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शहर ही नहीं परदेश में गरीबों की मदद कर रही समाजसेविका

जो दूसरे प्रदेशों में फंसे हुए भूखे प्यासों की करती है मदद 
लाक डाउन में फंसे लोगों को हर सम्भव पहुंचाती है मदद 
सड़को बस स्टापों अस्पतालों गांवों की बस्ती में पैदल घूम घूम कर बांटती है लोगों का दर्द
  
बांदा, कृपाशंकर दुबे । कोरोना की रोकथाम के लिए जब से लाक डाउन हुआ है देश भर में कोहराम मच गया है। दूसरे प्रदेश में मजदूरी करने गए मजदूरों की हालत इस लाक डाउन में सब से ज्यादा खराब है। देश भर में फंसे इन मजदूरों के पास न काम है न पैसा है। न ही सिर छुपाने की जगह। ऐसे में ये मजदूर भूखे प्यासे बीवी बच्चों के साथ कोरोना की महामारी और शोसल डिस्टेंस की परवाह किये बगैर पैदल ही अपने गांव घर की तरफ चल दिये हैं। लाखों लोग अभी भी दूसरे प्रदेशों में फंसे हुए हैं।
पूरे देश मे जगह जगह इन लोगों के लिए लोग अपने अपने स्तर से मदद कर रहे हैं। लेकिन हम आप को आज एक ऐसी समाज सेविका से मिलाने जा रहे हैं जो बांदा में रह कर बांदा में तो
परदेश से घर लौट रहे लोगों से बातचीत करतीं समाजसेविका
लोगों की मदद कर ही रही हैं साथ ही दूसरे प्रदेशों में फंसे मजदूरों की भी मदद कर रही हैं। इस समाज सेविका के पास यूं तो अपना कोई बजट नहीं है फिर भी ये अपने जज्बे से अपने शहर ही नहीं बल्कि दूसरे प्रदेशों में भी मदद पहुंचा रही हैं। इस समाजसेविका का नाम है शांति पटेल। ये समाज सेविका गांव की बस्ती से लेकर शहर की सड़क बस स्टाप अस्पताल हर जगह पहुंच रही है और लाक डाउन में फंसे भूखे प्यासों को भोजन देने के साथ-साथ उनके लिए इलाज की व्यवस्था प्रशासन के सहयोग से बसों की व्यवस्था करा रही हैं। इतना ही नहीं इन्होंने दूसरे प्रदेशों में फंसे अपने जिले के मजदूरों की मदद करने का नायाब तरीका अपनाया है। दूसरे प्रदेशों में फंसे मजदूर जो अपनी परेशानियों का वीडियो बनाकर शोसल मीडिया में डाल रहे हैं, ये उनसे संपर्क कर के समस्या जानती है फिर अपने प्रदेश के नोडल अधिकारी से बात करती है जब वहां से कोई मदद नहीं होती तो ये उस प्रदेश के अधिकारियों और वहां संचालित एनजीओ के माध्यम से उन मजदूरों तक मदद पहुंचा रही हैं। शांति पटेल की इस मदद से अब तक सैकड़ों लोग लाभान्वित हो चुके हैं, अभी ये मदद का सिलसिल लगातार जारी है।

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