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कानपुर दर्दे लॉकडाउन: संपूर्ण बंदी से समाज के न जाने कितने लोगों पर मुसीबत का पहाड़

कोरोना संक्रमण से बचाव के लिए लागू की गई संपूर्ण बंदी समाज के न जाने कितने लोगों पर मुसीबत का पहाड़ बनकर टूटी है। कुदरत की इस विचित्र मार का शिकार खास और आम हर कोई हुआ है। सड़क किनारे फुटकर बिक्री करके परिवार पालने वाले इससे काफी प्रभावित हुए हैं। ये अपनी पीड़ा किसी से कह नहीं पा रहे। 
मुरझाती पालक देख मुरझा रहे चेहरे
आमजा भारत सवांददाता:- नौबस्ता क्षेत्र में कानपुर-सागर हाईवे किनारे दो बुजुर्ग लकड़ी का टाल लगाते थे। लॉक डाउन की वजह से बीते 20 दिनों से लकड़ी की बिक्री पूरी तरह से बंद है। दो वक्त की रोटी का जुगाड़ खत्म हुआ तो इन दोनों ने सुबह ताजी सब्जियां लगाना शुरू कर दिया। दिनभर में खाने भर का कमा लेते थे। सुबह मंडी में इन्हें कोई ऐसी सब्जी नहीं मिली जो काफी समय तक टिक सके। सुबह लाई गई पालक दोपहर 12 बजे तक मुरझा जाती है। इन्हें चिंता है कि शाम तक यह न बिकी तो पैसा बर्बाद चला जाएगा और अगले दिन दूसरी सब्जी खरीदने लायक नहीं बचेंगे। आखिरकार हुआ भी यही। दोनों बुजुर्गों ने मुरझाई पालक के कुछ अच्छे पत्तों को नमक के साथ खाकर अपना पेट भर लिया।

दूध खरीदते पर चाय बिक नहीं पाती
नवीन गल्ला मंडी नौबस्ता में 15 दिन पहले तक चाय बेचकर अपने परिवार का पेट पाल रहे बुजुर्ग कोरोना संक्रमण को बार-बार कोस रहे हैं। लॉकडाउन और कोरोना संक्रमण के डर से उनकी दुकान पर चाय पीने वालों की संख्या एक फीसदी भी नहीं बची। मंडी में ना तो न तो ट्रकों का आवागमन हो रहा है और ना ही बाहरी मजदूरों और व्यापारियों का। इस वजह से बिक्री पूरी तरह से ठप है। जगन्नाथ बताते हैं कि अब राशन वाले कुछ ट्रकों का आवागमन शुरू हुआ है। इस वजह से सुबह दूध इस उम्मीद में खरीदते हैं कि शायद कोई चाय पीने वाला आ जाए। मगर ऐसा हो नहीं रहा। वे कहते हैं चाय बिके या न बिके, लेकिन दुकान तो खोलनी ही है।

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