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रेडजोन एरिया के खुले मेडिकल स्टोरों पर डीएम का छापा

कई मेडिकल स्टोर संचालक दुकानें खुली छोड़कर भागे
हो सकती है कई मेडिकल स्टोर संचालकों पर कार्यवाही

उरई (जालौन), अजय मिश्रा । गत दिवस चिकित्सा दंपत्ति के कोरोना पाॅजीविट मिलने के बाद जिला प्रशासन द्वारा आनन-फानन में नगर के मानचित्र में रेखांकित कर रेडजोन एरिया घोषित कर उसकी फोटो सोशल मीडिया पर वायरल करायी थी। इसके बाद रविवार को रेडजोन ही नहीं बल्कि समूचे नगर में सभी प्रकार की दुकानें बंद करा दी गयी थी। लेकिन सोमवार को रेडजोन क्षेत्र के ज्यादातर मेडिकल स्टोर खुले होने ही सूचना मिलते ही जिलाधिकारी ने अंबेदकर तिराहे से लेकर मच्छर चैराहा पर स्थित मेडिकल स्टोरों पर छापामार कार्रवाई की तो मेडिकल संचालकों में हड़कंप मच गया तो कई मेडिकल स्टोर संचालक अपनी दुकानों को खुला छोड़कर इधर उधर भागते नजर आये। इसी के साथ जिलाधिकारी ने राजकीय मेडिकल कालेज, सदर कोतवाली, जिला अस्पताल का भी निरीक्षण कर व्यवस्थाओं का जायजा लिया।
उल्लेखनीय हो कि चिकित्सक दंपत्ति में कोरोना की पुष्टि के बाद जिला प्रशासन द्वारा जिस तरह से रेडजोन ऐरिया घोषित किया गया था उनमें मेडिकल चैराहा, डीएफओ दफ्तर, डीवीसी कालेज,  कोंच बस स्टैंड, जिला परिषद आदि क्षेत्रों को शामिल किया गया था। इसके बाद इन स्थानों पर बैरियर लगवाकर पैदल व वाहनों की आवाजाही पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगा दिया गया था। रविवार को अवकाश का दिन होने से बैंक कार्यालय तो नहीं खुले थे। लेकिन ऐसे हाॅटस्पाट में आने वाली बैंक शाखाओं में पूरी तरह से तालाबंदी रहीं। लेकिन दूसरे दिन हाॅटस्पाट एरिया के ज्यादातर मेडिकल स्टोर खुल जाने की जानकारी जिलाधिकारी डा. मन्नान अख्तर तो पता चली तो वह स्वयं ही हाॅटस्पाट एरिया का भ्रमण करने आ धमके जहां उन्हें मेडिकल स्टोर खुले मिलने पर उन्होंने मेडिकल स्टोर संचालकों को कड़ी चेतावनी दी। देर शाम तक हाॅटस्पाट क्षेत्र के मेडिकल स्टोरों में ताला लटकता रहा तो वहीं जो परचूनी की दुकानें खुल जाती थी वह भी हाॅटस्पाट एरिया में होने की वजह से दूसरे दिन भी नहीं खुली। जिससे ऐसे व्यक्तियों के चेहरे पर मायूसी दिखी जो किसी तरह से हर रोज खाद्य पदार्थों की खरीदारी कर अपने परिवारों का भरण पोषण करते चले आ रहे थे। तो उधर जिला प्रशासन द्वारा नगर में कई स्थानों को रेडजोन घोषित कर जिला मुख्यालय में 32 लेखपालों के नंबर व नामों की सूची जारी की है जो दवाओं के साथ-साथ सब्जी व अन्य खाद्य सामग्री की आपूर्ति लोगों के आवासों तक करंेगे लेकिन इसमें भी मूल्यांे का निर्धारण किया गया है जो मध्यम वर्गीय व मेहनतकश परिवार इस सुविधा का लाभ नहीं उठा पायेंगे।
जिला अस्पताल का निरीक्षण करते डीएम।

मेडिकल कालेज में क्वारंटीन को गये लोग हुये परेशान
उरई। चिकित्सा दंपत्ति के कोरोना पाॅजीविट मिलने की पुष्टि के बाद जहां चिकित्सक के संपर्क में आने वाले लगभग तीन दर्जन से अधिक लोगों को आनन-फानन मंे राजकीय मेडिकल कालेज के बार्ड में क्वारंटीन कराया गया है। लेकिन व्यवस्थायें नाकाफी होने से क्वारंटीन करने पहुंचे लोग खासे परेशान रहे। सूत्रों की मानें तो बीती रात उन्हें न तो खाने को मिल पाया और न ही पीने के लिये पानी मुहैया हुआ। हैरानी की बात तो यह है कि जिस बार्ड में उन्हें रखा गया हैं वहां पर सफाई की व्यवस्था भी ठीक नहीं थी।

रोजेदारों के सामने भी समस्यायें बढ़ी
उरई। रमजान माह के तीसरे दिन सोमवार को बजरिया क्षेत्र में रोजेदारों के सामने अजीबो गरीब समस्या खड़ी हो गयी। क्षेत्र में अधिकांश दुकानें बंद होने के कारण उन्हें फल सहित जरूरी सामान नहीं मिल पाया। ऐसी स्थिति में उन्हें न तो दूध मिला और न ही सब्जी, फल आदि मिल पाये। क्षेत्रीय लोगों का मानना है कि रमजान जैसे पवित्र माह में जरूरत की सामग्री प्रशासन द्वारा मुहैया करायी जा सके ताकि रोजेदारों को परेशानियों से न जूझना पड़े।

कई गलियों में झांकर, पटिया डालकर किया बंद
उरई। चिकित्सक दंपत्ति के कोरोना पाॅजीविट पाये जाने के बाद जिस क्षेत्र में उनका पैत्रिक निवास है वहां के आसपास के लोगों ने अपनी गलियों में झांकर या फिर पटिया आदि लगाकर अपनी-अपनी गलियों को बंद कर दिया। ऐसा ही हाल मोहल्ला रामनगर में कांग्रेस कार्यालय के समीप सुनार मोहल्ले के लोगों के द्वारा किया गया। लेकिन यह बात किसी के समझ में नहीं आ रही है कि गलियों को मनमर्जी से बंद करने के पीछे ऐसे लोगों की मंशा हो सकती है।

सब्जी, फल के दामों में हुआ इजाफा
उरई। जिला मुुख्यालय पर चिकित्सक दंपत्ति के कोरोना पाॅजीविट मिलने के बाद आनन-फानन में अनिश्तिकाल के लिये थोक सब्जी व फल मंडी बंद कराये जाने के बाद जहां शहर के वांशिंदों की मुश्किलें बढ़नी शुरू हो गयी तो वहीं सब्जी व फलों के दामों में वृद्धि हो गयी है। रविवार व सोमवार को लोगों ने मोहल्ले के ही सब्जी विके्रताओं से महंगे दामों में खरीदारी करने को विवश देखे गये तो ऐसा ही आलम फलों का रहा। अनेकों जरूरतमंद लोग चाहकर भी फल व सब्जी नहीं खरीद पाये।

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