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लाक डाउन के एक माह पूरे, तमाम सपने रह गए अधूरे

 
शहर के तमाम लोगों की शादियां मजबूरन रद्द करनी पड़ गई
वर और वधू पक्ष के लोगों का हजारों रुपया हो गया बर्बाद 
तीन मई के बाद भी लाक डाउन खुलने के आसार बहुत कम 

बांदा, के0 एस0 दुबे । गुरुवार से लाक डाउन के एक माह पूरे हो गए। इस दौरान हजारों लोगों के तमाम सपने अधूरे रह गए। देखा जाए तो जनपद की तकरीबन एक सैकड़ा शादियां मजबूरन रद्द करनी पड़ गईं। इतना जरूर हुआ कि वर और वधू पक्ष के लोगों द्वारा शादी की तैयारियों में हजारों रुपया खर्च जरूर हो गया। मैरिज हाल भी बुक कराए गए थे, उनका भी एडवांस वापस कर दिया गया है। चूंकि आगामी तीन मई के बाद भी लाक डाउन खुलने के आसार कम नजर आ रहे हैं, अगर खुला भी तो सख्ती पूरी तरह से बरकरार रहने की संभावना है। ऐसे में शादी विवाह के अलावा अन्य जरूरी कार्यों को फिलहाल लंबे समय के लिए टाल दिया गया है। इधर, लाक डाउन के 30वें दिन गुरुवार को रोज की तरह चैराहों पर पुलिस तैनात रही है लोगों को रोकती टोंकती रही। लेकिन लाक डाउन से आजिज आए लोग अब पुलिस को भी चकमा देते नजर आ रहे हैं। 
बीती 25 मार्च को नवरात्र के पहले दिन से ही 21 दिवसीय लाक डाउन प्रधानमंत्री की ओर से लागू किया गया था। 14 अप्रैल तक लाक डाउन की अवधि थी। लोगों ने आसरा लगा लिया था कि 15 अप्रैल से वह आजादी के साथ कहीं भी आज सकेंगे, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तमाम विषम परिस्थितियों का हवाला देते हुए और जनता की जान बचाने की दुहाई देते हुए 19 दिन का लाक डाउन और लागू कर दिया गया। लाक डाउन पार्ट-2 के लागू होते ही लोगों की रही-सही उम्मीदों पर पानी फिर गया। जिले के तकरीबन एक सैकड़ा से
सड़क पर पसरा सन्नाटा
ज्यादा वैवाहिक कार्यक्रमों को लोगों ने रद्द कर दिया। हजारों और लाखों रुपया शादी की तैयारियों में बर्बाद हो गया। तमाम परिवारों ने अपने बेटों और बेटियों की शादी के लिए कार्ड भी वितरित कर दिए थे, सब कुछ सरेंडर हो गया। अब लाक डाउन पार्ट-2 का जो यह सिलसिला जारी है, वह तीन मई तक लागू है। जो हालात वर्तमान समय में नजर आ रहे हैं और केंद्र व प्रदेश सरकारों के द्वारा जिस तरह से कोरोना वायरस संक्रमण की साइकिल को तोड़ने के लिए तेजी से काम किया जा रहा है, उससे लोगों को यह आभास होने लगा है कि अभी तीन मई के बाद भी लाक डाउन खत्म होने के कोई आसार नहीं है। इसके चलते लोगों ने शादी विवाह और अन्य जरूरी कार्यों को लंबे समय के लिए टाल दिया है। इधर, बुधवार को लाक डाउन के 30वें दिन भी चैराहों पर पुलिस तैनात रहकर अपने फर्ज की अदायगी करती रही। पब्लिक है कि अब लाक डाउन से आजिज आकर घर से बाहर निकलने लगी है। घर में रह-रहकर लोग परेशान हो गए हैं और पुलिस को चकमा देकर आवागमन कर रहे हैं। 

