणए मास्क व ग्लव्स पहनने और शारीरिक दूरी बनाए रखने के लिए निरंतर प्रोत्साहित करती हैं। मरीजों की सेवा में जुटी रुबीना जनवरी से अपने घर नहीं जा पाई हैं। नर्स एवं मिडवाइफ के योगदान को समर्पित है यह वर्ष दृ डॉण् संतोष गुप्ता  विश्व स्वास्थ्य संगठन के सर्विलांस मेडिकल ऑफिसर डॉण् संतोष गुप्ता बताते हैं . दुनिया भर के नर्सिंग कर्मचारियों की कड़ी मेहनत को सम्मान देने के लिए हर वर्ष 12 मई को दुनिया भर में अंतरराष्ट्रीय नर्स दिवस के रूप में मनाया जाता है। यह इटली की समाज सुधारक और नर्सिंग पेशे की संस्थापक फ्लोरेंस नाइटिंगेल की जन्मतिथि है। इस समय नर्स और अन्य स्वास्थ्य कार्यकर्ता अपनी जान की परवाह किये बिना कोविड प्रबंधन में महत्वपूर्ण योगदान कर रहे हैं। इसलिए विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा इस वर्ष विश्व स्वास्थ्य दिवस ;7 अप्रैलद्ध के अवसर पर इसे ष्नर्स एवं मिडवाइफ का वर्षष् भी नामित किया गया है। 

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