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लाक डाउन की आड़ में पान मसालों की कालाबाजारी

190 रुपए में मिलने वाली राजश्री 400 रुपए तक पहुंची

के0एस0दुबे बाँदा-- कोरोनावायरस महामारी के बीच मामले को नियंत्रित करने के लिए देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी व उ0प्र0 के मुख्यमंत्री ने किसी प्रकार की खाद्य वस्तुओं पर कालाबाजारी करने पर कानूनी कार्रवाई करने का आदेश दिया है।सरकार द्वारा घोषित यह लाक डाउन पहले इसे 14 अप्रैल तक लागू किया गया था और अब नएआदेश के अनुसार तीन मई तक लाक डाउन जारी रहेगा। इस भारी लाक डाउन का भरपूर फायदा उठाने में पान मसाला के बड़े कारोबारी पूरे तन मन से लग गये हैं। यही वजह है कि 25 मार्च के पहले बीस रुपए वाली जिस राजश्री का एक पैकेट 190/ रुपए में मिलता था वह अब 400/ रुपए तक पहुंच गया है। लाक डाउन की आड़ में अचानक पान मसाले की कालाबाजारी को अंजाम तक पहुंचाने का महाभियान तेज कर दिया गया है। वाहन और आवागमन की
सुविधा बंद होने का हवाला देते हुए मनचाहे दामो पर पान मसाला बेंचा जा रहा है। पान मसाला का कारोबार करने वालों ने अचानक सभी कंपनियों के पान मसाले की कीमत को मनमानी के साथ बढ़ा दिया है, यही वजह है कि छोटी और बड़ी दुकानों में लोगों को दस रुपए वाली राज श्री , विमल सहित अन्य पान मसालों को डंके की चोट पर बेंचा जा रहा है। बीस रुपए वाली राजश्री और विमल को 40-40 रुपए तक खुलेआम बेंचा जा रहा है। जिससे लोग लगातार परेशान हो रहे हैं। जिला प्रशासन और पुलिस का पूरा जोर लाक डाउन सफल बनाने में लगा हुआ है, इसलिए पान मसाला की होने वाली कालाबाजारी पर जिला प्रशासन कोई जोर नहीं दे पा रहा है। बाँदा शहर मुख्यालय में पान मसालों के जितने भी बड़े कारोबारी हैं वे दुगने और चौगने दाम पर फुटकर दुकानों को विभिन्न कंपनियों के पान मसाला बड़े अहसान के साथ उपलब्ध करवा रहे हैं। बाँदा शहर से लेकर जिले के गांव गांव तक पान मसालों की कालाबाजारी को अंजाम दिया जा रहा है। 

जिला प्रशासन का कारोबारियों पर नहीं है कंट्रोल
लाक डाउन की वजह से लोगों के खाने पीने की चीजों के दाम अपने आप बढ़ा दिए गए हैं। जबकि प्रर्याप्त माल ट्रकों के माध्यम से कारोबारियों तक पहुंच रहा है। सूत्रों ने बताया कि बाँदा मंडल मुख्यालय से लेकर जिले के अतर्रा,नरैनी, कालिंजर,करतल, बदौसा,बबेरू,कमसिन,बिसंडा,तिंदवारी ,चिल्ला,पैलानी, जसपुरा, मटौंध सहित प्रत्येक गांव व कस्बे में तमाम प्रतिबंध के बावजूद काले कारोबार को अंजाम दिया जा रहा है। वैसे भी कारोबारियों पर जिला प्रशासन का कभी कोई कंट्रोल नहीं होता है। यदि समय रहते पान मसाला कारोबारियों पर नकेल नहीं कसी गई तो आने वाले दिनों में और हालत खराब हो जाएंगे,परिणामतः जहर बेचने का ये काला कारोबार और काला हो जाएगा।

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