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आये दिन हो रही बूंदाबांदी से किसानों की नींद उड़ी

शनिवार की शाम ओले गिरने से बर्बाद हुयी फसलें
  
फतेहपुर, शमशाद खान । इसे कुदरत का कहर कहा जाये तो इसमें जरा भी अतिश्योक्ति नहीं होगी। क्योंकि अप्रैल के आखिरी दिनों में भी सुबह हो या शाम बूंदाबांदी के साथ ओले पड़ रहे हैं। बूंदाबांदी व ओलों से किसानों की फसलें बर्बाद हो रही हैं। तमाम किसान ऐसे हैं जिनकी गेहूं की फसल अभी कटाई के अभाव में खेतों पर ही खड़ी है। कुदरत के कहर से किसानों की चिन्ताएं बढ़ना स्वाभाविक हैं। शनिवार की शाम को भी जहां शहर में बूंदाबांदी हुयी वहीं बिझौली गांव में ओले पड़ने की खबर मिली है। 
खलिहान में भरे पानी का दृश्य।
शनिवार को भोर में भी बूंदाबांदी हुयी है। जबकि दिन भर तेज धूप के बाद शाम चार बजे बूंदाबांदी के बीच जहां कई स्थानों पर ओले पड़ने की खबरें हैं वहीं बेमौसम बूंदाबांदी से गेहूं की फसल को भारी नुकसान की संभावना है। किसानों का कहना है कि हाड़तोड़ मेहनत व लागत के बाद फसलें तैयार करने के बाद कई वर्षों से कीमत नहीं निकल पा रही है। ऐसे में आये दिन हो रही बूंदाबांदी से होने वाले नुकसान की भरपाई हो पाना मुश्किल है। किसानों ने यह भी कहा कि एक माह से अधिक समय से कोरोना के चलते लाकडाउन में पहले ही आर्थिक रूप से कमर तोड़ दी है। अब ऐसे में दैवीय आपदा भी ओला व बूंदाबांदी के रूप में दिख रही है। 

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