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सरकारी कार्यालय खुले, लेकिन मास्क और सोशल डिस्टेंसिंग से परहेज

बिना मास्क लगाए कार्यालय पहुंचे कर्मचारी 
दफ्तरों के बाहर इक्का-दुक्का फरियादी आए नजर
 
बांदा, के0 एस0 दुबे । लाकडाउन के करीब चार हफ्ते बाद सोमवार को सरकारी कार्यालयों में रौनक तो लौट आई लेकिन सोशल डिस्टेंसिंग और मास्क से काफी हद तक परहेज नजर आया। विकास भवन, कलक्ट्रेट समेत सभी कार्यालयों में रोस्टर के मुताबिक कर्मचारी कार्यालय पहुंचे। कुछ सरकारी कार्यालयों में अफसरों के चेहरों से मास्क गायब था। अफसर और कर्मचारी सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करना भी भूल गए। कम स्टाफ के सहारे कार्यालयों में सामान्य कामकाज का संचालन शुरू हो गया। करीब एक महीने घर में बंद रहने के बाद कोरोना के माहौल में दफ्तर खुलने का असर कर्मचारियों के घरेलू माहौल पर पड़ा। 
सरकारी कार्यालय में बिना मास्क के बैठे अधिकारी कर्मचारी
कोरोना वायरस संक्रमण के मद्देनजर 24 मार्च से जिला लाकडाउन है। इससे सरकारी, निजी दफ्तर से लेकर अन्य प्रतिष्ठान बंद है। लगभग चार हफ्ते के बाद प्रदेश सरकार के निर्देश पर सोमवार को सभी सरकारी दफ्तर खुले। विकास भवन स्थित डीआरडीए के कंप्यूटर कक्ष, समाज कल्याण विभाग, सीडीओ कार्यालय, डीडीओ कार्यालय, जिला कार्यक्रम अधिकारी कार्यालय में कर्मचारी- अधिकारी आए थे, हालांकि कई विभाग में ताला लटका मिला। यहां स्थित कुछ कार्यालयों में अफसरों के चेहरों से मास्क गायब था। अफसर और कर्मचारी सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करना भी भूल गए। बेसिक शिक्षा अधिकारी कार्यालय में भी कम संख्या में कर्मचारी आए। इसी तरह जिला विद्यालय निरीक्षक, डीएसओ, जिला खाद्य विपणन अधिकारी, जिला उद्यान अधिकारी के दफ्तर भी खुले। काफी दिनों बाद दफ्तर खुले या कोरोना वायरस का डर लेकिन पहले दिन फरियादियों की संख्या नाममात्र की ही दिखी। अफसरों का कहना है कि लॉकडाउन के कारण और वाहनों का संचालन ठप होने से अधिकतर लोग घरों से बाहर नहीं निकल रहे हैं। शुरूआत में दफ्तरों में भीड़ आना भी ठीक नहीं है। धीरे-धीरे व्यवस्था पटरी पर आएगी।

सोशल डिस्टेंसिंग का पालन भूले अफसर
बांदा। लाकडाउन के लगभग चार सप्ताह बाद सोमवार को दफ्तर खुल गए। अधिकारियों संग एक तिहाई कर्मचारी ड्यूटी पर भी पहुंचे। कुछ विभागों को छोड़ दिया जाए तो अधिकतर कार्यालयों में फरियादी ही नहीं दिखे। अधिकारी आगामी तैयारी को लेकर मंत्रणा करते दिखे। वहीं कुछ विभागों में अफसर और कर्मचारी सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करना भूल गए।
चेहरों से मास्क भी नदारद मिला। टोकने पर सफाई दी कि अभी ही चेहरे से मास्क हटाया है। सोशल डिस्टेंसिंग का पालन न होने पर कहा कि विकास भवन के कमरे छोटे हैं। जितनी जगह है उतने में ही काम चला रहे हैं।

नहीं उपलब्ध कराए गए सैनिटाइजर
बांदा। लाकडाउन के बाद सरकारी कार्यालय खुलने के बाद भले ही रौनक लौट आई हो लेकिन कार्यालयों में प्रदेश सरकार द्वारा जारी की गई गाइड लाइन की जमकर धज्जियां उड़ रही
कलेक्ट्रेट में बाकायदा मास्क लगाए नजर आए कर्मचारी और पुलिस कर्मी
हैं। हैरत की बात है कि कार्यालय आने वाले कर्मचारियों को विभाग की ओर से उन्हें सैनिटाइजर और मास्क भी नहीं उपलब्ध कराए गए। ज्यादातर कर्मचारियों ने मास्क और सैनिटाइजर की खुद ही व्यवस्था की है। विभाग की तरह से न तो उन्हें मास्क उपलब्ध कराए गए और न ही सैनिटाइजर। इसे लेकर कर्मचारियों में रोष है। 

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