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अहमदाबाद से 1147 प्रवासी मजदूरों को लेकर आयी विशेष ट्रेन

जिले के 651 व शेष बिहार व प्रदेश के अन्य जनपदों के शामिल 
केन्द्र व राज्य सरकार को किराया वसूलने पर जमकर कोसा 

फतेहपुर, शमशाद खान । कोरोना जैसी महामारी को लेकर देश में प्रभावी लाकडाउन के बीच प्रवासी मजदूरों को गैर प्रान्तों से लाने का सिलसिला जिले में शुक्रवार से शुरू हो गया था। यह सिलसिला दूसरे दिन शनिवार को भी जारी रहा। गुजरात प्रांत के अहमदाबाद से 1147 फंसे मजदूरों को लेकर विशेष ट्रेन स्थानीय रेलवे स्टेशन पर जैसे ही रूकी। वैसे ही बोगियों की खिड़की व दरवाजे बंद कराकर एक-एक बोगी से यात्रियों को उतारे जाने का सिलसिला शुरू कर दिया गया। तत्पश्चात प्लेटफार्म पर ही बनाये गये गोलांे में खड़ा कर प्रत्येक यात्री की थर्मल स्क्रीनिंग की गयी। थर्मल स्क्रीनिंग के बाद पानी की बोतल, लंच पैकेट व सूती कपड़े के बने मास्क देकर उन्हें सम्बन्धित बसों पर सवार किया गया। इस खेप में जिले के 651 तथा शेष प्रदेश के अन्य जनपदों के अलावा बिहार के मजदूर शामिल हैं। जनपद के यात्रियों को जहां ब्लाकवार बनाये गये आश्रय स्थलों पर क्वारंटीन के लिए भेजा गया वहीं बाहर के लोगों को उनके जनपदों के लिए सीधे रवाना कर दिया गया। 
स्टेशन पर खड़े प्रवासी मजदूर। 
लाकडाउन में गैर प्रान्तों में मजदूरी करके अपने परिवार का भरण पोषण करने वाले बड़ी संख्या में मजदूर बेरोजगारी के साथ-साथ भुखमरी का दंश झेल रहे थे। कई प्रान्तों के मजदूर तो शुरूआत में बेकारी के चलते पैदल ही अपने घरों के लिए चल पड़े थे। ऐसे में सम्बन्धित राज्य सरकारों ने अपने-अपने राज्यों के मजदूरों को मूल जनपद में बुलाने के लिए रणनीति तैयार की थी। इन मजदूरों को लाने के लिए जहां केन्द्र ने 85 फीसदी व राज्य सरकारों ने पन्द्रह प्रतिशत किराया वहन कर सरकारी खजाने से देने का ऐलान किया था। लेकिन सरकार के इस ऐलान को यहां ट्रेन से पहुंचे मजदूरों ने छलावा बताया और जमकर कोसा। यह भी बताया कि सभी लोगों ने 710 रूपये का टिकट खरीदा है। जिसका भुगतान पेट काटकर हम लोगों ने रेलवे को दिया है। तमाम लोगों ने खरीदे गये टिकट भी मीडिया कर्मियों को दिखाये। शुक्रवार की रात साढ़े आठ बजे साबरमती एक्सप्रेस अहमदाबाद से रवाना हुयी थी। जो स्थानीय रेलवे स्टेशन पर शनिवार को 4 बजकर 49 मिनट पर आ गयी। ट्रेन को प्लेटफार्म पर रेंगते देख सीओ सिटी व रेलवे की ओर से अपनी-अपनी खिड़कियों व दरवाजों को बंद करने का ऐलान किया जाने लगा। प्लेटफार्म पर यात्रियों को बोगीवार उतारा गया और उन्हें मुख्य गेट के द्वार पर रोक कर डाक्टरों के दल ने थर्मल स्क्रीनिंग की। स्क्रीनिंग के बाद सामाजिक दूरी के लिहाज से निकलते हुए प्रत्येक यात्री को परिवार की संख्या के लिहाज से सूती मास्क, लंच पैकेट व पानी की बोतले मुहैया करायी गयीं। इसके बाद जनपद के आये 651 मजदूर व उनके परिवारों को उनके-उनके ब्लाकों की बसों पर सवार कर दिया गया। शेष 496 ऐसे मजदूर भी यहां आये थे जो क्रमशः प्रदेश के अलग-अलग जनपदों के अलावा बिहार प्रान्त के थे। आने वाले यात्रियों में कानपुर नगर के 47, बलिया 65, गाजीपुर 21, आजमगंढ़ 52, देवरिया 38, सिद्धार्थनगर 38, गोण्डा 19 व बस्ती के 20, गोरखपुर के 147 लोग शामिल हैं। इसके अलावा बिहार प्रान्त के छपरा, सिवान व बक्सर के भी 57 यात्री शामिल हैं। इन यात्रियों को बलिया जनपद तक भेजा गया है। इसके बाद बिहार सरकार इन्हें बलिया से उनके जनपदों में भेजे जाने की व्यवस्था करेगी। अपने वतन लौटकर आने वाले श्रमिकों के चेहरे पर खुशी देखी जा सकती थी। तमाम मजदूरों का कहना था कि तालाबंदी हो जाने के चलते उनके मालिकों ने कुछ दिन तो मदद की। इसके बाद अधिकांश लोग भूखों मरने की कगार पर थे। दिन भर में एक आद बार भोजन की व्यवस्था करा दी जाती थी। ऐसे में भुखमरी से निजात पाने के लिए अपने घर वापसी उनकी पहली प्राथमिकता थी। इस मौके पर जिलाधिकारी संजीव सिंह, पुलिस अधीक्षक प्रशांत वर्मा, अपर पुलिस अधीक्षक राजेश कुमार, उप जिलाधिकारी सदर प्रमोद झा, पुलिस उपाधीक्षक नगर कपिल देव मिश्रा के अलावा बड़ी संख्या में पुलिस के अधिकारी व जवान तैनात रहे। पहले दिन के मुकाबले शनिवार को पुलिस के जवानों की संख्या कमतर दिखी। 

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