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तेज आंधी में फसलें चौपट, गरीबों की उड़ीं झोपड़ियां

बारिश, ओलावृष्टि और आंधी से कराह उठा किसान 

नरैनी, के0 एस0 दुबे। बेमौसम हुई अतिवृष्टि और ओलावृष्टि ने आम लोगों का निवाला और मवेशियों का चारा तहस-नहस कर दिया। डेढ़ घण्टे तक चले तेज तूफान और वर्षा ने खेतों में कटी पड़ी फसलों के साथ गरीबों की झोपड़ियां भी उड़ा दी है। रविवार शाम लगभग साढ़े सात बजे अचानक तेज तूफान के साथ वर्षा तथा ओलावृष्टि शुरू हो गई। यह लगभग डेढ़ घण्टे तक अनवरत जारी रहा। ज्यादातर बड़े किसानों की रबी की फसलें खेतों में कटी पड़ी थीं जो ओला वृष्टि तथा तेज तूफानी वर्षा से तबाह हो गई हैं। साथ ही जानवरों के लिये लगभग 90 प्रतिशत क्षेत्रीय किसानों का भूसा खेतों में ही पड़ा था जिसका अधिकतर
इस तरह फसल और घास दोनो हुईं बर्बाद
हिस्सा या तो उड़ गया है या खराब हो गया है। तहसील क्षेत्र के बहेरी गांव के महाप्रसाद दीक्षित की लगभग 30 बीघे की गेहूं की फसल, सहेवा निवासी कैलाश मिश्र की 8 बीघे की फसल, तरखरी निवासी नंदकिशोर पाठक की 12 बीघे की गेहूं की फसल, मोतियारी गांव के वृजगोपाल की 10 बीघे की फसल, पोंगरी गांव के सुमत द्विवेदी की 6 बीघे की रबी की फसल, भाजपा नेता अशोक कुशवाहा की 4 बीघे तथा पचोखर गांव के प्रेम नारायण उपाध्याय, शिरोमणि उपाध्याय तथा सुशील सहित क्षेत्र के सैकड़ों किसानों की फसलें खेतों में या तो कटी पड़ी थीं या थ्रेसिंग के लिये ढेर लगी रखी थीं। इस दैवीय प्रकोप से मिट्टी में मिलकर तबाह हो गई हैं। तूफान इतना तीव्र था कि क्षेत्र के सैकड़ों पेड़़ जड़़ से उखड़ गये हैं। तहसील प्रांगण में बने अधिवक्ताओं के बस्तों के ऊपर गुलमोहर का पुराना भारी-भरकम पेड़ गिर जाने से तहसील कार्यालय का रास्ता अवरुद्ध हो गया। उधर अतर्रा मार्ग में पड़मई गांव के पास एक विशाल वृक्ष उखड़ जाने के कारण मुख्य मार्ग अवरुद्ध हो गया। क्षेत्र में आम के छोटे-छोटे फलों तथा महुआ के फूलों का भारी नुकसान हुआ है।

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