Latest News

प्रकृति से खिलवाड़ पर किया प्रतिकार: नवलेश

कोराना से सुरक्षा को सरकार के आदेशों का करें पालन

चित्रकूट, सुखेन्द्र अग्रहरि। धर्मनगरी के खोही स्थित भागवत पीठ के संस्थापक भागवताचार्य नवलेश दीक्षित ने कहा कि वास्तव में प्रकृति ने मनुष्य को बता दिया है की वह कोई अबला नहीं, जिससे बलात्कार कर भाग सकोगे। प्रकृति प्रतिकार करगी और भागने का विकल्प न होगा। मौजूदा दौर में विश्व में महाशक्ति होने का दंभ भरने वाले अपनी पूरी ताकत लगाने के बाद असमर्थ हैं। तब तीसरी दुनिया के देश भारत ने अपनी परंपरा और रूढ़ियों में जीने का संभल ढूंढा है। शौच अशौच की सदियों पुरानी पद्धति प्रासंगिक हो उठी है। अस्पृश्यता अप्राकृतिक रूप से ही सही व्यवहार हो गई है। दिनचर्या में आवश्यक, अनावश्यक के अंतर की पहचान होने लगी है। मानव संकट में है और ऐसे संकटकाल में अपनी संभावनाएं बुन रहे हैं। उन्होंने कहा
आचार्य नवलेश दीक्षित।
कि राष्ट्र के मूल्य पर जागो। मरने वालों को देखो। जीवन का मूल पहचानो। उपयोगी व सार्थक बनो। लॉक डाउन का पालन करो। महामारी ने भौतिक विकास झुठलाते हुए जीवन को अधिक मूल्यवान और संरक्षण इति सिद्ध कर दिया है। मनुष्य होने के नाते सरकार के आदेश का सही पूर्वक पालन करना चाहिए। पूरा विश्व आज अपनी स्मृति की सबसे कठिन परिस्थिति से जूझ रहा है। कोरोना संक्रमण की इस वैश्विक आपदा ने मानव विकास की नई चमकीली परते उधेड दी है और सभ्यता की कलाई से ढकी हुई। वैज्ञानिक, अनुसंधानकर्ता और धन को हथियार की तरह प्रयोग करने वाले विकसित देश फिर से धरती में ही जीवन के साधन ढूंढ रहे हैं। प्रकृति का दण्ड दिखाई नहीं देता। पेड़ों, पहाड़ों को काटा, धरती में सुरंग, नदियों को दूषित किया अपने सुख के लिए। इसीका परिणाम आज पूरा विश्व भुगत रहा है। इसलिए सहजता व समन्वय चुनो। व्यक्तिवाद की बीमारी से बचकर समष्टि का अंग बनो। तभी स्वस्थ रह पाएंगे। परिवार सुरक्षित होगा। यह महामारी अभिशाप न बन जाए, सावधान हो जाएं। दूरी बनाकर रहे। घर में रह कर स्वस्थ रहें और ईश्वर भजन करें।

No comments