Latest News

धर्म के नाम पर आतंक फैलाना ..................

देवेश प्रताप सिंह राठौर 
वरिष्ठ पत्रकार

आज भारत देश में इतना ज्यादा कोरोना वायरस के संबंध में परेशान हैं लेकिन कुछ जो देश में रहते हैं और पाकिस्तान अफगानिस्तान और बांग्लादेश की सोचते हैं ऐसे इस देश में गद्दार भरे पड़े हैं इन गद्दारों के कारण आज देश परेशानियों से ग्रस्त है चाहे कश्मीर का मसला हो चाहे देश से संबंधित कोई आतंकवादी हमला हो हर जगह आपको यह तत्व पाए जाएंगे भारत की आजादी के बाद पाकिस्तान-भारत बटा जाति के आधार पर मुस्लिम राष्ट्र पाकिस्तान हुआ वहां पर कुछ हिंदू लोग भारत में विलय नहीं हुए और लोगों को वहां पर आज क्या दुर्गत हुई है पूरा विश्व के साथ पूरा भारत देश ने देखा है हमारा देश जितना अच्छा है यहां पर आतंकवादियों को भी उसे यहां के गद्दार पालते हैं और देश का नुकसान करने में रहते हैं चाहे देश की बात हो राष्ट्र हित की बात हो परंतु यह कॉम अपना अलग ही राग लगती है आज जमाती लोगों ने जिस तरह से कोराना वायरस को फैला दिया है उससे सिद्ध होता है कि यह पाकिस्तान के आतंकवादी संगठन के हाथ उसे बिके हुए हैं मैं विश्वास के साथ कह सकता हूं चाहे सरकारें इनको जितनी सुविधाएं प्रदान करें लेकिन यह सुधरने वाले नहीं है जिस तरह से पूरा देश घर के अंदर बैठा हुआ है डॉक्टर नर्स पैरामेडिकल पुलिस प्रशासन रोडो पर टहल रहा  है ।अस्पतालों में इलाज कर रहे हैं उन पर जिस तरह से अभद्रता की गई इन लोगों द्वारा इनका इतिहास हमेशा खराब रहा है क्योंकि यह पढ़े-लिखे कम होते हैं इन लोगों का एक ही टारगेट होता है किस तरह किस मजहब को नुकसान पहुंचाया जाए मुगल शासक मैं जब मुगलों का राज होता
था उस समय मुगलो इस तरह से व्यवहार वारदातें करते थे चाहे धर्म के नाम पर हो जाति के नाम पर हो वही धारणा आज इन लोगों की बनी हुई है तबलीग जमात के लोग जो मस्जिदों मदरसों में रहते हैं इनका पूरा नेटवर्क रहता है यह पूरा विश्व स्तर से इनका कार्य होता है और इनकी जड़ें मस्जिदों में मदरसों में इनका अड्डा रहता है यह लोग धर्म के नाम पर गलत तरीके से उपत्रों आतंक फैलाने का काम करते हैं। कुछ इतिहास के पन्नों पर जाते हैं इसे आप देखें और समझे। इससेआधुनिक अफ़गानिस्तान के इलाके में (जो उस समय अब्बासी सासन का अंग था) गजनी का महमूद शक्तिशाली हो रहा था। इस समय तक इस्लाम का बहुत प्रचार भारतीय उपमहाद्वीप में नहीं हो पाया था। ग्यारहवीं सदी के अन्त तक उनकी शक्ति को ग़ोर के शासकों ने कमजोर कर दी थी। ग़ोर के महमूद ने सन् 1192 में तराईन के युद्ध में दिल्ली के शासक पृथ्वीराज चौहान को हरा दिया। इस युद्ध के अप्रत्याशित परिणाम हुए। गोरी तो वापस आ गया पर अपने दासों (ग़ुलामों) को वहाँ का शासक नियुक्त कर आया। कुतुबुद्दीन ऐबक उसके सबसे काबिल गुलामों में से एक था जिसने एक साम्राज्य की स्थापना की जिसकी नींव पर मुस्लिमों ने लगभग 900 सालों तक राज किया। दिल्ली सल्तनत तथा मुगल राजवंश उसी की आधारशिला के परिणाम थे।तीसरे खलीफा उथमान ने अपने दूतों को चीन के तांग दरबार में भेजा था। तेरहवीं सदी के अन्त तक इस्लाम इंडोनेशिया पहुँच चुका था। सूफियों ने कई इस्लामिक ग्रंथों का मलय भाषा में अनुवाद किया था। पंद्रहवीं सदी तक इस्लाम फिलीपींस पहुँच गया था। आज पूरा भारत सभी जाति धर्म के लोग कोरोना वायरस से परेशान हैं वहीं पर आप टीवी चैनलों में अन्य माध्यमों से देखते होंगे किस तरह मुस्लिम समुदाय देश के डॉक्टरों पर पुलिस वालों पर और सरकार के नियमों का पालन ना करते हुए आतंक का रूप धारण किए हुए हैं। इन्हें आप क्या देशभक्ति कह सकते हैं मुझे नहीं लगता है सरकारें चाहे जितना भी इनके लिए कुछ करें यह कभी भी देश हित में नहीं हो सकते मैं सब की बात नहीं करता हूं लेकिन अधिकांश लोग गलत रास्ते पर चलकर देश का नुकसान करते रहते हैं और पाकिस्तान की भाषा हिंदुस्तान में रहकर बोलते हैं ऐसे लोगों को देश के गद्दार के रूप में इन्हेंकानून के तौर पर सख्त से सख्त सजा देते हुए इन्हें इस देश में रहने का अधिकार नहीं होना चाहिए।

No comments