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प्रवासियों का लगातार आना जारी, जनपद में कोरोना संक्रमण का बढ़ा खतरा

बार्डर के जिले कोरोना संक्रमित, लापरवाही पड़ सकती भारी 
   
फतेहपुर, शमशाद खान । कोरोना महामारी कोविड के संक्रमण से दुनियां के सभी देश परेशान है और महामारी की मुक्ति के लिये ईश्वर के बाद चिकित्सको के ही भरोसे है। कोरोना के कहर से बचने के लिये सरकार द्वारा लॉक डाउन करके लोगो को घरो में ही रहने को कहा गया है। लॉकडाउन के बाद महानगरो में कामकाज करने गये लोगों का लगातार वापस लौटना जारी है। वापस लौटने वाले प्रवासियों में महाराष्ट्र गुजरात व दिल्ली समेत कई प्रान्त के लोग शामिल है। इन प्रदेशो में कोरोना महामारी भयंकर रूप धारण कर चुका है। बीमारी की चपेट वाली जगह से लोगो की इस तरह वापसी अब तक कोरोना से मुक्त रहे जनपद के लिये खतरे की घण्टी है। कोरोना वायरस के संक्रमण को देश के अन्य स्थानों तक फैलने से रोकने के लिये सरकार द्वारा 14 मार्च तक लॉकडाउन लगाया गया था। जिसकी अवधि पूरी होने के बाद 15 मार्च से तीन अप्रैल तक लॉकडाउन को बढ़ा दिया गया। कोरोना से देश के लोगो को बचाने के लिये लॉकडाउन लगाने के बाद जनपद की सीमाएं सील कर दी गयी हो लेकिन कामकाज बन्द होने व खाने पीने की समस्याओ से ग्रसित होकर प्रवासी श्रमिको का पैदल, जंगल के रास्तों के
प्रवासी मजदूर।
अलावा आवश्यक सामग्रियों के ट्रको में चोरी छिपे आना जारी है। महानगरों से निकलकर गांव की ओर आ रही श्रमिको की भीड़ अपने साथ कोरोना संक्रमण को ला सकती हैं। जो अब तक ग्रीन जोन में शामिल रहे जनपद के लिये भयवाह साबित हो सकती है। प्रशासन द्वारा आने वाले इन प्रवासी मजदूरों को रोककर स्वास्थ जाँच कराये जाने के बाद जनपद में अलग अलग जगह क्वारन्टीन किया जा रहा है। 14 दिन तक रखने के बाद लोगो को इनके जिलों में भेजा जाना हैं। जनपद में प्रवासियों की लगतार आमद होने व क्वारन्टीन किये जाने के कारण अब तक कोरोना संक्रमण से अछूते रहे जनपद पर भी कोरोना संक्रमित होने के संकट के बादल मंडराना शुरू हो गये है। ट्रकों में छिपकर आने वाले इन प्रवासियों द्वारा रास्ते में कितनों को संक्रमित कर दिया गया इसका अंदाजा भी नही लगाया जा सकता। रोकने व जांच करने के लिये सीमा पर तैनात पुलिस कर्मियों के पास भी कोई पीपीई किट तक नहीं होती। ऐसे में उन्हें भी संक्रमित होने का खतरा हो सकता है। कई जनपदों में पुलिस कर्मियों के संक्रमित होने के बाद भी पुलिस प्रशासन की आंख नही खुली। निगरानी के लगे पुलिस कर्मियों के पास एन-95 मास्क तो दूर की बात है साधारण मास्क तक नही है। इनकी जांच के बाद करने वाले चिकित्सको तक के पास भी सुरक्षा किट नही है। ऐसे में प्रवासियों की आने वाली भीड़ कोरोना का कहर बनने का एक बड़ा कारण बन सकती है।

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