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संकट में कोइलिहाई के कोल आदिवासी

लकड़ी बेंच करते थे जीविकोपार्जन, नहीं पहुंच रही कोई मदद

चित्रकूट, सुखेन्द्र अग्रहरि। लाक डाउन के समय जहां एक ओर जिला प्रशासन गरीबों को राशन सामग्री व भोजन की व्यवस्था करने का दावा करता है वहीं दूसरी ओर पाठा के ग्रामीण इलाकों की जनता के बीच किसी जिम्मेदार ने पहुंचने की जहमत नहीं उठा रहे। मानिकपुर तहसील के ग्राम पंचायत माराचंद्रा के ग्राम कोइलिहाई में ऐसा ही मामला देखा जा सकता है। जहां अभी तक प्रशासनिक अधिकारियों ने न ही ग्रामीणों को खाद्य सामग्री पहुंचाई और न ही भोजन वितरण कराया गया। ग्रामीणों का कहना है कि उनके पास सिर्फ लकड़ी बेचने का काम है। ट्रेनें बंद होने से वह भी ठप हो गया। ऐसे में रोजीरोटी का संकट खड़ा है। 
राहत की आस में ग्रामीण।
गौरतलब हो कि देश में लॉक डाउन से गरीब तबका खासा परेशान हो चुका है। पाठा के ग्राम कोइलिहाई की कोल आदिवासी महिला उजी देवी, बलिया, सोहनी, रामकुमार, बिंजो देवी आदि ग्रामीणों ने बताया कि लकड़ी बेंच कर भरण-पोषण करते हैं। लाक डाउन के बाद भोजन के लाले पड़े हैं। बताया कि अभी तक इस गांव में कोई जिम्मेदार अधिकारी नहीं आया है। जिससे उन्हें खाद्यान्न व लंच पैकेट मुहैया नहीं हो रहा। भुखमरी की कगार पर है। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि तहसीलदार को फोन पर सूचना भी दी थी। बावजूद इसके कोई ध्यान नहीं दिया गया। बताया कि अभी तक खाता में धनराशि नहीं आई है। इसके साथ ही गांव में पानी की विकराल समस्या है। उन्होंने बताया कि कोसों दूर से पानी का इंतजाम कर प्यास बुझाते हैं।

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