आफत गरीबों की, दाम है नहीं, काम भी ठप 
बांदा। लाक डाउन पार्ट-2 के दिन गिन रहे गरीबों के सामने अब रोटी का संकट मंडरा रहा है। शासन की ओर से जो योजनाएं संचालित की जा रही हैं, वह गरीबों का पेट भर पाने में नाकाफी साबित हो रही हैं। कोटेदारों द्वारा जो राशन का वितरण किया जा रहा है, वहां मनमानी की जा रही है। गरीबों के पास जो भी थोड़ा बहुत रुपया था, वह भी खर्च हो गया। राशन
हाट स्पाट के दायरे में आई बाजार में बंद दुकानें
सामग्री, सब्जी और किराना का सामान तक महंगे दामों में बिक रहा है। शासन और प्रशासन दावे जरूर कर रहा है, लेकिन उसके आदेश का एक भी असर बाजार और दुकानदारों के यहां नजर नहीं आ रहा है। हालात बहुत ही बदतर हो चले हैं, अधिकारी भले ही अपनी पीठ थपथपा रहे हों, लेकिन गरीब अपना पेट नहीं भर पा रहा है, इसका कारण कि उसके पास रुपया नहीं है। अगर सामग्री खरीदना है तो रुपया का होना बहुत ही आवश्यक है। कुल मिलाकर गरीबों की अब आफत हो गई है। 

नाम की जनता सेवा, हकीकत में हो रही मनमानी 
बांदा। प्रशासन की ओर से शहर में कई जनता सेवा वाहन संचालित किए गए हैं। प्रशासन का दावा था कि जनता सेवा वाहन में आवश्यक सामग्री की बिक्री सस्ते दामों पर की जाएगी। लेकिन अफसोस कि ऐसा नहीं हो रहा है। जनता सेवा वाहन में रेट लिस्ट का कागज चस्पा है, लेकिन वह महज देखने के लिए है। सब्जी से लेकर अन्य सामान तक महंगे दामों में बेचा जा रहा है। जनता सेवा वाहन में तैनात कर्मचारियों का कहना है कि अगर जनता सेवा वाहन से सामग्री की खरीददारी करनी है तो उनके रेट के हिसाब से खरीदनी होगी, वाहन पर चस्पा रेट लिस्ट का कोई मायने नहीं है। महंगे दामों में बेचकर जनता सेवा वाहन में तैनात कर्मचारी जनता को परेशान कर रहे हैं। हालात बहुत ही गड़बड़ हैं। खास बात तो यह है कि जिले के आला अधिकारी इन जनता सेवा वाहन का कभी आकस्मिक निरीक्षण भी नहीं करते हैं और आकस्मिक छापामार कार्रवाई की जाए तो असलियत सामने आ जाएगी। 
पुलिस कर्मियों ने गरीबों को वितरित किए लंच पैकेट
 
तंबाकू के लिए तड़प रहे बुंदेले, दुकानदार हो रहे मालामाल 
बांदा। सूबे की सरकार ने भले ही गुटखा निर्माण और उसकी बिक्री पर लाक डाउन के दौरान प्रतिबंध लगा दिया हो, लेकिन तंबाकू के लती हो चुके बुंदेले ऐसे तड़प रहे हैं, जैसे पानी बिना मछली तड़पती है। मसलन गुटखा डंप किए दुकानदार जमकर चांदी काट रहे हैं। 5 रुपया वाला गुटखा 10 रुपए में, 10 रुपया वाला गुटखा 20 रुपए और 20 रुपया वाला गुटखा 40 से 50 रुपए में बेचा जा रहा है। पब्लिक है कि गुटखे का एक-एक पाउच पाने के लिए परेशान है, मारामारी पर उतारू हो रही है। तमाम छोटे और बड़े दुकानदार मनमानी कीमत पर डंप गुटखा की बिक्री कर रहे हैं। जिला प्रशासन के अधिकारी और पुलिस प्रशासन इस तरफ कोई ध्यान नहीं दे रहा है। किराना की दुकानों से प्रतिबंधित गुटखे की मनमाने दर पर बिक्री हो रही है। 

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